Vande Mataram in Madrasas: 'मदरसों में वंदे मातरम् गाया तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा', कलकत्ता हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
Calcutta High Court Observation: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि मदरसों में वंदे मातरम् गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा। राष्ट्रगान व राष्ट्रीय गीतों को लेकर अदालत ने तल्ख टिप्पणी की।

- Calcutta High Court Observation: मदरसों में वंदे मातरम और राष्ट्रगान पर कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा बयान, जानिए सुनवाई में क्या कहा
- 'मदरसों में वंदे मातरम् गाया तो आसमान नहीं फटेगा', कलकत्ता हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीतों पर कही यह बात
- Calcutta High Court Vande Mataram Row: मदरसों में वंदे मातरम गाने पर कलकत्ता हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी, राष्ट्रीय गान और गीत पर दिए कड़े निर्देश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मदरसों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान बेहद सख्त और मौखिक टिप्पणी की है। 5 अगस्त 2026 को सामने आई कानूनी कार्यवाही के ब्योरे के अनुसार, उच्च न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि यदि राज्य के सहायता प्राप्त या मान्यता प्राप्त मदरसों में छात्र 'वंदे मातरम्' गाते हैं, तो इससे कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत किसी भी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति सम्मान और नागरिक कर्तव्यों का प्रतीक हैं। यह मामला शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों की अनिवार्यता तथा सम्मान को लेकर दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।
पश्चिम बंगाल स्थित कलकत्ता उच्च न्यायालय में शिक्षण संस्थानों, विशेष रूप से राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त या संचालित होने वाले मदरसों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' के नियमित गायन की व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणियां करते हुए राष्ट्रीय भावना और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि बताया। अदालत का रुख यह स्पष्ट करता है कि भारत के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में राष्ट्रीय गीतों का ससम्मान गायन सांस्कृतिक व राष्ट्रीय अखंडता का हिस्सा है, जिसे किसी धार्मिक पूर्वाग्रह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
यह पूरा मामला तब अदालत के दरवाजे पहुंचा जब याचिकाओं के माध्यम से यह मुद्दा उठाया गया कि राज्य के कुछ सहायता प्राप्त मदरसों और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में नियमित प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर एकरूपता नहीं है या कई स्थानों पर इस पर हिचकिचाहट देखी जाती है। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि भारत के संविधान के तहत हर नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करे।
न्यायाधीशों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का आधार रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने देश को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादी पक्षों की दलीलों को सुनते हुए कहा कि यदि किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय या मदरसे में बच्चे वंदे मातरम् गाते हैं, तो इससे किसी की आस्था प्रभावित नहीं होती और न ही कोई आपत्तिजनक स्थिति पैदा होती है। पीठ ने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा देना हर नागरिक और संस्थान का दायित्व है।
अदालत की इस तल्ख और स्पष्ट टिप्पणी के बाद कानूनी व सामाजिक गलियारों में व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत के इस रुख का स्वागत करते हुए कहा कि सभी सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों में राष्ट्रीय प्रतीकों का समान रूप से सम्मान होना चाहिए।
दूसरी ओर, अल्पसंख्यक कल्याण और शिक्षण संस्थाओं से जुड़े कुछ कानूनी प्रतिनिधियों ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अधिकांश संस्थानों में राष्ट्रगान का पूर्ण सम्मान के साथ पालन किया जाता है। हालांकि, कुछ धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं का हवाला देते हुए कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता की मांग की गई। इस पर पीठ ने दोहराया कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों को अनावश्यक विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए।
कलकत्ता हाईकोर्ट की इस मौखिक टिप्पणी का असर पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि देश भर के शैक्षणिक और सामाजिक परिदृश्य पर पड़ने की संभावना है। अदालत के इस रुख से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी संसाधनों से चलने वाले या मान्यता प्राप्त किसी भी संस्थान में राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान अनिवार्य है। इस टिप्पणी से शिक्षा बोर्डों और राज्य सरकारों पर यह दबाव बढ़ेगा कि वे अपने अंतर्गत आने वाले सभी विद्यालयों और मदरसों में राष्ट्रगान व राष्ट्रीय गीत के नियमित एवं ससम्मान गायन के लिए पारदर्शी दिशा-निर्देश लागू करें।
उच्च न्यायालय इस मामले में अब याचिकाओं के सभी कानूनी पहलुओं, संवैधानिक प्रावधानों और पूर्व में सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का अध्ययन कर रहा है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित शिक्षा विभागों को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए समय दिया है। आगामी सुनवाइयों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या हाईकोर्ट मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों में वंदे मातरम् व राष्ट्रगान के अनिवार्य गायन को लेकर कोई लिखित व औपचारिक आदेश या विस्तृत गाइडलाइंस जारी करता है या नहीं।
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