Jharkhand Student Protest: देवेंद्र नाथ महतो ने सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद तोड़ी भूख हड़ताल, JPSC-JSSC में सुधार की मांग तेज
Jharkhand Student Protest: JPSC-JSSC भर्ती धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से फोन पर बात के बाद अनशन समाप्त किया।

- Devendra Nath Mahto Hunger Strike: रांची में छात्र आंदोलन के चेहरे देवेंद्र नाथ महतो का अनशन समाप्त, सोनम वांगचुक से फोन पर हुई चर्चा
- झारखंड छात्र आंदोलन: लद्दाख के चर्चित कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से फोन पर बात के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ी भूख हड़ताल
- Jharkhand Student Protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ी भूख हड़ताल, सोनम वांगचुक से फोन पर बातचीत के बाद लिया फैसला
झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली व अनियमतताओं के विरोध में राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से टेलीफोन पर हुई विस्तृत बातचीत और उनके परामर्श के बाद अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। 5 अगस्त 2026 को सामने आई इस अहम जानकारी के अनुसार, वांगचुक ने महतो के स्वास्थ्य के प्रति चिंता जताते हुए आंदोलन को शारीरिक रूप से कमजोर हुए बिना लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने की सलाह दी। इस संवाद के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता और जांच की मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (JSSC) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, परिणाम में गड़बड़ियों और प्रशासनिक कमियों को लेकर पिछले कई दिनों से रांची में युवाओं का बड़ा प्रदर्शन चल रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा चेहरा देवेंद्र नाथ महतो बीते दिनों अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। उन्हें आंदोलनकारी छात्र और समर्थक 'सोनम वांगचुक 2.0' का नाम दे रहे थे। इस बीच लद्दाख में हाल ही में शांतिपूर्ण अनशन करने वाले प्रसिद्ध पर्यावरण व शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से उनकी फोन पर सीधी बात हुई। वांगचुक द्वारा आंदोलन को रचनात्मक व अहिंसक तरीके से आगे बढ़ाने के सुझाव और स्वास्थ्य की रक्षा की अपील को स्वीकार करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला किया।
पूरे विवाद की शुरुआत 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद हुई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया और ओएमआर शीट के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। इसके साथ ही जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा में भी पेपर लीक और अव्यवस्थाओं के मुद्दे को लेकर परीक्षार्थी महीनों से आंदोलित हैं। मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान न निकलता देख देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के मोराबादी और बापू वाटिका के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डे-नाइट सत्याग्रह और फिर भूख हड़ताल का ऐलान किया था।
भूख हड़ताल के दौरान देवेंद्र नाथ महतो का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। इसी दौरान उनका संपर्क दिल्ली और लद्दाख के अभियानों से जुड़े सामाजिक मंचों और सोनम वांगचुक से हुआ। फोन पर हुई चर्चा में सोनम वांगचुक ने छात्रों की न्यायसंगत मांगों का समर्थन किया और कहा कि युवाओं की ऊर्जा इस राज्य के निर्माण के लिए जरूरी है, इसलिए जीवन और स्वास्थ्य को संकट में डाले बिना आंदोलन का संवैधानिक रास्ता चुना जाना चाहिए। इसके बाद अनशन स्थल पर मौजूद अन्य सहयोगियों और छात्रों की उपस्थिति में महतो ने तरल पदार्थ ग्रहण कर भूख हड़ताल समाप्त की।
भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद मीडिया से बात करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, "सोनम वांगचुक जी का मार्गदर्शन हमारे लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने हमें समझाया कि लड़ाई लंबी है और नेतृत्व करने वालों का शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। हमने अनशन भले ही तोड़ा है, लेकिन हमारा आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। जब तक जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं की सीबीआई (CBI) व ईडी (ED) जांच नहीं होती और 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द कर नए सिरे से पारदर्शिता नहीं अपनाई जाती, हम पीछे नहीं हटेंगे।"
दूसरी ओर, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन ने छात्र नेता के अनशन समाप्त करने के फैसले का स्वागत किया है। प्रशासन का कहना है कि सरकार छात्रों की शिकायतों के प्रति संवेदनशील है और नियमानुसार उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
देवेंद्र नाथ महतो के भूख हड़ताल समाप्त करने से अनशन स्थल पर संभावित स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति तो टल गई है, लेकिन छात्रों का आक्रोश और एकजुटता जस की तस बनी हुई है। सोनम वांगचुक जैसी राष्ट्रीय शख्सियत के इस आंदोलन से जुड़ने और संवाद होने के कारण झारखंड के इस भर्ती घोटाले के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान मिला है। सोशल मीडिया पर 'झारखंड मांगे न्याय' और 'JPSC-JSSC सुधार' जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। राज्य भर से आ रहे प्रतियोगी छात्र अब आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं, जिससे हेमंत सोरेन नीत राज्य सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव और बढ़ गया है।
अनशन समाप्त होने के बाद छात्र संगठन अब चरणबद्ध तरीके से अपनी लड़ाई आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। छात्र नेताओं के अनुसार, अब राज्य भर के जिलों में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा और राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को पुनः अपनी सूत्रीय मांग पत्र सौंपी जाएगी। छात्रों की मुख्य मांगों में 14वीं जेपीएससी पीटी को रद्द करना, स्वतंत्र जांच एजेंसियों से भर्ती परीक्षाओं की जांच कराना, और पारदर्शी परीक्षा कानून लागू करना शामिल है। यदि सरकार जल्द ही वार्ता का ठोस प्रस्ताव नहीं देती है, तो छात्र पूरे राज्य में बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने की तैयारी में हैं।
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