Israel Election Results - इजरायल चुनाव में त्रिशंकु संसद के आसार, अरब पार्टियों पर भड़की नेतन्याहू की लिकुड पार्टी
इजरायल संसदीय चुनाव की मतगणना में नेतन्याहू और विपक्ष दोनों बहुमत से दूर हैं। लिकुड पार्टी ने अरब दलों पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।

- Israel Political Crisis - 85% वोटों की गिनती के बाद भी बहुमत से दूर नेतन्याहू, अरब दलों पर लगाया धांधली का आरोप
- Benjamin Netanyahu vs Opposition - 19 सीटों के साथ किंगमेकर बनीं अरब पार्टियां, इजरायल में नई सरकार पर सस्पेंस
- Knesset Election 2026 - नेतन्याहू 53 और विपक्ष 48 पर अटका, अरब दलों की भूमिका पर खड़ा हुआ सियासी घमासान
यरुशलम। इजरायल में 26वीं नेसेट (संसद) के लिए हुए आम चुनावों की मतगणना के बीच राजनीतिक गतिरोध गहरा गया है। अब तक लगभग 85 से 90 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी हो चुकी है, जिसके रुझानों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन और विपक्षी खेमा दोनों ही सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों के जादुई आंकड़े से दूर नजर आ रहे हैं।
इस बीच, प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पार्टी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि अरब दलों ने हिंसा, डराने-धमकाने और कथित वोट खरीद के दम पर चुनाव को प्रभावित किया है।
दोनों मुख्य खेमे बहुमत से दूर
120 सदस्यों वाली नेसेट में किसी भी गठबंधन को स्थिर सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों के समर्थन की दरकार होती है। ताजा गणना के अनुसार:
नेतन्याहू गठबंधन (लिकुड व सहयोगी दल): 53 सीटों के आसपास सिमटता दिख रहा है, जो बहुमत से 8 सीटें कम है।
विपक्षी गठबंधन: गादी इसनकोट और प्रमुख विपक्षी दलों का संयुक्त खेमा लगभग 48 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
इस राजनीतिक गणित के चलते संसद में स्पष्ट गतिरोध की स्थिति बन गई है। दोनों प्रमुख यहूदी खेमों में से कोई भी अपने दम पर सरकार गठन की स्थिति में नहीं है।
19 सीटों के साथ किंगमेकर बने अरब दल
इस चुनाव में अरब-इजरायली मतदाताओं का मतदान प्रतिशत उल्लेखनीय रहा है। प्रारंभिक गणना में अरब दलों (जॉइंट लिस्ट और राम) को मिलाकर कुल 19 संभावित सीटें मिलती दिख रही हैं। यह संख्या पिछले चुनाव की तुलना में लगभग दोगुनी मानी जा रही है।
संसद में किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण ये 19 सीटें किसी भी गठबंधन के लिए सत्ता की कुंजी साबित हो सकती हैं। हालांकि, इजरायल के पारंपरिक दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी दलों के लिए अरब दलों के साथ औपचारिक गठबंधन करना वैचारिक रूप से बेहद संवेदनशील और जटिल माना जाता है।
लिकुड पार्टी के आरोपों पर पलटवार
लिकुड पार्टी की ओर से चुनाव में धांधली और वोट चोरी के आरोपों के बाद केंद्रीय चुनाव समिति पर भी दबाव बढ़ गया है। हालांकि चुनाव आयोग और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने इन शुरुआती दावों के संबंध में किसी ठोस आधिकारिक अनियमितता की पुष्टि नहीं की है।
दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं और अरब पार्टियों के प्रतिनिधियों ने लिकुड के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि अपनी संभावित पराजय और बहुमत न जुटा पाने की हताशा में सत्ता पक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया पर निराधार संदेह जता रहा है।
इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, सैनिकों, राजनयिकों और विशेष श्रेणियों के मतों (डबल एनवलप बैलेट्स) की गिनती पूरी होने के बाद ही अंतिम आधिकारिक आंकड़े स्पष्ट होंगे। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग अंतिम परिणाम आने के बाद सबसे बड़े दल या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे। यदि दोनों खेमे आवश्यक 61 सांसदों का समर्थन जुटाने में विफल रहते हैं, तो देश एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और नए चुनावों के मुहाने पर खड़ा हो सकता है।
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