ट्रंप की फिर टैरिफ धमकी, लिखा 'मैं भारत पर टैरिफ बढ़ाने जा रहा हूं, रूस से फायदे के लिए भारत ने तेल खरीदा।

International News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 अगस्त 2025 को भारत के खिलाफ फिर से तीखी टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिया मंच ....

Aug 5, 2025 - 14:45
 0  12
ट्रंप की फिर टैरिफ धमकी, लिखा 'मैं भारत पर टैरिफ बढ़ाने जा रहा हूं, रूस से फायदे के लिए भारत ने तेल खरीदा।
ट्रंप की फिर टैरिफ धमकी, लिखा 'मैं भारत पर टैरिफ बढ़ाने जा रहा हूं, रूस से फायदे के लिए भारत ने तेल खरीदा।

International News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 अगस्त 2025 को भारत के खिलाफ फिर से तीखी टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी। उन्होंने भारत पर रूस से तेल खरीदने और उसे खुले बाजार में मुनाफे के लिए बेचने का आरोप लगाया। ट्रंप ने लिखा, “भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि उस तेल को खुले बाजार में बड़े मुनाफे के लिए बेच रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन द्वारा मारे जा रहे लोगों की कोई परवाह नहीं है। इस कारण, मैं भारत द्वारा अमेरिका को भुगतान किए जाने वाले टैरिफ को काफी हद तक बढ़ाऊंगा।” यह धमकी ट्रंप की भारत के प्रति बढ़ती नाराजगी और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में भारत की तटस्थ नीति पर उनकी आपत्ति को दर्शाती है। भारत ने ट्रंप की इस धमकी को अनुचित बताया और कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा।

4 अगस्त 2025 को, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर मुनाफा कमा रहा है और यूक्रेन में रूस के युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन रूस के सबसे बड़े ऊर्जा खरीदार हैं, और वह भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ के अतिरिक्त एक “अतिरिक्त दंड” लगाएंगे। इससे पहले, 30 जुलाई 2025 को, ट्रंप ने भारत पर 1 अगस्त से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसमें रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए एक अनिर्दिष्ट दंड भी शामिल था। ट्रंप ने भारत के टैरिफ को “दुनिया में सबसे अधिक” और गैर-मौद्रिक व्यापार बाधाओं को “बेहद कठिन” करार दिया।

ट्रंप ने यह भी कहा कि वह रूस को 8 अगस्त तक यूक्रेन में युद्धविराम के लिए मजबूर करना चाहते हैं, और ऐसा न होने पर रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक “सेकेंडरी टैरिफ” लगाएंगे। यह धमकी भारत और चीन जैसे देशों को सीधे प्रभावित करती है, जो रूस से भारी मात्रा में तेल आयात करते हैं। ट्रंप की यह रणनीति उनकी व्यापार नीति में भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को शामिल करने का हिस्सा है।

भारत ने ट्रंप की धमकी को “अनुचित और अव्यावहारिक” बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 4 अगस्त को कहा, “हमारा विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध अपने गुणों पर आधारित है और इसे किसी तीसरे देश के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत और रूस का रिश्ता स्थिर और समय-परीक्षित है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने पर अमेरिका ने ही भारत को रूसी तेल आयात करने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे।

भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “मुझे कोई चिंता नहीं है। अगर कुछ होता है, तो हम उससे निपट लेंगे। हमने अपने तेल आयात के स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 40 देशों तक विविध किया है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के रिफाइनरी स्वतंत्र रूप से कीमत, आपूर्ति की सुरक्षा, और निर्यात नियमों के आधार पर तेल खरीदते हैं। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका रूसी तेल आयात अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप है और जी7-ईयू की मूल्य-सीमा व्यवस्था के तहत वैध है।

भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है, जो अपनी 85 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरतों को आयात करता है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, रूस ने भारत को सस्ता तेल عرضه करना शुरू किया, क्योंकि कई यूरोपीय देशों ने रूसी तेल आयात बंद कर दिया था। इससे पहले, भारत का रूसी तेल आयात केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन 2023-24 में यह बढ़कर 35 प्रतिशत हो गया। भारत ने वित्त वर्ष 2022-23 में रूस से 31 अरब डॉलर और 2023-24 में 140 अरब डॉलर का तेल आयात किया।

रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जो प्रतिदिन लगभग 1.75 मिलियन बैरल समुद्री तेल की आपूर्ति करता है। भारत का कहना है कि सस्ता रूसी तेल आयात करने से उसने वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने में मदद की, जो अन्यथा 137 डॉलर प्रति बैरल के 2022 के शिखर को पार कर सकती थी। भारत ने यह भी तर्क दिया कि उसका तेल आयात उसकी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।

  • ट्रंप की नाराजगी के कारण

ट्रंप की भारत के प्रति नाराजगी के कई कारण हैं। पहला, भारत और अमेरिका के बीच 45.8 अरब डॉलर का व्यापार घाटा, जिसमें भारत अमेरिका को अधिक निर्यात करता है। ट्रंप इसे कम करना चाहते हैं और भारत के उच्च टैरिफ और गैर-मौद्रिक व्यापार बाधाओं को इसका कारण मानते हैं। दूसरा, भारत का रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदना, जो ट्रंप को यूक्रेन युद्ध को समर्थन देने वाला लगता है। तीसरा, भारत ने ट्रंप के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में देरी की, जिसे ट्रंप अपनी नीतियों की सफलता के रूप में पेश करना चाहते हैं।

ट्रंप ने भारत को “मित्र” कहा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत की नीतियां अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने भारत के ब्रिक्स समूह में शामिल होने को भी “अमेरिका-विरोधी” करार दिया, हालांकि भारत और अन्य ब्रिक्स देशों ने इस आरोप को खारिज किया। ट्रंप की यह रणनीति उनकी पुरानी “पहले दोस्ती, फिर दबाव” की नीति को दर्शाती है, जहां वह पहले मित्रता का दावा करते हैं और फिर टैरिफ जैसे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं।

भारत ने ट्रंप की धमकियों के बावजूद रूसी तेल खरीदने की नीति नहीं बदली। दो वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने तेल कंपनियों को रूस से आयात बंद करने का कोई निर्देश नहीं दिया। हालांकि, रॉयटर्स ने बताया कि कुछ भारतीय रिफाइनरियों ने ट्रंप की धमकी के बाद रूसी तेल खरीदने में कमी की, लेकिन यह नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि कीमतों में छूट कम होने के कारण था। भारतीय तेल निगम ने हाल ही में अमेरिका, कनाडा, और मध्य पूर्व से 7 मिलियन बैरल तेल खरीदा, जो आपूर्ति विविधीकरण का हिस्सा है।

भारत के लिए रूसी तेल को पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं है। सऊदी अरब जैसे अन्य आपूर्तिकर्ता “एशियाई प्रीमियम” नीति के तहत अधिक कीमत वसूलते हैं। इसके अलावा, भारत ने पहले अमेरिकी दबाव में ईरान और वेनेजुएला से तेल आयात बंद किया था, जिससे उसे आर्थिक नुकसान हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस बार “प्रतीक्षा और अवलोकन” की रणनीति अपना सकता है, क्योंकि ट्रंप की धमकियां संभवतः एक बातचीत की रणनीति हैं।

ट्रंप की टैरिफ धमकी भारत के निर्यात पर असर डाल सकती है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां 2024 में 129.2 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। 25 प्रतिशत टैरिफ से भारतीय वस्त्र, ऑटोमोबाइल, और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि टैरिफ की लागत अंततः ग्राहकों पर पड़ती है।

कूटनीतिक रूप से, यह विवाद भारत-अमेरिका संबंधों को तनावपूर्ण कर सकता है। दोनों देशों ने हाल के वर्षों में चीन के खिलाफ एक रणनीतिक साझेदारी बनाई है, लेकिन ट्रंप की नीतियां इस रिश्ते को कमजोर कर सकती हैं। भारत ने ट्रंप के दावों को खारिज किया कि उसने भारत-पाकिस्तान संघर्ष में मध्यस्थता की थी, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी दिखती है।

भारत में इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। एक X यूजर ने लिखा, “ट्रंप भारत को धमकाकर अपनी नीतियां थोपना चाहते हैं, लेकिन भारत अपनी स्वतंत्रता और हितों से समझौता नहीं करेगा।” कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्रंप के पाकिस्तान के साथ तेल सौदे के दावे को मजाक बताया और कहा, “उन्हें शुभकामनाएं।” भारत के लोग ट्रंप की नीतियों को “धमकाने” वाली मान रहे हैं, लेकिन सरकार की तटस्थता की सराहना भी कर रहे हैं।

ट्रंप की टैरिफ धमकी भारत-रूस तेल व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों पर एक जटिल बहस छेड़ती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा। ट्रंप की धमकियां उनकी व्यापार और भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन भारत ने तटस्थ और स्वतंत्र रुख बनाए रखा है। यह विवाद दर्शाता है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा नीतियां कितनी जटिल और परस्पर जुड़ी हुई हैं। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक कदम उठाने होंगे।

Also Read- लंदन के ओवल स्टेडियम में क्रिस गेल के साथ नजर आए नीरव मोदी और विजय माल्या, भारत-इंग्लैंड टेस्ट मैच की तस्वीरें वायरल।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow