सैटेलाइट इंटरनेट पर रिलायंस का दो टूक जवाब: स्टारलिंक का स्वागत, लेकिन भारत के नियम सबके लिए समान हों

स्टारलिंक के साथ मुकाबले पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रुख साफ किया है। कंपनी ने कहा कि वह सैटेलाइट ब्रॉडबैंड में सभी कंपनियों का स्वागत करती है, लेकिन नियम सबके लिए एक समान होने चाहिए।

Oct 16, 2026 - 15:40
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सैटेलाइट इंटरनेट पर रिलायंस का दो टूक जवाब: स्टारलिंक का स्वागत, लेकिन भारत के नियम सबके लिए समान हों
  • 'हमें कभी मुकाबले का डर नहीं रहा', एलन मस्क की स्टारलिंक से प्रतिस्पर्धा पर रिलायंस का बड़ा बयान
  •  स्टारलिंक की भारत में एंट्री पर रिलायंस का रुख साफ: प्रतिस्पर्धा स्वीकार, पर विदेशी कंपनियों के लिए अलग नियम नहीं
  • 2016 में शून्य से 53 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचे: रिलायंस ने स्टारलिंक को दी नियमों के तहत स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की चुनौती

मुंबई: देश के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में वैश्विक कंपनियों के प्रवेश को लेकर जारी चर्चा के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की संभावित भारतीय एंट्री और बाजार में प्रतिस्पर्धा से जुड़े बयानों का जवाब देते हुए रिलायंस ने कहा कि उसे किसी भी स्तर पर मुकाबले का भय नहीं है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि भारत में घरेलू और विदेशी दोनों तरह की कंपनियों के निवेश तथा नई तकनीक का स्वागत है, लेकिन देश के कानून, सुरक्षा मानक और नियामकीय शर्तें सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।

रिलायंस ने जारी बयान में कहा कि भारतीय दूरसंचार और डिजिटल बाजार पूरी तरह खुला और प्रतिस्पर्धी है। कंपनी ने रेखांकित किया कि सेवा प्रदाता चाहे स्थानीय हो या बहुराष्ट्रीय, भारत में सेवाएं शुरू करने से पहले जरूरी नियामकीय स्वीकृतियों और समान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित होना अनिवार्य है।

  • जियो की सैटेलाइट सेवाएं भी नियामकीय मंजूरी के दौर में

बाजार में नियमों की समानता पर जोर देते हुए रिलायंस ने जानकारी दी कि उसकी अपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं भी सरकारी और नियामकीय स्वीकृतियों की निर्धारित प्रक्रिया से गुजर रही हैं। इसका सीधा अर्थ है कि घरेलू दिग्गज होने के बावजूद जियो को भी वही प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ रही हैं जो किसी भी सेवा प्रदाता के लिए अनिवार्य हैं।

कंपनी ने सरकार के उस दृष्टिकोण का समर्थन किया जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी विदेशी इकाई को विशेष रियायत देने के बजाय भारतीय और वैश्विक कंपनियों के लिए एक पारदर्शी और समान व्यवस्था (Level Playing Field) लागू रहनी चाहिए।

  • 2016 के शून्य से 53 करोड़ ग्राहकों के सफर का हवाला

मुकाबले से पीछे न हटने की बात कहते हुए रिलायंस ने जियो के सफर का उदाहरण सामने रखा। कंपनी ने याद दिलाया कि जब वर्ष 2016 में जियो ने दूरसंचार बाजार में कदम रखा था, तब उसके पास एक भी उपभोक्ता नहीं था और बाजार में कई स्थापित बहुराष्ट्रीय व घरेलू कंपनियां मौजूद थीं।

कंपनी ने कहा कि गुणवत्ता, किफायती डेटा और बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर आज उसके पास 53 करोड़ से अधिक उपभोक्ता जुड़े हैं। रिलायंस के अनुसार, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा हमेशा ग्राहकों के हित में होती है, बशर्ते सभी पक्ष स्थापित नियमों की परिधि में रहकर सेवाएं दें।

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