दक्षिण कोरिया में कचरा प्रबंधन के कड़े नियम: भारतीय युवक ने बताया- सेलोटेप या प्याज का छिलका गलत फेंकने पर लग सकता है भारी जुर्माना
दक्षिण कोरिया में कचरा प्रबंधन को लेकर कड़े नियम लागू हैं। वहां रह रहे एक भारतीय युवक ने वीडियो के जरिए बताया कि प्याज का छिलका या सेलोटेप गलत कचरे में डालने पर भारी जुर्माना लग सकता है।

- प्याज का छिलका फूड वेस्ट नहीं, सेलोटेप भी अलग: दक्षिण कोरिया में सख्त वेस्ट डिस्पोजल नियमों पर भारतीय शख्स का वीडियो वायरल
- दक्षिण कोरिया में एक छोटी सी गलती पर ₹60,000 तक का जुर्माना! जानिए क्या है 'जोंगन्यांगजे' कचरा निपटान प्रणाली
- पार्सल से टेप हटाना अनिवार्य, लहसुन-प्याज के छिलकों के अलग नियम; दक्षिण कोरिया में रहने वाले भारतीय ने साझा कीं चुनौतियां
सियोल/नई दिल्ली: विदेशों में रहन-सहन और नागरिक नियमों का पालन कई बार प्रवासी भारतीयों के लिए बिल्कुल नया और चुनौतीपूर्ण अनुभव साबित होता है। दक्षिण कोरिया में रह रहे एक भारतीय युवक का सोशल मीडिया पर साझा किया गया वीडियो इन दिनों चर्चा में है। इस वीडियो में उसने दक्षिण कोरिया के अत्यधिक सख्त कचरा निपटान प्रणाली (वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम) और थोड़ी सी लापरवाही पर लगने वाले भारी जुर्माने के बारे में जानकारी दी है।
युवक के अनुसार, यदि किसी ने ऑनलाइन डिलीवरी वाले डिब्बे से सेलोटेप हटाए बिना उसे फेंक दिया, या फिर प्याज के छिलके को सामान्य 'फूड वेस्ट' समझकर उसमें डाल दिया, तो स्थानीय नगर निगम की ओर से सीधा आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- क्या है 'जोंगन्यांगजे' (Jongnyangje) प्रणाली?
दक्षिण कोरिया में कचरा प्रबंधन के लिए वर्ष 1995 से 'जोंगन्यांगजे' नामक व्यवस्था लागू है। इसका मूल सिद्धांत यह है कि 'जो जितना कचरा पैदा करेगा, वह उतना ही भुगतान करेगा'। इसके तहत सामान्य कचरे और गीले कचरे को सिर्फ सरकार द्वारा निर्धारित विशेष और प्रमाणित प्लास्टिक थैलियों में ही फेंका जा सकता है।
ये थैलियां स्थानीय किराना दुकानों या सुपरमार्केट से शुल्क देकर खरीदनी पड़ती हैं। प्रत्येक जिले और शहर की अपनी अलग रंग-कोड वाली थैलियां होती हैं। यदि कोई व्यक्ति दूसरे इलाके की थैली का इस्तेमाल करता है या सामान्य पॉलीथिन में कचरा डालता है, तो उसे अवैध डंपिंग माना जाता है।
- प्याज और लहसुन के छिलके फूड वेस्ट क्यों नहीं?
वीडियो में भारतीय युवक ने कचरे के बारीकी से किए जाने वाले वर्गीकरण को समझाया, जो अक्सर नए लोगों को भ्रमित कर देता है। आम तौर पर लोग सब्जियों के छिलकों को गीले कचरे या फूड वेस्ट का हिस्सा मानते हैं। हालांकि, दक्षिण कोरिया में नियम यह है कि फूड वेस्ट को बाद में जानवरों के चारे या जैविक खाद में बदला जाता है।
पशुओं द्वारा न पच पाने वाले रेशेदार या सख्त कचरे जैसे प्याज और लहसुन के सूखे छिलके, अंडों के खोल, अखरोट या मूंगफली के छिलके, चाय की पत्ती और जानवरों की हड्डियां को फूड वेस्ट नहीं माना जाता। इन्हें अनिवार्य रूप से 'जनरल वेस्ट' (सामान्य कचरे) की थैली में डालना होता है। यदि फूड वेस्ट में ऐसी चीजें पाई जाती हैं, तो पूरी थैली खारिज कर दी जाती है और जांच के बाद जुर्माना लगाया जा सकता है।
- ऑनलाइन पार्सल और रिसाइकिलिंग की शर्तें
इसी प्रकार कार्डबोर्ड बॉक्स और प्लास्टिक पैकेजिंग को रीसायकल करते समय बेहद सावधानी बरतनी होती है। यदि डिलीवरी बॉक्स पर प्लास्टिक का सेलोटेप या डिलीवरी एड्रेस स्लिप चिपकी रह गई, तो उसे रिसाइकिलिंग बिन में नहीं डाला जा सकता। पहले पूरा टेप और स्टिकर खुरचकर हटाना पड़ता है, फिर उसे 'जनरल वेस्ट' में डाला जाता है और साफ बॉक्स को चपटा करके पेपर रीसाइक्लिंग में रखा जाता है।
- उल्लंघन पर 10 लाख वॉन तक का जुर्माना
दक्षिण कोरिया में कचरा संग्रह केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं। अवैध डंपिंग या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कचरे की जांच कर रसीद या पते के आधार पर जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान की जाती है। नियमों की अनदेखी पर 1 लाख वॉन से लेकर 10 लाख वॉन (लगभग 6,000 रुपये से 60,000 रुपये से अधिक) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कड़ा अनुशासन और नागरिक जागरूकता का परिणाम है कि आज दक्षिण कोरिया दुनिया में सबसे अधिक रिसाइकिलिंग दर (60 प्रतिशत से अधिक) वाले देशों में गिना जाता है।
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