बैंक अधिकारी बनकर खाली कर देते थे खाता! दिल्ली पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मार 10 महिलाओं समेत 18 को दबोचा
Delhi Cyber Crime News: दिल्ली पुलिस ने फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। 10 महिलाओं समेत 18 आरोपी गिरफ्तार।

- Delhi Cyber Fraud Racket Busted: दिल्ली में फर्जी बैंक अधिकारियों के बड़े गिरोह का भंडाफोड़, 10 महिलाओं समेत 18 गिरफ्तार
- Delhi Cyber Cell Action: बैंक अधिकारी बनकर ठगी करने वाले कॉल सेंटर पर दिल्ली पुलिस का छापा, 18 जालसाज दबोचे
- दिल्ली साइबर क्राइम अपडेट: फर्जी बैंक अधिकारी बनकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 18 सदस्य गिरफ्तार
देश की राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। दक्षिण दिल्ली के एक रिहायशी इलाके में अवैध रूप से संचालित हो रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से 10 महिलाओं सहित कुल 18 शातिर आरोपियों को हिरासत में लिया है। यह गिरोह देश भर के भोले-भाले बैंक उपभोक्ताओं को अपना निशाना बनाता था। आरोपी खुद को नामी राष्ट्रीयकृत बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी या क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट के कर्मचारी बताकर लोगों को झांसे में लेते थे और कस्टोडियन डेटा हासिल कर उनके खातों से पैसे उड़ा लेते थे। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सिम कार्ड और संदिग्ध डेटा शीट भी बरामद की है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
साइबर स्पेस में ठगी के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली पुलिस की विशेष साइबर टीम (Cyber Cell) को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अज्ञात लोग खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर लोगों के खातों से अनधिकृत रूप से पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं। इन तकनीकी शिकायतों के विधिक विश्लेषण और मोबाइल टावर लोकेशंस के इनपुट के आधार पर पुलिस ने दिल्ली के एक परिसर को चिह्नित किया। सोमवार (22 जून 2026) को जब पुलिस टीम ने वहां औचक दबिश दी, तो एक पूरी तरह सुसज्जित अवैध कॉल सेंटर चलता हुआ पाया गया, जहां से दर्जनों युवक-युवतियां हेडफोन लगाकर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को फोन मिला रहे थे। गिरोह के सरगना विभिन्न अनधिकृत स्रोतों और डार्क वेब से बैंक ग्राहकों का डेटाबेस (नाम, मोबाइल नंबर और बैंक का नाम) खरीदते थे। इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को यह लिस्ट सौंपी जाती थी। गिरोह में शामिल महिलाएं और पुरुष बेहद पेशेवर अंदाज में ग्राहकों से बात करते थे। वे ग्राहकों को झांसा देते थे कि उनका क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने वाला है, या उनके खाते का केवाईसी (KYC) अपडेट होना है।
ग्राहकों का विश्वास जीतने के बाद, आरोपी उनके मोबाइल पर आने वाले गुप्त वन-टाइम पासवर्ड (OTP) या अन्य बैंकिंग क्रेडेंशियल्स को चालाकी से पूछ लेते थे। जैसे ही पीड़ित जानकारी साझा करता, बैंक खाते से पैसे किसी अन्य फर्जी या 'म्यूल अकाउंट' (Mule Account) में ट्रांसफर कर दिए जाते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 32 से अधिक स्मार्टफोन, 5 लैपटॉप, विभिन्न कंपनियों के एक्टिवेटेड सिम कार्ड और सैकड़ों ग्राहकों के नाम व नंबर वाली कागजी शीट जब्त की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने प्रेस वार्ता में बताया, "यह गिरोह बेहद संगठित रूप से काम कर रहा था। पकड़े गए 18 संदिग्धों में से 10 महिलाएं हैं, जिन्हें बातचीत में माहिर होने के कारण विशेष रूप से काम पर रखा गया था ताकि ग्राहकों को कोई शक न हो। मामले में धोखाधड़ी (420) और आईटी एक्ट (IT Act) की विभिन्न विधिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालांकि, जांच जारी होने के कारण किसी को भी सीधे दोषी घोषित नहीं किया जा सकता, कोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही तथ्य पूरी तरह साफ होंगे।"
साइबर सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि कोई भी प्रामाणिक बैंक कभी भी फोन पर ग्राहकों से उनके व्यक्तिगत पासवर्ड, पिन या ओटीपी की मांग नहीं करता है। उपभोक्ताओं को अपनी डिजिटल सुरक्षा के प्रति खुद भी बेहद जागरूक रहना होगा। दिल्ली और एनसीआर (NCR) के अन्य हिस्सों में किराए की इमारतों में चल रहे अन्य संदिग्ध कॉल सेंटर्स पर भी स्थानीय खुफिया एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है। पुलिस अब उन बैंक खातों (Mule Accounts) की पड़ताल कर रही है जिनमें ठगी की रकम भेजी जाती थी। इससे आने वाले दिनों में कुछ अन्य सहयोगियों के नाम भी सामने आने की उम्मीद है। इस खबर के मुख्यधारा में आने से आम बैंक उपभोक्ताओं के बीच एक बार फिर यह संदेश गया है कि वे फोन पर आने वाली ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें।
पुलिस की तकनीकी टीम अब जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोनों के कॉल लॉग्स और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी, जिससे इस गिरोह के मुख्य सूत्रधारों और उनके अंतरराज्यीय संपर्कों का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।
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