विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की नई प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को पहली बार इनवाइट किया गया।
अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी का भारत दौरा 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पहला उच्च स्तरीय दौरा है। 9 अक्टूबर 2025 को नई
अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी का भारत दौरा 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पहला उच्च स्तरीय दौरा है। 9 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली पहुंचे मुत्तकी ने 10 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर से द्विपक्षीय वार्ता की। लेकिन उसी शाम अफगान दूतावास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने विवाद खड़ा कर दिया। इसमें किसी महिला पत्रकार को आमंत्रित नहीं किया गया। पुरुष पत्रकारों की मौजूदगी वाली तस्वीरें वायरल हो गईं और सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई। विपक्षी नेता, पत्रकार संगठन और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे तालिबान की महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण नीति का प्रतीक बताया। 12 अक्टूबर को मुत्तकी ने दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जिसमें महिलाओं को पहली कतार में बिठाया गया। लगभग 100 पत्रकारों में आधी महिलाएं थीं। मुत्तकी ने पिछली घटना को तकनीकी समस्या बताया और कहा कि यह जानबूझकर नहीं था। लेकिन अफगान महिलाओं की दयनीय स्थिति पर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा हराम नहीं है, बल्कि अस्थायी प्रतिबंध है। यह कदम सकारात्मक लगता है, लेकिन तालिबान शासन के चार सालों में महिलाओं पर लगे सख्त प्रतिबंधों के बीच यह एक छोटा सा बदलाव मात्र है।
मुत्तकी का छह दिवसीय दौरा अफगानिस्तान-भारत संबंधों को मजबूत करने का प्रयास है। वे दिल्ली के अलावा देवबंद के दरुल उलूम भी गए, जहां उन्होंने विद्वानों से मुलाकात की। जयशंकर से बातचीत में व्यापार, मानवीय सहायता, सुरक्षा सहयोग और चाबहार बंदरगाह जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने काबुल में अपनी तकनीकी टीम को पूर्ण दूतावास का दर्जा दिया, जिसका मुत्तकी ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान को निकट मित्र मानता है और विकास परियोजनाएं पूरी करेगा। लेकिन पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस ने सबको चौंका दिया। अफगान दूतावास ने 17 मीडिया आउटलेट्स को आमंत्रित किया, लेकिन सभी पुरुष पत्रकार थे। महिला पत्रकारों को प्रवेश नहीं मिला, भले ही वे ड्रेस कोड का पालन कर रही थीं। इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन ने एक्स पर लिखा कि महिलाओं को आमंत्रित ही नहीं किया गया। एनडीटीवी ने भी सुरक्षा कर्मियों से शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
यह घटना तालिबान की महिलाओं के प्रति नीति की याद दिलाती है। 2021 में सत्ता हासिल करने के बाद तालिबान ने महिलाओं पर कई प्रतिबंध लगाए। छठी कक्षा के बाद लड़कियों की शिक्षा बंद। सरकारी नौकरियों, सार्वजनिक स्थानों और मीडिया में उनकी भागीदारी सीमित। संयुक्त राष्ट्र ने इसे दुनिया का सबसे बुरा महिलाओं का संकट बताया। अफगानिस्तान में महिलाएं बुरqa पहनने को मजबूर। यात्रा के लिए पुरुष संरक्षक जरूरी। पिछले साल हजारों महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किए, लेकिन दमन का शिकार हुईं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तालिबान को मान्यता देने से इनकार कर दिया। भारत ने मानवीय सहायता जारी रखी, लेकिन राजनीतिक मान्यता नहीं दी। मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं की अनुपस्थिति ने इन मुद्दों को फिर उछाल दिया। पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने एक्स पर कहा कि पुरुष पत्रकारों को बहिष्कार करना चाहिए था। प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा कि यह महिलाओं के अधिकारों पर भारत की चुप्पी दिखाता है। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी महिलाओं के लिए बहुत कमजोर साबित हो रहे हैं। महुआ मोइत्रा ने इसे शर्मनाक बताया।
आलोचना के बाद अफगान पक्ष ने सफाई दी। एक तालिबान प्रवक्ता ने न्यूज18 को बताया कि मुत्तकी काबुल में नियमित रूप से महिला पत्रकारों से मिलते हैं। यह तकनीकी समस्या थी, नीति नहीं। 12 अक्टूबर को दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं को आमंत्रित किया गया। दूतावास ने इसे समावेशी बताया। लगभग 50 महिलाएं शामिल हुईं। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों पर कठिन सवाल पूछे। मुत्तकी ने कहा कि समय कम था, इसलिए सीमित सूची बनी। लेकिन किसी के अधिकारों का हनन नहीं किया गया। उन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति पर कहा कि शिक्षा निषिद्ध नहीं। 10 मिलियन छात्रों में 2.8 मिलियन लड़कियां हैं, लेकिन उच्च शिक्षा पर अस्थायी रोक है। मदरसों में ग्रेजुएशन तक पढ़ाई उपलब्ध। उन्होंने कहा कि हर देश की अपनी परंपराएं हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन सवाल उठे कि अगर शिक्षा हराम नहीं, तो प्रतिबंध क्यों। मुत्तकी ने पाकिस्तान सीमा विवाद पर भी बात की। कहा कि ज्यादातर झड़पें पाकिस्तानी क्षेत्र में हो रही हैं। शांति चाहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो अन्य विकल्प अपनाएंगे।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसकी कोई भूमिका नहीं। यह अफगान दूतावास का आयोजन था। एमईए ने कहा कि भारत महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करता है। लेकिन दौरा जारी रहा। मुत्तकी ने भारत से खनिज, स्वास्थ्य और खेल क्षेत्रों में निवेश की अपील की। वाघा सीमा खोलने का अनुरोध किया। चाबहार बंदरगाह के उपयोग पर चर्चा हुई। भारत ने अफगानिस्तान को 50 हजार टन गेहूं भेजा है। लेकिन तालिबान को मान्यता न देने की नीति बरकरार। यह दौरा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण। पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच भारत तालिबान से संवाद बढ़ा रहा। लेकिन महिलाओं के मुद्दे पर दबाव बनाए रखना जरूरी।
सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। #WomenJournalistsExcluded ट्रेंड किया। कई यूजर्स ने कहा कि तालिबान की पुरानी सोच भारत में भी आई। लेकिन दूसरी कॉन्फ्रेंस को सकारात्मक बताया। एक यूजर ने लिखा कि मुत्तकी काबुल में महिलाओं से मिलते हैं, तो दिल्ली में क्यों नहीं। पत्रकार संगठनों ने कहा कि यह प्रेस फ्रीडम पर हमला। विपक्ष ने मोदी सरकार को निशाना बनाया। कहा कि तालिबान को आमंत्रित कर भारत ने महिलाओं के अधिकारों को कमजोर किया। लेकिन सरकार ने कहा कि संवाद जरूरी। अफगानिस्तान में 2.8 मिलियन लड़कियां स्कूल जाती हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी बंद। नौकरियां 90 प्रतिशत कम। यूएन ने चेतावनी दी कि अगर सुधार न हुए, तो मान्यता मुश्किल। मुत्तकी का दौरा इन मुद्दों पर भारत की भूमिका दिखाता है।
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