US Green Card Freeze: इंफोसिस और एचसीएल समेत 8 बड़ी कंपनियों पर ट्रंप का कड़ा एक्शन, ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप पर लगाई रोक

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इंफोसिस और एचसीएल समेत 8 आईटी कंपनियों के लिए एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। जानिए इसका भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्या असर होगा।

Oct 9, 2026 - 12:01
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US Green Card Freeze: इंफोसिस और एचसीएल समेत 8 बड़ी कंपनियों पर ट्रंप का कड़ा एक्शन, ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप पर लगाई रोक
  • Donald Trump Action on IT Giants: अमेरिकी प्रशासन ने 8 आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम किए निलंबित, भारतीय प्रोफेशनल्स में हड़कंप
  • US Visa Policy Shift: 'अमेरिकन फर्स्ट' नीति के तहत ट्रंप सरकार का बड़ा प्रहार, भारतीय टेक कंपनियों के एम्प्लॉयमेंट आधारित ग्रीन कार्ड पर पाबंदी
  • भारतीय आईटी सेक्टर को अमेरिका में झटका: इंफोसिस, एचसीएल टेक पर अमेरिकी श्रम विभाग का शिकंजा, जानिए भारतीय कर्मचारियों पर क्या होगा असर

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने घरेलू रोजगार की सुरक्षा और 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' नीति को आगे बढ़ाते हुए प्रमुख भारतीय व वैश्विक तकनीकी कंपनियों पर अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत प्रहार किया है। अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) और नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के समन्वय से भारत की शीर्ष आईटी दिग्गज इंफोसिस (Infosys), एचसीएलटेक (HCLTech) और कॉग्निजेंट समेत कुल आठ प्रमुख आउटसोर्सिंग व टेक्नोलॉजी फर्म्स के लिए रोजगार-आधारित स्थायी निवास (Employment-Based Green Card) की स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया को अस्थायी रूप से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देकर और कम वेतन पर आउटसोर्सिंग मॉडल चलाकर स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित किया है। इस कड़े प्रशासनिक कदम के बाद अमेरिका में वर्षों से कानूनी रूप से काम कर रहे लाखों भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स, टेक कंसल्टेंट्स और उनके परिवारों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है।

  • अमेरिकी प्रशासन के एक्शन का दायरा और आरोप

अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जांच के दायरे में आई आठ कंपनियों के लेबर सर्टिफिकेशन (PERM - Program Electronic Review Management) और आई-140 (Immigrant Petition for Alien Worker) आवेदनों के नए प्रसंस्करण पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

  • प्रशासनिक जांच में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं को आधार बनाया गया है:

वेतन विसंगति का दावा: आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों ने समान पद पर स्थानीय अमेरिकी तकनीकी विशेषज्ञों को दिए जाने वाले वेतन की तुलना में विदेशी वीजा धारकों (मुख्यतः H-1B) को कम वेतनमान पर रखा, जिससे स्थानीय मजदूरी दर प्रभावित हुई।

विज्ञापन और स्थानीय भर्ती में खानापूर्ति: ग्रीन कार्ड आवेदन से पहले अमेरिकी कानून के तहत यह साबित करना होता है कि उस पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कंपनियों ने स्थानीय भर्ती की इस प्रक्रिया का विधिवत पालन नहीं किया।

थर्ड-पार्टी क्लाइंट प्लेसमेंट: विदेशी कर्मचारियों को सीधे कंपनी के बजाय तीसरे पक्ष (क्लाइंट लोकेशंस) पर तैनात करने के मॉडल पर कड़े सुरक्षा और श्रम ऑडिट के आदेश दिए गए हैं।

  • भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर क्या पड़ेगा सीधा असर?

अमेरिका में रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी भारतीय आईटी पेशेवरों की है। इस ताजा निलंबन का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखा जा रहा है:

लंबित ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं पर रोक: जिन कर्मचारियों की प्रक्रिया अभी प्राथमिक स्तर पर थी या जिनका PERM सर्टिफिकेशन पाइपलाइन में था, उनके आवेदन अनिश्चितकाल के लिए अटक जाएंगे।

एच-1बी वीजा एक्सटेंशन की जटिलता: सामान्यतः 6 वर्ष की अधिकतम सीमा के बाद H-1B वीजा का नवीनीकरण तभी संभव होता है जब कर्मचारी का I-140 आवेदन स्वीकृत हो चुका हो। नई स्पॉन्सरशिप रुकने से कई कर्मचारियों के लिए 6 साल बाद अमेरिका में कानूनी रूप से टिके रहना मुश्किल हो जाएगा।

परिवारों पर मानसिक और वित्तीय दबाव: एच-4 वीजा पर रह रहे आश्रितों (जीवनसाथी और बच्चों) के वर्क परमिट (H-4 EAD) और भविष्य की स्थिरता पर सीधा संकट खड़ा हो सकता है।

  • भारतीय आईटी कंपनियों की प्रतिक्रिया और रणनीति

कार्रवाई के दायरे में आई कंपनियों विशेष रूप से इंफोसिस और एचसीएलटेक ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी श्रम और आव्रजन कानूनों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और किसी भी प्रकार के अवैध तौर-तरीकों का उपयोग नहीं करती हैं।

उद्योग सूत्रों के अनुसार:

कंपनियां अमेरिकी अधिकारियों के साथ तकनीकी ऑडिट और दस्तावेज सत्यापन में पूरा सहयोग कर रही हैं ताकि निलंबन को जल्द से जल्द हटवाया जा सके।

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टेक कंपनियों ने अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियों (Local Hiring) को 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है और इंडियाना, उत्तरी कैरोलिना तथा टेक्सास जैसे राज्यों में विशाल इनोवेशन हब स्थापित किए हैं।

आईटी उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन नैसकॉम (NASSCOM) ने भी इस तरह के कदमों पर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे अमेरिकी उद्यमों में गंभीर तकनीकी कौशल की कमी (Skill Gap) पैदा हो सकती है, जो अंततः अमेरिकी अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचाएगी।

आव्रजन व कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रशासनिक आदेश को अमेरिकी अदालतों में चुनौती दिए जाने की पूरी संभावना है। अतीत में भी ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी और ग्रीन कार्ड नियमों को सख्त करने के लिए जारी कई कार्यकारी आदेशों को संघीय अदालतों ने प्रक्रियागत खामियों के आधार पर खारिज कर दिया था।

इसके साथ ही, भारत सरकार के विदेश और वाणिज्य मंत्रालय भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं और उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवादों में कुशल भारतीय पेशेवरों के निर्वाध आवागमन और कानूनी अधिकारों का मुद्दा उठाए जाने की संभावना है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका में कार्यरत भारतीय तकनीकी कामगारों के लिए प्रतीक्षा और सतर्कता का समय बना रहेगा।

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