Delhi-Gurugram Expressway - गाड़ियों के हॉर्न और शोर से मिलेगी निजात, NHAI दोनों किनारों पर लगाने जा रहा नॉइज बैरियर
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ NHAI नॉइज बैरियर लगाने जा रहा है। द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर विकसित होने वाली इस योजना से रिहायशी इलाकों को ट्रैफिक के शोर से राहत मिलेगी।

- Relief From Traffic Noise - द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर दिल्ली-गुरुग्राम रूट पर लगेंगे साउंड बैरियर, एक महीने में तैयार होगा एस्टीमेट
- NHAI Noise Barrier Plan - रिहायशी इलाकों को ध्वनि प्रदूषण से राहत, 15 से 20 डेसिबल तक कम होगा वाहनों का शोर
- Gurugram Infrastructure Update - दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के किनारे रहने वालों को बड़ी राहत, ध्वनि अवरोधक लगाने की तैयारी शुरू
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के किनारे बसी आवासीय सोसायटियों और सेक्टरों में रहने वाले लाखों नागरिकों को जल्द ही वाहनों के अनवरत शोर, हॉर्न और टायरों की कर्कश आवाज से बड़ी राहत मिलने वाली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस व्यस्ततम एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर आधुनिक 'नॉइज बैरियर' (ध्वनि अवरोधक पैनल) लगाने की योजना तैयार की है। प्राधिकरण द्वारा आगामी एक महीने के भीतर इस पूरी परियोजना की लागत और तकनीकी पहलुओं का विस्तृत आकलन (एस्टीमेट) तैयार किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- एनसीआर का सबसे व्यस्त मार्ग, ध्वनि प्रदूषण से जूझ रहे थे निवासी
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सबसे व्यस्त और सघन यातायात वाले मार्गों में से एक है, जहां चौबीसों घंटे लाखों छोटे-बड़े वाहनों, भारी ट्रकों और बसों की आवाजाही बनी रहती है। एक्सप्रेसवे के बिल्कुल नजदीक स्थित सेक्टर-15, सेक्टर-31, झाड़सा और अन्य आवासीय सोसायटियों में रहने वाले लोग लंबे समय से तेज आवाज की समस्या से जूझ रहे थे। लगातार रहने वाले इस शोर से बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही थी, जबकि रात के समय लोगों की नींद में भारी खलल पड़ता था। स्थानीय निवासी काफी समय से प्रशासन से प्रभावी ध्वनि निवारक समाधान की मांग कर रहे थे।
- 15 से 20 डेसिबल तक घट सकता है वाहनों का शोर
विशेषज्ञों और सिविल इंजीनियरों के अनुसार, सड़क और रिहायशी कॉलोनियों के बीच लगाए जाने वाले नॉइज बैरियर वैज्ञानिक रूप से ध्वनि तरंगों को अवशोषित व परावर्तित करने का काम करते हैं। इन बैरियरों की ऊंचाई, उपयोग की जाने वाली सामग्री (जैसे एक्रेलिक या मेटैलिक शीट्स) और उपयुक्त स्थान के चयन से यातायात के शोर को औसतन 15 से 20 डेसिबल तक कम किया जा सकता है। इससे रिहायशी इलाकों में ध्वनि का स्तर सामान्य और शांत वातावरण के अनुकूल हो जाएगा।
- द्वारका एक्सप्रेसवे के सफल मॉडल की तर्ज पर होगा काम
हाल ही में नवनिर्मित द्वारका एक्सप्रेसवे पर लगाए गए नॉइज बैरियर के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए एनएचएआई ने अब दिल्ली-गुरुग्राम मुख्य एक्सप्रेसवे पर भी इसी मॉडल को अपनाने का फैसला किया है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक भवनेश कुमार ने बताया कि दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए दोनों ओर नॉइज बैरियर लगाना अनिवार्य महसूस किया गया है। अगले 30 दिनों में परियोजना पर आने वाले कुल बजट और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का निर्धारण कर लिया जाएगा, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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