रिलायंस के बयान पर एलन मस्क की स्टारलिंक का पलटवार: बोले- हम भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने को तैयार
रिलायंस इंडस्ट्रीज के बयान के बाद एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने जवाब देते हुए कहा कि वह भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने को तैयार है। मस्क ने 165 देशों के लाइसेंस का हवाला देकर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

- सैटेलाइट ब्रॉडबैंड पर रिलायंस बनाम स्टारलिंक: मस्क ने 165 देशों के लाइसेंस का हवाला देकर लाइसेंसिंग पर उठाए सवाल
- 'प्रतिस्पर्धा के लिए नियम सबके लिए समान', रिलायंस की नसीहत पर स्टारलिंक ने दिया जवाब; मस्क ने फिर छेड़ा विवाद
- भारतीय सैटकॉम बाजार में तकरार तेज: रिलायंस के बयान को टैग कर स्टारलिंक ने रखी अपनी बात, सरकार ने भी दी सफाई
नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। रिलायंस द्वारा जारी उस बयान के बाद, जिसमें कहा गया था कि कंपनी प्रतिस्पर्धा से नहीं डरती लेकिन सभी को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा, स्टारलिंक ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। स्टारलिंक ने सोशल मीडिया पर रिलायंस के बयान को टैग करते हुए कहा कि वह भारत के नागरिकों को हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट से जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वहीं दूसरी ओर, एलन मस्क ने भारत में वाणिज्यिक सेवाओं की अनुमति मिलने में हो रही देरी को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। मस्क ने कहा कि स्टारलिंक दुनिया के 165 से अधिक देशों में काम करने के लिए लाइसेंस प्राप्त कर चुकी है और पिछले पांच वर्षों से भारतीय नियमों और शर्तों को पूरा करने में लगी हुई है।
- रिलायंस ने दी थी समान नियमों की नसीहत
इस विवाद की पृष्ठभूमि शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के उस आधिकारिक वक्तव्य से बनी थी, जिसमें कंपनी ने स्टारलिंक समेत सभी घरेलू और विदेशी कंपनियों के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का स्वागत किया था। रिलायंस ने 2016 में जियो की शून्य से 53 करोड़ उपभोक्ताओं तक की यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा था कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं हिचकिचाती।
हालांकि, रिलायंस ने जोर देकर कहा था कि भारत में काम करने के लिए विदेशी और घरेलू सभी इकाइयों के लिए नियम, सुरक्षा मानक और नियामकीय शर्तें एक जैसी होनी चाहिए। रिलायंस ने यह भी बताया था कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाएं भी वर्तमान में सरकारी और तकनीकी मंजूरियों के इंतजार में हैं।
- संचार मंत्रालय ने भेदभाव के आरोपों को नकारा
एलन मस्क द्वारा भारतीय नियामक व्यवस्था और प्रतिस्पर्धा के माहौल पर सवाल उठाए जाने के बीच केंद्रीय संचार मंत्रालय ने भी स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी सूत्रों और संचार मंत्रालय ने इस तरह के सुझावों और आरोपों को निराधार बताया है कि भारतीय नियामकीय ढांचा किसी कंपनी के प्रति भेदभावपूर्ण है।
मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और टेलीकॉम नीतियां पूरी तरह पारदर्शी हैं और देश में सेवा देने के इच्छुक प्रत्येक ऑपरेटर को भारतीय विधिक प्रक्रियाओं की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
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