24 साल बाद सामने आई पुतिन-बुश की गोपनीय बातचीत: पाकिस्तान को बताया था 'परमाणु हथियारों वाला सैन्य जुंटा', ईरान तक पहुंचे यूरेनियम का खुलासा।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीच 2001 से 2008 तक हुई निजी बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट हाल ही में

Dec 26, 2025 - 12:04
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24 साल बाद सामने आई पुतिन-बुश की गोपनीय बातचीत: पाकिस्तान को बताया था 'परमाणु हथियारों वाला सैन्य जुंटा', ईरान तक पहुंचे यूरेनियम का खुलासा।
24 साल बाद सामने आई पुतिन-बुश की गोपनीय बातचीत: पाकिस्तान को बताया था 'परमाणु हथियारों वाला सैन्य जुंटा', ईरान तक पहुंचे यूरेनियम का खुलासा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीच 2001 से 2008 तक हुई निजी बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट हाल ही में डीक्लासिफाइड किए गए हैं। इन दस्तावेजों में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और उनके प्रसार को लेकर दोनों नेताओं की गहरी चिंताएं दर्ज हैं। ये ट्रांसक्रिप्ट 2001 से 2008 के बीच हुई बैठकों और फोन कॉल्स के हैं, जिनमें पाकिस्तान को परमाणु अप्रसार के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा गया है। पुतिन और बुश की पहली आमने-सामने मुलाकात 16 जून 2001 को स्लोवेनिया में हुई थी। इस दौरान पुतिन ने पाकिस्तान की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल परमाणु हथियारों से लैस एक सैन्य जुंटा है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां लोकतंत्र नहीं है, फिर भी पश्चिमी देश इसकी आलोचना नहीं करते। पुतिन ने पाकिस्तान को लेकर अपनी चिंता जताई और कहा कि इस मुद्दे पर बात होनी चाहिए। उस समय पाकिस्तान पर जनरल परवेज मुशर्रफ का सैन्य शासन था।

ये बातचीत उस दौर की है जब दोनों नेता परमाणु अप्रसार, ईरान, उत्तर कोरिया और अन्य मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे। पुतिन ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की स्थिरता पर संदेह जताया और इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए जोखिम बताया। बुश ने इन चिंताओं को स्वीकार किया लेकिन पाकिस्तान के साथ सहयोग की बात भी की। 2005 में ओवल ऑफिस में हुई एक बैठक में पुतिन ने बुश को बताया कि ईरान के सेंट्रीफ्यूज में पाकिस्तानी मूल का यूरेनियम पाया गया है। पुतिन ने कहा कि यह स्थिति उन्हें नर्वस कर रही है। बुश ने जवाब दिया कि यह अमेरिका को भी नर्वस कर रहा है। पुतिन ने आगे कहा कि ईरान की प्रयोगशालाओं में क्या चल रहा है, यह स्पष्ट नहीं है और पाकिस्तान के साथ सहयोग अब भी जारी है। बुश ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर मुशर्रफ से बात की है और ईरान तथा उत्तर कोरिया तक तकनीक पहुंचने की चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अब्दुल कादिर खान को जेल में डाला है और उनके कुछ साथियों को नजरबंद किया है, लेकिन पूरी जानकारी नहीं मिल रही। पुतिन ने कहा कि उनकी समझ से सेंट्रीफ्यूज में पाकिस्तानी मूल का यूरेनियम मिला है।

ये बातचीत अब्दुल कादिर खान नेटवर्क के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने 2004 में ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक और सामग्री सप्लाई करने की बात स्वीकार की थी। दोनों नेताओं ने इस नेटवर्क से जुड़े प्रसार के जोखिम पर चर्चा की। पुतिन ने पाकिस्तान की तुलना ईरान और उत्तर कोरिया से की, जहां अंतरराष्ट्रीय निगरानी ज्यादा थी। ट्रांसक्रिप्ट में दर्ज है कि दोनों नेता पाकिस्तान के परमाणु संपत्तियों के नियंत्रण पर चिंतित थे। पुतिन ने बार-बार गैर-लोकतांत्रिक शासनों के हाथों में परमाणु हथियारों के खतरे का जिक्र किया। बुश ने संवेदनशील तकनीक के आगे प्रसार को रोकने पर जोर दिया। ये दस्तावेज उस समय की दिखाते हैं जब अमेरिका और रूस आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ा रहे थे, लेकिन परमाणु प्रसार एक साझा चिंता बना रहा।

2001 की स्लोवेनिया बैठक में पुतिन ने पाकिस्तान को परमाणु हथियारों वाला जुंटा बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की कमी के बावजूद पश्चिम चुप है। बुश ने रूस को पश्चिम का हिस्सा बताया और दोनों के बीच आपसी सम्मान की बात की। बाद की बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम में पाकिस्तानी लिंक प्रमुख रहा। पुतिन ने कहा कि पाकिस्तान से ईरान तक सहयोग जारी है, जबकि बुश ने मुशर्रफ पर दबाव डालने की बात कही। ये ट्रांसक्रिप्ट फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत मुकदमे के बाद जारी किए गए हैं। इनमें 2001 से 2008 तक की कई बैठकों और कॉल्स का ब्योरा है। दोनों नेताओं ने पाकिस्तान को अप्रसार के संदर्भ में बड़ा सिरदर्द बताया। पुतिन की 2001 वाली टिप्पणी पाकिस्तान की राजनीतिक संरचना और परमाणु क्षमता पर सीधी थी। 2005 की बैठक में यूरेनियम की उत्पत्ति पर चर्चा हुई, जहां पुतिन ने पाकिस्तानी मूल की पुष्टि की। बुश ने कहा कि ईरानियों ने आईएईए को यह बताना भूल गए थे। दोनों ने इस प्रसार नेटवर्क से जुड़े जोखिमों पर सहमति जताई। पुतिन ने रूस की सुरक्षा को भी खतरे में बताया। ये दस्तावेज दिखाते हैं कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम दोनों के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रहा। 2001 में पुतिन ने पाकिस्तान को लोकतंत्र रहित परमाणु शक्ति बताया, जबकि 2005 में ठोस सबूतों पर बात हुई। अब्दुल कादिर खान की गिरफ्तारी के बावजूद पूरी पारदर्शिता न मिलने पर बुश ने नाराजगी जताई।

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