एसआईआर और दिल्ली प्रदर्शनों पर 6 अमेरिकी सांसदों ने उठाए सवाल, भारत ने आंतरिक मामलों में दखल करार दिया
अमेरिका के छह सांसदों ने भारत में एसआईआर प्रक्रिया और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रमों पर चिंता जताई है। भारत ने इसे आंतरिक मामलों में अनुचित दखल बताया है।

- मतदाता सूची संशोधन और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर अमेरिकी सांसदों की टिप्पणी, भारत का कड़ा राजनयिक रुख
- भारत की चुनावी प्रक्रिया पर अमेरिकी सांसदों के सवालों से विवाद, भारतीय राजनयिक बोले- मजबूत हैं संवैधानिक संस्थाएं
- अमेरिकी सांसदों ने भारत में एसआईआर और प्रदर्शनकारियों की स्थिति पर जताई चिंता, भारत ने दी दो टूक नसीहत
वाशिंगटन / नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान और राजधानी दिल्ली में नागरिक प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के छह सांसदों ने भारत में चल रहे एसआईआर अभियान के तहत मसौदा मतदाता सूची से नामों के कथित विलोपन और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े हालिया विरोध-प्रदर्शनों व कार्यवाहियों को लेकर सार्वजनिक चिंता व्यक्त की है।
अमेरिकी सांसदों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए लोकतांत्रिक अधिकारों, शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता और मतदाता सूची संशोधन की पारदर्शिता का मुद्दा उठाया। उन्होंने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस क्षेत्र में सीजेपी के प्रदर्शनकारियों पर प्रशासनिक पाबंदियों और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के संदर्भ में भी सवाल खड़े किए।
- भारतीय राजनयिकों का कड़ा ऐतराज: संप्रभु मामलों में टिप्पणी अस्वीकार्य
अमेरिकी सांसदों के इन बयानों पर भारतीय राजनयिक हलकों ने तत्काल और सख्त प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। वाशिंगटन में भारतीय दूतावास और शीर्ष राजनयिकों ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जहां चुनाव प्रणाली और नागरिक अधिकार स्वतंत्र और मजबूत संवैधानिक संस्थाओं के तहत पूरी तरह सुरक्षित हैं।
भारतीय पक्ष ने रेखांकित किया कि किसी अन्य देश के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा भारत की आंतरिक और विधिक प्रक्रियाओं पर टिप्पणी करना अनुचित हस्तक्षेप के समान है। राजनयिकों ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने का कार्य पूरी तरह तय नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत होता है, जिसे राजनीतिक नजरिए से देखना भ्रामक है।
भारतीय अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर अभियान के दौरान यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं हो पाता है, तो चुनाव आयोग के स्थापित नियमों के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाता है। संबंधित नागरिक तय प्रपत्र भरकर अपना नाम पुनः जुड़वा सकते हैं।
इसके साथ ही, सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा लागू की जाने वाली एहतियाती निषेधाज्ञा को किसी लोकतांत्रिक अधिकार के दमन के रूप में चित्रित करना तथ्यात्मक रूप से गलत है। भारत सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बाहरी राजनीतिक टिप्पणियों के बजाय स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं पर भरोसा किया जाना चाहिए।
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