Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: 1133 दिनों की कानूनी लड़ाई और 127 सुनवाई के बाद बृजभूषण शरण सिंह बरी, बोले- 'जो हुआ सो हुआ'

Brij Bhushan Sharan Singh Case: 1133 दिनों और 127 सुनवाई के बाद पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह बरी। पढ़ें अदालत के फैसले और उनकी प्रतिक्रिया पर विस्तृत रिपोर्ट।

Aug 3, 2026 - 12:49
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Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: 1133 दिनों की कानूनी लड़ाई और 127 सुनवाई के बाद बृजभूषण शरण सिंह बरी, बोले- 'जो हुआ सो हुआ'
  • WFI Case Brij Bhushan Acquitted: यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को मिली बड़ी राहत, अदालत ने किया बरी
  • 1133 दिन और 127 सुनवाई... बृजभूषण शरण सिंह को अदालत से बड़ी राहत, बरी होने पर दिया बड़ा बयान!
  • बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में बरी, 1133 दिनों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न से जुड़े चर्चित और लंबे समय से चले आ रहे मामले में अदालत से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की अदालत में 1133 दिनों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और 127 बार हुई विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर उन्हें बरी कर दिया है। यह मामला देश के प्रमुख महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों और लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद अदालत की चौखट तक पहुंचा था। फैसला आने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में बृजभूषण शरण सिंह ने काफी शांत रुख अपनाते हुए कहा कि "जो हुआ, सो हुआ।" अदालत के इस फैसले के बाद इस बहुचर्चित प्रकरण का विधिक पटाक्षेप हो गया है, जिसे खेल और राजनीतिक गलियारों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

भारतीय कुश्ती संघ और देश के नामचीन पहलवानों के बीच लंबे समय से चल रहा कानूनी व राजनीतिक विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली स्थित अदालत ने पूर्व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न और अन्य आरोपों पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी दलीलों का गहन विश्लेषण करने के बाद बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश दिया।

यह प्रकरण पिछले कुछ वर्षों से भारतीय खेल जगत और राष्ट्रीय राजनीति का एक बेहद संवेदनशील व बहुचर्चित विषय बना हुआ था। फैसला आते ही उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष के कानूनी प्रतिनिधियों ने फैसले का अध्ययन कर आगे का रुख तय करने की बात कही है।

इस पूरे मामले की शुरुआत महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों से हुई थी, जिसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के शीर्ष पहलवानों ने महीनों तक धरना दिया था।

आरोपों की शुरुआत और विरोध: देश के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पहलवानों ने कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष पर प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग और व्यक्तिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

अदालत की शरण और एफआईआर: सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और पुलिस जांच के बाद मामला अदालत में पंजीकृत किया गया। इसके बाद आरोप तय करने और गवाहियों की प्रक्रिया शुरू हुई।

127 सुनवाई की प्रक्रिया: लगभग 1133 दिनों तक चले इस कानूनी चक्र में कुल 127 बार अदालत में तारीखें और सुनवाई हुईं। दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दस्तावेज, बयान और साक्ष्य पेश किए गए।

फैसले का दिन: सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया गया।

अदालत से बरी होने के बाद मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने किसी भी प्रकार की कड़वाहट दिखाने से इनकार किया। उन्होंने अत्यंत संयमित शब्दों में कहा, "जो हुआ, सो हुआ।" उन्होंने न्यायपालिका के प्रति अपना विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सत्य की हमेशा विजय होती है और उन्हें शुरू से ही देश की अदालत पर पूरा भरोसा था।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता पहलवानों और उनके कानूनी सलाहकारों का कहना है कि वे अदालत के फैसले की प्रति का विस्तृत अध्ययन करेंगे। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करने का विकल्प हमेशा खुला रहता है।

कुश्ती संघ में लंबे समय से बना अनिश्चितता का माहौल समाप्त होने की उम्मीद है। महासंघ की गतिविधियों और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण सत्रों को अब नई दिशा मिल सकती है। बृजभूषण शरण सिंह के राजनीतिक करियर को लेकर उठ रहे सवालों और विरोधी दलों के हमलों पर इस फैसले से विराम लग सकता है। उनके समर्थकों का मानना है कि इस निर्णय से उनकी छवि को बल मिलेगा। यह मामला इस बात का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है कि संवेदनशील एवं हाई-प्रोफाइल मामलों में न्यायिक प्रक्रिया तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचती है।

अदालत के इस फैसले के बाद अब सभी की निगाहें शिकायतकर्ता पक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे इस निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं या नहीं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय कुश्ती संघ अपने प्रशासनिक ढांचे को पुनः व्यवस्थित करने और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय पहलवानों की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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