पाकिस्तानी सेना के मीडिया प्रमुख की प्रेस ब्रीफिंग में आंख मारने वाली हरकत ने उठाए सवालों का सैलाब।

पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक

Dec 10, 2025 - 11:01
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पाकिस्तानी सेना के मीडिया प्रमुख की प्रेस ब्रीफिंग में आंख मारने वाली हरकत ने उठाए सवालों का सैलाब।
पाकिस्तानी सेना के मीडिया प्रमुख की प्रेस ब्रीफिंग में आंख मारने वाली हरकत ने उठाए सवालों का सैलाब।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक ऐसी हरकत कर दी, जिसने उनके पेशेवर आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। वीडियो फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि एक महिला पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए वे उसकी ओर देखकर आंख मारते नजर आते हैं। यह घटना रावलपिंडी में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कैमरे में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस वीडियो के प्रसार के बाद पाकिस्तान के अंदर और बाहर से प्रतिक्रियाएं उमड़ पड़ीं, जहां इस व्यवहार को अस्वाभाविक और अनुचित बताया गया। प्रेस ब्रीफिंग का आयोजन मूल रूप से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े मुद्दों पर था, लेकिन इस छोटे से क्षण ने पूरे आयोजन का फोकस बदल दिया। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के डायरेक्टर जनरल के रूप में कार्यरत हैं।

वे दिसंबर 2022 से इस पद पर हैं और सेना की ओर से मीडिया को संबोधित करने वाले प्रमुख प्रवक्ता के तौर पर जाने जाते हैं। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान महिला पत्रकार ने इमरान खान के बारे में सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने खान को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, राज्य-विरोधी और दिल्ली के इशारों पर काम करने वाला बताया जाने के आरोपों का जिक्र किया। पत्रकार ने पूछा कि यह स्थिति पहले के दौर से किस तरह अलग है और क्या इससे कोई नया विकास अपेक्षित है। चौधरी ने जवाब में कहा कि चौथा बिंदु जोड़ लें, वह मानसिक रूप से अस्वस्थ भी हैं। इस जवाब के तुरंत बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए पत्रकार की ओर आंख मारी, जो वीडियो में साफ दिखाई दे रही है। यह क्षण करीब 29 सेकंड का है और इसमें चौधरी का चेहरा स्पष्ट रूप से कैद है।

घटना के वायरल होने के बाद पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आवाजें उठने लगीं। वीडियो को हजारों बार देखा और साझा किया गया, जिससे इस पर चर्चा तेज हो गई। प्रेस ब्रीफिंग का उद्देश्य इमरान खान के जेल में रहते हुए सेना के खिलाफ कथित नकारात्मक प्रचार को संबोधित करना था। चौधरी ने ब्रीफिंग में खान को नार्सिसिस्ट बताया, जिनकी महत्वाकांक्षाएं इतनी极端 हो चुकी हैं कि वे सोचते हैं कि यदि वे सत्ता में नहीं हैं तो कुछ भी अस्तित्व में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेल में खान से मिलने वाले व्यक्तियों का उपयोग सेना के खिलाफ जहर फैलाने के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने खान पर सेना के प्रति शत्रुता भड़काने का आरोप लगाया। लेकिन इन सभी बिंदुओं के बीच आंख मारने वाला पल चर्चा का केंद्र बन गया। वीडियो में पत्रकार का नाम अब्सा कोमल के रूप में उल्लेखित है, जो सवाल पूछने के बाद चुपचाप बैठ जाती हैं। पाकिस्तान में सैन्य प्रवक्ता की भूमिका हमेशा से संवेदनशील रही है। आईएसपीआर न केवल सेना की नीतियों को स्पष्ट करता है, बल्कि सार्वजनिक धारणा को भी प्रभावित करता है। लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी मीडिया ब्रीफिंग में भारत के खिलाफ बयान दिए थे, जहां उन्होंने पाकिस्तान के नागरिकों को निशाना न बनाने का दावा किया था। लेकिन वर्तमान घटना ने उनके पिछले बयानों से अलग एक व्यक्तिगत पहलू को उजागर कर दिया। वीडियो के वायरल होने से पहले ब्रीफिंग में रावलपिंडी हमलों का भी जिक्र हुआ था, जहां चौधरी ने खान के समर्थकों पर आरोप लगाया कि वे सेना के खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं। उन्होंने कहा कि खान का कथानक अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है। लेकिन आंख मारने वाली क्लिप ने इन मुद्दों को पीछे छोड़ दिया।

इस घटना ने पाकिस्तान की मीडिया और सैन्य संबंधों पर भी नजर डाली। प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका दिया जाता है, लेकिन ऐसे आयोजनों में पेशेवरता का स्तर बनाए रखना अपेक्षित होता है। वीडियो में चौधरी का व्यवहार पत्रकार के सवाल के ठीक बाद का है, जो इसे और अधिक प्रमुख बनाता है। पाकिस्तान के अंदर से कई आवाजें उठीं कि यह व्यवहार महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। वीडियो को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, जहां इसे अस्वाभाविक बताया गया। चौधरी ने ब्रीफिंग में खान को मानसिक रूप से अस्वस्थ कहकर चौथा बिंदु जोड़ा, जो उनके जवाब का हिस्सा था। लेकिन आंख मारने का इशारा इस संदर्भ में व्याख्या का विषय बन गया। पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति वर्तमान में तनावपूर्ण है। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से सेना और राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ा है। प्रेस ब्रीफिंग का आयोजन इसी संदर्भ में किया गया था, जहां सेना ने खान के कथित एजेंडे को चुनौती दी। चौधरी ने कहा कि खान जेल से ही एंटी-स्टेट कथानक गढ़ रहे हैं। उन्होंने ट्वीट्स का हवाला दिया, जिसमें सेना के खिलाफ बयानबाजी का आरोप लगाया। लेकिन वीडियो के वायरल होने से ब्रीफिंग का मुख्य संदेश धुंधला पड़ गया। घटना के बाद पाकिस्तान के बाहर भी चर्चा हुई, जहां इसे सैन्य अधिकारियों के आचरण से जोड़ा गया। वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि विभिन्न स्रोतों से हुई, हालांकि कुछ जगहों पर स्वतंत्र सत्यापन का उल्लेख किया गया।

लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी का यह व्यवहार प्रेस ब्रीफिंग के इतिहास में एक असामान्य क्षण के रूप में दर्ज हो गया। पाकिस्तान में सैन्य प्रवक्ता अक्सर कठोर बयानों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन व्यक्तिगत इशारों का ऐसा उदाहरण दुर्लभ है। वीडियो में पत्रकार सवाल पूछने के बाद पीछे हट जाती हैं, जबकि चौधरी जवाब देते हुए मुस्कुराते हैं। यह क्लिप करीब 26 से 29 सेकंड की है, जिसमें चेहरा स्पष्ट है। घटना ने महिलाओं की गरिमा से जुड़े सवालों को जन्म दिया। पाकिस्तान में सैन्य और मीडिया के बीच संबंध हमेशा जटिल रहे हैं, और यह घटना उन्हें और उजागर कर रही है। ब्रीफिंग में खान को दिल्ली से जुड़े आरोपों का भी जिक्र था, जो पत्रकार के सवाल का हिस्सा था। प्रेस ब्रीफिंग का विस्तार से वर्णन करने पर पता चलता है कि यह रावलपिंडी में आयोजित हुई थी। चौधरी ने खान के समर्थकों पर सेना के खिलाफ जहर फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खान की महत्वाकांक्षाएं संवैधानिक दायित्वों से ऊपर उठ चुकी हैं। वीडियो के प्रसार से पहले ब्रीफिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर फोकस था। लेकिन आंख मारने वाला पल ने सब कुछ बदल दिया। पाकिस्तान के अंदर से प्रतिक्रियाओं में इस व्यवहार को अनुचित कहा गया। वीडियो को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर देखा गया, जहां इसे साझा किया गया। चौधरी का पद उन्हें सेना का चेहरा बनाता है, और ऐसे में आचरण की अपेक्षाएं अधिक होती हैं।

घटना के संदर्भ में इमरान खान का मुद्दा केंद्रीय था। पत्रकार ने पूछा कि खान को राज्य-विरोधी क्यों कहा जा रहा है और क्या यह पहले से अलग है। चौधरी ने जवाब में मानसिक अस्वस्थता का बिंदु जोड़ा। आंख मारने का इशारा इसी जवाब के बाद आया। वीडियो ने पाकिस्तान की राजनीतिक बहस को प्रभावित किया। सैन्य प्रवक्ता के रूप में चौधरी की भूमिका में पारदर्शिता अपेक्षित है, लेकिन यह क्षण सवाल खड़ा कर गया। पाकिस्तान के बाहर से भी इस पर नजर डाली गई, जहां इसे सैन्य संस्कृति से जोड़ा गया। वीडियो की लंबाई छोटी होने के बावजूद इसका प्रभाव व्यापक रहा। पाकिस्तान में सैन्य और नागरिक संबंधों का इतिहास जटिल है। प्रेस ब्रीफिंग ऐसे आयोजनों का हिस्सा हैं, जहां नीतियां स्पष्ट की जाती हैं। लेकिन इस घटना ने पेशेवरता पर बहस छेड़ दी। चौधरी ने ब्रीफिंग में खान को नार्सिसिस्ट कहा, जो सत्ता के बिना कुछ नहीं देखते। उन्होंने जेल से मिलने वालों पर आरोप लगाया। वीडियो के वायरल होने से ये बिंदु पीछे छूट गए। घटना ने महिलाओं के प्रति आचरण के मानकों को उजागर किया। पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों से आवाजें उठीं। वीडियो को सत्यापित स्रोतों से पुष्टि मिली। चौधरी का यह व्यवहार चर्चा का विषय बना रहा।

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