Delhi Red Fort Blast UN Report: दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट में अल-कायदा का हाथ, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
Delhi Red Fort Blast UN Report: संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली के लाल किला के पास हुए कार बम धमाके के पीछे अल-कायदा (AQIS) का हाथ था।

- UNSC Report Red Fort Attack: दिल्ली के लाल किला आतंकी हमले के पीछे AQIS की साजिश, UN सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट ने की पुष्टि
- दिल्ली के लाल किला कार ब्लास्ट में अल-कायदा का हाथ! संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
- Delhi Red Fort Attack: दिल्ली के लाल किला के पास हुए आतंकी हमले में अल-कायदा का हाथ, संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में पुष्टि
राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए घातक कार बम विस्फोट की घटना को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध निगरानी समिति की हालिया रिपोर्ट में आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई है कि इस वीभत्स आतंकी हमले के पीछे वैश्विक आतंकवादी संगठन अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप शाखा—'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) और उससे जुड़े नेटवर्क का हाथ था। इस अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज ने भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा की गई जांच के निष्कर्षों पर वैश्विक मुहर लगा दी है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि अल-कायदा और उससे जुड़े गुट दक्षिण एशिया क्षेत्र में अपने विकेंद्रीकृत छोटे मॉड्यूल्स का विस्तार करने का प्रयास कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आईएसआईएल (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध निगरानी समिति द्वारा जारी की गई द्विवार्षिक रिपोर्ट में दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए कार बम विस्फोट की जिम्मेदारी और साजिश की आधिकारिक जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए इस आईईडी (Improvised Explosive Device) से लदे वाहन विस्फोट को आधिकारिक तौर पर AQIS (अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट) से जुड़ा पाया गया है।
इस आत्मघाती किस्म के विस्फोट में 11 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि हमला किसी स्थानीय गुट की छिटपुट घटना नहीं थी, बल्कि इसके तार एक अंतरराष्ट्रीय और सुसंगठित आंतकी नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
दिल्ली के व्यस्त लाल किला इलाके में एक वाहन में रखे विस्फोटकों के फटने से भीषण तबाही हुई थी। घटना के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई थी। एनआईए ने अपनी व्यापक जांच में पाया कि इस हमले का मुख्य सूत्रधार डॉ. उमर उन नबी था, जो हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिसिन का असिस्टेंट प्रोफेसर था और खुद इस धमाके में मारा गया था।
जांच एजेंसी ने कोर्ट में अपनी विस्तृत चार्जशीट दाखिल करते हुए 10 आरोपियों को नामजद किया था। यह सभी आरोपी AQIS के स्थानीय सहयोगी संगठन 'अंसार गजवत-उल-हिंद' (AGuH) से जुड़े हुए पाए गए थे। एनआईए की पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ था कि यह मॉड्यूल तुर्की के रास्ते अफगानिस्तान प्रवास (हिजरत) में विफल रहने के बाद भारत के भीतर नेटवर्क को फिर से संगठित कर रहा था। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने भारत की इसी जांच के निष्कर्षों का समर्थन करते हुए उल्लेख किया है कि AQIS बड़े दस्तों के बजाय छोटे और विकेंद्रीकृत सेल बनाकर काम कर रहा है ताकि सुरक्षा एजेंसियों से बचा जा सके।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिक हलकों में इसे भारत के रुख की बड़ी पुष्टि माना जा रहा है। भारत का लगातार यह रुख रहा है कि सीमा पार और क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन तकनीक, डिजिटल नेटवर्क और क्रिप्टो-करेंसी का सहारा लेकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
यूएन रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि AQIS का नेतृत्व अफगानिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षित ठिकाने तलाश रहा है और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में भी पैर पसारने का प्रयास कर रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत की जांच एजेंसी के तथ्यों को स्वीकार किए जाने से वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान और उसके संरक्षण में पनपने वाले आतंकी गुटों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।
यूएन की इस नई रिपोर्ट का प्रभाव व्यापक अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं पर पड़ना तय है। रिपोर्ट में न केवल आतंकवादी समूहों के विकेंद्रीकरण का जिक्र किया गया है, बल्कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों द्वारा रासायनिक व जैविक हथियारों को विकसित करने के निरंतर प्रयासों पर भी चेतावनी जारी की गई है। भारत के लिए यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह साबित करती है कि कट्टरपंथी और पढ़े-लिखे युवाओं को रेडिकलाइज करके नेटवर्क खड़ा करने की रणनीतियां बनाई जा रही हैं। रिपोर्ट ने वैश्विक आतंकवाद निरोधी एजेंसियों और वित्तीय निगरानी तंत्रों (FATF) को और अधिक सतर्क होने तथा डिजिटल मुद्राओं व अनधिकृत फंडिंग चैनल के इस्तेमाल को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जारी किए गए इन निष्कर्षों के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी मुहिम को और तेज करेगा। एनआईए और दिल्ली पुलिस समेत अन्य एजेंसियां देश के भीतर फैले इस आतंकी नेटवर्क की बची हुई कड़ियों को खंगालने में जुटी हुई हैं। साथ ही, सुरक्षा एजेंसियां पड़ोसी देशों के साथ खुफिया जानकारियों के रीयल-टाइम आदान-प्रदान और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम उठा रही हैं, ताकि AQIS जैसी संस्थाओं के किसी भी नए मॉड्यूल को उभरने से पहले ही ध्वस्त किया जा सके।
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