लखनऊ विधानसभा में विपक्ष का हंगामा: बजट सत्र में शिवपाल यादव का तीखा हमला और मदरसों पर गरमाई राजनीति

लखनऊ विधानसभा परिसर में विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया। शिवपाल यादव ने बजट और मदरसा विवाद पर सरकार को घेरा। पढ़ें पूरी खबर विस्तार से।

Aug 4, 2026 - 11:22
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लखनऊ विधानसभा में विपक्ष का हंगामा: बजट सत्र में शिवपाल यादव का तीखा हमला और मदरसों पर गरमाई राजनीति
शिवपाल यादव
  • यूपी विधानसभा बजट सत्र: विधानसभा परिसर में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन, शिवपाल यादव ने सरकार को घेरा
  • लखनऊ विधानसभा में भारी हंगामा: शिवपाल यादव का बड़ा हमला, बजट सत्र के बीच गरमाई यूपी की राजनीति
  • यूपी विधानसभा में जोरदार हंगामा: शिवपाल यादव का बड़ा बयान, बजट और मदरसों के मुद्दे पर सरकार पर निशाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लखनऊ स्थित विधानसभा परिसर में विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने राज्य सरकार की नीतियों, आगामी बजट प्रावधानों और मदरसों को लेकर जारी विवाद पर तीखा हमला बोला। विधानसभा परिसर में एकत्रित विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए जनहित के मुद्दों को उठाया। शिवपाल यादव ने सरकार पर जनता से जुड़े मूल प्रश्नों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम के बाद सदन से लेकर सड़क तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में बजट चर्चा के दौरान इस सियासी रस्साकशी के और तेज होने के आसार हैं।

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के सत्र के दौरान लखनऊ स्थित विधानसभा परिसर में विपक्ष की ओर से तीखा विरोध-प्रदर्शन देखा गया। समाजवादी पार्टी के विधायक और वरिष्ठ नेता सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही परिसर में एकत्रित हो गए और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन का मुख्य केंद्र प्रदेश की आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई, आगामी बजट और हाल ही में मदरसों के संदर्भ में दिए गए बयानों व कार्यवाहियों का मुद्दा रहा।

वरिष्ठ सपा नेता शिवपाल यादव ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई और बेरोजगारी से पस्त है, जबकि सरकार केवल लोकलुभावन दावों के जरिए अपनी नाकामियों को छिपाने का प्रयास कर रही है। परिसर में हुए इस हंगामे के कारण सत्र की शुरुआत काफी गहमागहमी के माहौल में हुई।

सत्र के तय समय के अनुसार विधायकों का विधानसभा पहुंचना शुरू हुआ। इसी दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने हाथों में तख्तियां लेकर चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष और विधानसभा के मुख्य द्वार पर विरोध जताना शुरू कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए किसानों की समस्याओं, युवाओं के रोजगार और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरा।

इसी बीच मीडिया से बातचीत करते हुए शिवपाल सिंह यादव ने आरोप लगाया कि सरकार बजट सत्र के जरिए केवल चुनावी जमीन तैयार करने में जुटी है, लेकिन धरातल पर आम नागरिक को कोई राहत नहीं मिल रही है। इसके साथ ही हाल के दिनों में मदरसों की जांच और प्रशासनिक सख्तियों को लेकर चल रही बहसों पर भी विपक्षी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विशेष वर्गों को निशाना बनाकर मूल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। परिसर में हुए भारी हंगामे के बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो वहां भी विपक्षी सदस्यों ने अपनी बात मजबूती से रखी, जिससे पीठ को व्यवस्था बनाए रखने के लिए बार-बार निर्देश देने पड़े।

इस पूरे घटनाक्रम पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने कहा कि सरकार केवल प्रचार-प्रसार में व्यस्त है और आगामी बजट में प्रदेश के विकास के लिए कोई ठोस दृष्टि दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों और अन्य संस्थाओं के नाम पर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जिससे महंगाई, बिजली की दरों और बेरोजगारी जैसे वास्तविक मुद्दों पर बात न हो सके।

दूसरी ओर, सत्ता पक्ष की तरफ से भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं और सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार पारदर्शी शासन और उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मदरसों के संबंध में की जा रही कार्रवाइयां पूरी तरह नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं और इनका किसी पूर्वाग्रह से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने भी जनहित के मुद्दों को उठाने का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष के सवालों से भागने के बजाय उनके जवाब देने चाहिए।

विधानसभा परिसर में हुए इस प्रदर्शन और बयानबाजी का व्यापक असर प्रदेश की राजनीति पर देखने को मिल रहा है। बजट सत्र के शुरुआती दिनों में ही हंगामे के आसार बढ़ गए हैं, जिससे बजट पर होने वाली विस्तृत चर्चा के दौरान विपक्ष का यह सख्त रुख सरकार के लिए विधायी कामकाज निपटाने में चुनौती खड़ी कर सकता है।

इसके अलावा, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर विपक्ष जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह जनहित की लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर खड़ा है। साथ ही, मदरसा जांच और उससे जुड़ी बयानबाजी से राजनीतिक ध्रुवीकरण की स्थिति भी पैदा हो रही है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति का एजेंडा तय होने की संभावना जताई जा रही है।

आगामी दिनों में विधानमंडल सत्र के दौरान बजट आवंटन, विभागीय अनुदान मांगों और विभिन्न विधेयकों पर विस्तृत चर्चा होनी तय है। इस दौरान सरकार अपनी प्राथमिकताओं और विकास योजनाओं का ब्यौरा सदन के पटल पर रखेगी, जबकि विपक्ष आंकड़ों के जरिए सरकारी दावों को घेरने की रणनीति बनाएगा।

समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दल सदन के अंदर और बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रखने के स्पष्ट संकेत दे चुके हैं। दूसरी तरफ, मदरसों और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सरकारी तंत्र अपनी जांच और प्रशासनिक समीक्षा प्रक्रिया को नियमों के अनुसार आगे बढ़ाएगा, जिस पर अदालती और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नजरें टिकी रहेंगी।

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