ट्रंप का ऐतिहासिक बयान: '3000 साल लग गए' गाजा शांति समझौते पर; शहबाज शरीफ की तारीफ में नोबेल नामांकन।

मिस्र के शर्म एल शेख में 13 अक्टूबर 2025 को एक भव्य शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हमास के बीच गाजा पट्टी में

Oct 14, 2025 - 12:16
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ट्रंप का ऐतिहासिक बयान: '3000 साल लग गए' गाजा शांति समझौते पर; शहबाज शरीफ की तारीफ में नोबेल नामांकन।
ट्रंप का ऐतिहासिक बयान: '3000 साल लग गए' गाजा शांति समझौते पर; शहबाज शरीफ की तारीफ में नोबेल नामांकन।

मिस्र के शर्म एल शेख में 13 अक्टूबर 2025 को एक भव्य शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हमास के बीच गाजा पट्टी में युद्ध विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता दो साल से ज्यादा चले खूनी संघर्ष को समाप्त करने का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रंप ने हस्ताक्षर समारोह के दौरान एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस शांति समझौते को हासिल करने में 3000 साल लग गए। ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति की यह उपलब्धि प्राचीन काल से चली आ रही दुश्मनी का अंत है। उन्होंने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच सदियों पुरानी जड़ों का जिक्र किया और कहा कि यह समझौता न केवल युद्ध रोकता है बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक है। सम्मेलन में 20 से ज्यादा विश्व नेता मौजूद थे। इनमें सऊदी अरब, कतर, तुर्की, जॉर्डन और मिस्र जैसे मुस्लिम देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। ट्रंप ने इस मौके पर अपनी 20 सूत्री शांति योजना का श्रेय लिया और कहा कि यह योजना गाजा को फिर से बसाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का रोडमैप है।

यह समझौता 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले से शुरू हुए युद्ध का परिणाम है। उस हमले में 1200 से ज्यादा इजरायली मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इजरायल की जवाबी कार्रवाई में गाजा में 67 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए। गाजा की अधिकांश इमारतें तबाह हो चुकी हैं और वहां मानवीय संकट गहरा गया है। ट्रंप की योजना के पहले चरण में हमास ने सभी 48 बंधकों को रिहा करने पर सहमति जताई। इनमें 20 जीवित बंधक शामिल हैं। बदले में इजरायल ने 250 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जो आजीवन कारावास काट रहे थे। साथ ही 1700 गाजा निवासियों को भी आजाद किया गया जो युद्ध के बाद गिरफ्तार हुए थे। ट्रंप ने कहा कि यह आदान-प्रदान 72 घंटों के अंदर पूरा हो गया। इजरायली सेना ने गाजा से आंशिक रूप से पीछे हटना शुरू कर दिया है। योजना के मुताबिक गाजा का प्रारंभिक शासन फिलिस्तीनी तकनीकी विशेषज्ञों के एक अस्थायी समिति के हाथ में होगा। इसकी निगरानी ट्रंप की अध्यक्षता में एक शांति बोर्ड करेगा। पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी इस बोर्ड में शामिल हैं। हमास के सदस्यों को शांति के लिए क्षमा का प्रस्ताव दिया गया है। जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चुनेंगे उन्हें रहने की अनुमति होगी अन्यथा सुरक्षित मार्ग से बाहर जाने का विकल्प मिलेगा। कोई फिलिस्तीनी जबरन बाहर नहीं निकाला जाएगा।

ट्रंप ने अपनी योजना को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने 2005 में गाजा से पीछे हटकर शांति की कोशिश की थी लेकिन हमास ने इसे बर्बाद कर दिया। अब यह योजना हमास को निहत्था करने और गाजा को आतंक मुक्त क्षेत्र बनाने पर केंद्रित है। ट्रंप ने कहा कि गाजा को नई गाजा के रूप में पुनर्निर्मित किया जाएगा। इसमें आर्थिक विकास योजना शामिल है जिसमें विशेषज्ञों की एक टीम गाजा को ऊर्जावान बनाएगी। उन्होंने इजरायल से कहा कि आप जीत चुके हैं अब निर्माण पर ध्यान दें। ट्रंप ने कतर, मिस्र, तुर्की और अमेरिकी मध्यस्थों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमलों ने हमास को समझौते के लिए मजबूर किया। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने काहिरा में अंतिम विवरण तय किए। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के प्रयासों की तारीना की और कहा कि यह योजना इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। विपक्षी नेता बेनी गैंट्स ने भी योजना को लागू करने की मांग की। हमास ने योजना के कुछ हिस्सों पर सहमति जताई लेकिन हथियार डालने पर चुप्पी साधी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले चरणों में निहत्थापन और फिलिस्तीनी प्राधिकरण की भूमिका पर विवाद हो सकता है।

इस शिखर सम्मेलन का एक रोचक पहलू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भागीदारी था। ट्रंप ने अपने भाषण के बाद शहबाज को मंच पर बुलाया। शहबाज ने ट्रंप की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में शांति के पुरुष हैं। शहबाज ने ट्रंप को सलाम किया और कहा कि आपका नेतृत्व इस ऐतिहासिक समझौते का कारण है। उन्होंने ट्रंप को फिर से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की घोषणा की। शहबाज ने कहा कि यह समझौता फिलिस्तीन और इजरायल के बीच स्थायी शांति का द्वार खोलेगा। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास पर जोर दिया। ट्रंप ने शहबाज के इस बयान पर हंसते हुए कहा कि मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने शहबाज और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को धन्यवाद दिया। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान ने योजना का 100 प्रतिशत समर्थन किया। यह समर्थन योजना की शुरुआत से ही मिला। शहबाज की यह तारीफ पाकिस्तान में विवाद का कारण बनी। कई पाकिस्तानी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे चापलूसी बताया। उन्होंने कहा कि यह फिलिस्तीन के साथ विश्वासघात है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पहले योजना को मुस्लिम देशों के मूल प्रस्ताव से अलग बताया था लेकिन शहबाज ने इसे स्वीकार किया।

ट्रंप ने शहबाज और मुनीर को अविश्वसनीय बताया। उन्होंने कहा कि ओवल ऑफिस में हुई बैठक में पाकिस्तान ने पूर्ण सहयोग का वादा किया। ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन, इंडोनेशिया और तुर्की के नेताओं को भी धन्यवाद दिया। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की। पाकिस्तान ने योजना का समर्थन करते हुए कहा कि यह गाजा में रक्तपात रोकने का कदम है। शहबाज ने हमास के बयान का स्वागत किया और कहा कि यह ceasefire का अवसर है। लेकिन पाकिस्तान में आलोचना तेज हो गई। विपक्ष ने कहा कि शहबाज वाशिंगटन को खुश करने के लिए फिलिस्तीन को बेच रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि शांति बिना न्याय के खाली है। योजना को कब्जे का नया नाम बताया जा रहा है। ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार पर नजर रखी है। उन्होंने कहा कि यह उनका आठवां संघर्ष है जिसे उन्होंने सुलझाया। नोबेल समिति 14 अक्टूबर को विजेता घोषित करने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप को पुरस्कार मिलने पर विवाद बढ़ेगा।

यह समझौता मध्य पूर्व की राजनीति को नया आकार दे सकता है। गाजा में सहायता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह मानवीय संकट कम करने का पहला कदम है। लेकिन फिलिस्तीनियों का कहना है कि योजना में न्याय की कमी है। इजरायल ने कहा कि यह हमास के आतंक को खत्म करेगा। ट्रंप ने कहा कि अब काबुल और इस्लामाबाद के बीच तनाव पर ध्यान देंगे। शहबाज की तारीफ ने पाकिस्तान अमेरिका संबंधों को मजबूत किया लेकिन घरेलू असंतोष बढ़ाया। आने वाले दिनों में योजना के दूसरे चरण पर बात होगी। इसमें गाजा का पूर्ण पुनर्निर्माण और फिलिस्तीनी राज्य का मुद्दा शामिल है। विश्व समुदाय उम्मीद कर रहा है कि यह शांति टिकेगी। ट्रंप का 3000 साल वाला बयान इतिहास में दर्ज हो गया। यह दर्शाता है कि शांति कितनी कठिन है। शहबाज का नोबेल नामांकन ट्रंप को खुश करने का प्रयास लगता है। लेकिन यह विवादास्पद बना रहेगा। गाजा के लोग अब शांति की उम्मीद में हैं। युद्ध ने सब कुछ छीन लिया था। अब पुनर्निर्माण की बारी है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से गाजा फिर से फल-फूल सकता है। ट्रंप ने कहा कि यह नई गाजा का जन्म है। दुनिया देख रही है कि यह सपना साकार होता है या नहीं।

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