जमुई में छात्रा की मौत के बाद भड़का स्थानीय लोगों का भारी आक्रोश, गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने खैरा थाना का किया घेराव।
बिहार के जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र में एक छात्रा की दुखद और असामयिक मौत के बाद स्थानीय कानून व्यवस्था पूरी तरह
- उग्र भीड़ द्वारा थाना परिसर पर अचानक किया गया भीषण पथराव, जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे पुलिसकर्मी, इलाके में भारी तनाव।
- हालात बेकाबू होने पर आत्मरक्षा में पुलिस को करनी पड़ी हवाई फायरिंग, अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात, प्रशासनिक जांच के आदेश जारी।
बिहार के जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र में एक छात्रा की दुखद और असामयिक मौत के बाद स्थानीय कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। इस घटना से आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा गुरुवार को इस कदर फूट पड़ा कि उसने एक बेहद हिंसक और अनियंत्रित रूप अख्तियार कर लिया। सुबह से ही इलाके में सुलग रहा असंतोष दोपहर होते-होते पूरी तरह से भड़क उठा और सैकड़ों की संख्या में लाठी-डंडों से लैस पुरुषों और महिलाओं की भारी भीड़ खैरा थाना परिसर के मुख्य द्वार पर जमा हो गई। प्रदर्शनकारी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे और मृतका के लिए न्याय के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ तुरंत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए थे। देखते ही देखते इस विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिससे पूरे अनुमंडल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद गंभीर और चिंताजनक संकट खड़ा हो गया।
थाना परिसर के बाहर जमा हुई यह भारी भीड़ शुरुआत में केवल नारेबाजी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का विरोध कर रही थी, लेकिन कुछ ही समय के भीतर माहौल में कड़वाहट और उत्तेजना बेहद बढ़ गई। भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक और उग्र तत्वों ने अचानक पुलिस बल को निशाना बनाते हुए ईंट और पत्थरों से हमला शुरू कर दिया। यह पत्थरबाजी इतनी तीव्र और अप्रत्याशित थी कि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को संभलने का न्यूनतम अवसर भी नहीं मिल सका। पत्थर सीधे पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों, थाना परिसर की खिड़कियों और वहां खड़े वाहनों पर आकर गिरने लगे। इस अचानक हुए जानलेवा हमले के कारण पूरे खैरा थाना परिसर के भीतर भयंकर अफरा-तफरी, चीख-पुकार और दहशत का माहौल पैदा हो गया, जिससे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था कुछ समय के लिए पूरी तरह पंगु नजर आने लगी।
पथराव की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अपनी नियमित ड्यूटी कर रहे कई पुलिसकर्मियों और महिला सिपाहियों को अपनी जान और शरीर को गंभीर चोटों से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों, बैरकों और कमरों की तरफ भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस हिंसक झड़प में थाना परिसर के बाहर और भीतर खड़े कई सरकारी और निजी वाहनों के शीशे पूरी तरह चकनाचूर हो गए, और मुख्य भवन की दीवारों तथा खिड़कियों को भी भारी नुकसान पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पत्थरों की बौछार के सामने शुरुआती कुछ मिनटों तक पुलिस पूरी तरह असहाय स्थिति में दिखाई दे रही थी, क्योंकि भीड़ का पैमाना बहुत बड़ा था और लोग पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुके थे। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं, जिसके बाद परिसर के भीतर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया। खैरा थाने पर हुए इस भीषण हमले की सूचना मिलते ही जिला मुख्यालय से जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर भारी संख्या में अतिरिक्त दंगा रोधी बल और वज्र वाहन को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया ताकि बेकाबू हो चुकी स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
थाना परिसर की सुरक्षा को पूरी तरह से खतरे में पड़ता देख और अपने मातहत कर्मचारियों की जान पर बन आई देख, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले लाउडस्पीकर के माध्यम से उग्र भीड़ को शांत होने की लगातार अपील की। पुलिस द्वारा बार-बार यह समझाने का प्रयास किया गया कि छात्रा की मौत के मामले में कानून अपनी निष्पक्ष कार्रवाई कर रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, इसलिए लोग कानून को अपने हाथ में न लें। हालांकि, इस प्रशासनिक समझाइश का उग्र हो चुके प्रदर्शनकारियों पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ा और उनका पथराव और अधिक आक्रामक होता चला गया। जब हालात पूरी तरह से नियंत्रण और बर्दाश्त की सीमा से बाहर हो गए, तो पुलिस को अपनी आत्मरक्षा, सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और थाने की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले चेतावनी देनी पड़ी और फिर हवा में कई चक्र फायरिंग करनी पड़ी।
पुलिस द्वारा की गई आत्मरक्षार्थ हवाई फायरिंग की गूंज सुनते ही थाना परिसर के बाहर पथराव कर रही उग्र भीड़ में अचानक भगदड़ मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए गलियों और खेतों की तरफ भागने लगे। फायरिंग के बाद हालांकि भीड़ पूरी तरह से तितर-बितर हो गई, लेकिन इस पूरी घटना के बाद से खैरा बाजार और उसके आसपास के पूरे असैन्य इलाके में एक बेहद भारी और गंभीर तनाव व्याप्त हो गया है। स्थानीय दुकानदारों ने अनहोनी की आशंका को देखते हुए अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें आनन-फानन में पूरी तरह से बंद कर दी हैं, जिससे व्यस्त रहने वाले बाजारों में पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पूरे संवेदनशील क्षेत्र में फ्लैग मार्च शुरू कर दिया है ताकि असामाजिक तत्व दोबारा से संगठित होकर किसी नई हिंसक घटना को अंजाम न दे सकें।
वर्तमान समय में स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए खैरा थाना क्षेत्र में जिला पुलिस बल के साथ-साथ सशस्त्र बलों की कई विशेष कंपनियों को तैनात किया गया है, जो हर आने-जाने वाले मार्ग और चौराहे पर पैनी नजर रख रही हैं। जमुई के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और समाज के जिम्मेदार लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार सबको है, लेकिन कानून को हाथ में लेकर पुलिस तंत्र पर हमला करने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जा सकती। पुलिस इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रही है कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक बनाने के पीछे किन बाहरी तत्वों या साजिशकर्ताओं का हाथ था, जिन्होंने भीड़ को उकसाने का काम किया।
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