Uninsured Vehicles Supreme Court Order: देश में 56% वाहन बिना इंश्योरेंस, सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश- कटेगा ई-चालान और पेट्रोल-डीजल पर रोक
Supreme Court Order on Uninsured Vehicles: देश में 56% वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ई-चालान और पेट्रोल रोकने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

- No Insurance No Fuel Rule: सुप्रीम COURT का बड़ा आदेश, बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों का कटेगा ऑटोमैटिक चालान, पेट्रोल पंपों पर नहीं मिलेगा ईंधन
- वाहन चालकों के लिए बड़ी खबर! 56% गाड़ियां बिना इंश्योरेंस, सुप्रीम कोर्ट का आदेश- ई-चालान और पेट्रोल-डीजल देने पर रोक का प्रस्ताव
- Supreme Court Big Order: देश में 56% वाहन बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, सुप्रीम कोर्ट ने दिए ई-चालान और पेट्रोल रोकने के निर्देश
देश की सड़कों पर दौड़ रहे लगभग 56 प्रतिशत वाहनों के पास वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार, भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सड़कों पर तैनात एएनपीआर (ANPR) कैमरों के जरिए खुद-ब-खुद ई-चालान काटने और बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने (नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल) से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट पर काम करने का सुझाव दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में बिना वैध बीमा के चल रहे करोड़ों वाहनों के आंकड़े सामने आने के बाद मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 के उल्लंघन पर गहरा अफसोस जताया है। सरकारी आंकड़ों और संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने नोट किया कि देश में पंजीकृत कुल 30.48 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ यानी करीब 56 फीसदी वाहन बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर बेधड़क चल रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में निर्दोष पीड़ितों को उचित और समय पर मुआवजा दिलाने के उद्देश्य से अनिवार्य किए गए बीमा कानून की इस व्यापक अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह पूरा मामला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर की गई एक सिविल अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने मामले के दायरे को बढ़ाते हुए मोटर दुर्घटना मुआवजे और वाहन बीमा से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय मुद्दों पर संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि देश भर में पुलिस और परिवहन विभाग के पास जमीनी स्तर पर किसी वाहन का रीयल-टाइम इंश्योरेंस स्टेटस जांचने का एकीकृत तंत्र बेहद सीमित है।
इस स्थिति से निपटने के लिए पीठ ने एक महत्वपूर्ण और तकनीक-आधारित ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर पहले से लगे स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरों को 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल और 'बीमा सूचना ब्यूरो' (IIB) के डेटाबेस से तुरंत एकीकृत किया जाए। जैसे ही कोई बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी इन कैमरों के सामने से गुजरेगी, सिस्टम खुद-ब-खुद उसका ई-चालान जनरेट कर देगा।
इसके साथ ही, अदालत ने एक बेहद अनोखा सुझाव देते हुए IRDAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे पेट्रोलियम मंत्रालय के सहयोग से एक पायलट प्रोजेक्ट विकसित करें। इस योजना के तहत जब कोई वाहन पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाने पहुंचेगा, तो उसके इंश्योरेंस स्टेटस की जांच की जाएगी। यदि गाड़ी का बीमा समाप्त हो चुका है, तो उसे तब तक पेट्रोल या डीजल देने से मना कर दिया जाएगा जब तक कि वाहन स्वामी वैध बीमा पॉलिसी हासिल न कर ले। अदालत ने नए वाहनों की खरीद पर अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि को भी बढ़ा दिया है। अब नई निजी कारों के लिए थर्ड-पार्टी कवर 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल से बढ़ाकर 6 साल करना अनिवार्य कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने सिद्धांत रूप में सहमति व्यक्त करते हुए कहा है कि पेट्रोल पंपों पर वाहनों के इंश्योरेंस सत्यापन की प्रणाली को लागू करने में उन्हें कोई बुनियादी आपत्ति नहीं है। वहीं, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और वाहन चालकों के संगठनों ने तकनीक-आधारित ई-चालान का स्वागत किया है, लेकिन पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने की व्यवस्था के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर कुछ चिंताएं जताई हैं। बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों ने इस ऐतिहासिक आदेश का समर्थन करते हुए कहा है कि इससे न केवल दुर्घटना के शिकार परिवारों को समय पर न्याय मिलेगा, बल्कि देश में बीमा कवरेज का दायरा भी तेजी से बढ़ेगा।
शीर्ष अदालत के इन कड़े निर्देशों का असर सीधे तौर पर देश के करोड़ों वाहन मालिकों पर पड़ेगा। मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना बीमा वाहन चलाने पर पहली बार में 2,000 रुपये का जुर्माना या 3 महीने तक की जेल (या दोनों) का प्रावधान है, जबकि दूसरी बार उल्लंघन पर 4,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। एएनपीआर कैमरों और 'वाहन' पोर्टल के जुड़ने से अब कोई भी नियम तोड़ने वाला चालक डिजिटल निगरानी से बच नहीं पाएगा। साथ ही, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को हैंडहेल्ड डिवाइस और विशेष मोबाइल ऐप्स दिए जाएंगे, जिससे वे ऑन-द-स्पॉट गाड़ी का इंश्योरेंस स्टेटस देखकर तत्काल चालान काट सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में शामिल सभी संबंधित हितधारकों, जिनमें केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय, IRDAI और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल हैं, उन्हें 14 अगस्त 2026 तक अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 18 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें पेट्रोल पंपों से जुड़े 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' पायलट प्रोजेक्ट के खाके और ई-चालान प्रणाली के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की जाएगी
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