Agra News: रेलवे में नौकरी का झांसा देकर करोड़ों ठगने वाला अंतरराज्यीय जालसाज गिरफ्तार, यूपी एसटीएफ को मिली बड़ी कामयाबी
आगरा में यूपी एसटीएफ ने रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी राजस्थान का निवासी है।

- Agra STF Action: रेलवे में फर्जी भर्ती कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, राजस्थान से पकड़ा गया मास्टरमाइंड
- आगरा में एसटीएफ का शिकंजा: रेलवे में टीटीई और क्लर्क बनाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी, राजस्थान का शातिर दबोचा
- Railway Job Fraud: जाली नियुक्ति पत्र थमाकर युवाओं को चूना लगाने वाला ठग गिरफ्तार, आगरा एसटीएफ की कार्रवाई
आगरा। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की आगरा फील्ड इकाई ने बेरोजगार युवाओं को भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ की टीम ने सटीक सूचना के आधार पर जाल बिछाकर राजस्थान के रहने वाले इस गिरोह के प्रमुख सदस्य को आगरा क्षेत्र से दबोच लिया। पकड़ा गया आरोपी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा के दर्जनों युवकों को टीटीई, क्लर्क और ग्रुप-डी के पदों पर सीधी भर्ती कराने का झूठा भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल चुका है।
एसटीएफ की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे ऐसे युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे जो कई प्रयासों के बाद भी असफल हो रहे थे। युवाओं का विश्वास जीतने के लिए यह गिरोह न केवल रेलवे के जाली आवेदन पत्र भरवाता था, बल्कि फर्जी मेडिकल जांच कराने के साथ-साथ रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) के हूबहू दिखने वाले जाली नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग लेटर तक जारी कर देता था।
- गिरोह का काम करने का शातिर तरीका
एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, राजस्थान से पकड़ा गया यह शातिर जालसाज स्थानीय दलालों के नेटवर्क के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क साधता था। यह खुद को कभी रेलवे बोर्ड का वरिष्ठ अधिकारी तो कभी मंत्रालय स्तर पर मजबूत पहुंच रखने वाला संपर्क सूत्र बताता था।
अभ्यर्थी को भरोसे में लेने के बाद आरोपी प्रति अभ्यर्थी 5 से 8 लाख रुपये की मांग करता था। शुरुआत में कागजी कार्रवाई और 'रजिस्ट्रेशन' के नाम पर 50 हजार से एक लाख रुपये लिए जाते थे। इसके बाद फर्जी मुहर लगे दस्तावेजों के जरिए रेलवे के संभागीय अस्पतालों के नाम पर फर्जी मेडिकल टेस्ट की औपचारिकता पूरी कराई जाती थी। जब पीड़ित अभ्यर्थी को पूरी तरह यकीन हो जाता था कि उसकी नियुक्ति पक्की हो चुकी है, तब उससे पूरी रकम ऐंठ ली जाती थी और उसे जाली जॉइनिंग लेटर थमा दिया जाता था।
ठगी का शिकार हुए युवाओं को जालसाजी का अहसास तब होता था जब वे संबंधित रेलवे मंडल या ट्रेनिंग सेंटर पर योगदान देने पहुंचते थे। वहां अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी बताए जाने पर पीड़ितों के होश उड़ जाते थे।
- पीड़ितों की शिकायतों के बाद सक्रिय हुई एसटीएफ
बीते कुछ समय से आगरा, मथुरा और आसपास के सीमावर्ती जिलों में रेलवे में फर्जी नियुक्तियों के संबंध में लगातार शिकायतें दर्ज हो रही थीं। कई पीड़ित छात्रों ने स्थानीय थानों और उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी आपबीती सुनाई थी कि किस प्रकार उनकी जमीन, गहने बिकवाकर लाखों रुपये ठग लिए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक स्तर से एसटीएफ को इस सिंडिकेट की धरपकड़ का जिम्मा सौंपा गया था। एसटीएफ आगरा यूनिट ने तकनीकी निगरानी (सर्विलांस) और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। जब आरोपी किसी अन्य अभ्यर्थी से ठगी की रकम की वसूली के सिलसिले में आगरा पहुंचा, तो टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
- बरामद सामग्री और बैंक खातों की पड़ताल
एसटीएफ ने गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से कई संदिग्ध सामग्री बरामद की है। इनमें फर्जी रेलवे पहचान पत्र, विभिन्न अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाली मुहरें, कई मोबाइल फोन और दर्जनों सिम कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा आरोपी के पास से ऐसी डायरियां और डिजिटल दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें दर्जनों अभ्यर्थियों के नाम और उनसे वसूले गए पैसों का कच्चा-चिट्ठा दर्ज है।
जांच एजेंसी अब आरोपी के विभिन्न बैंकों में संचालित खातों की पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी के जरिए जुटाई गई रकम कहां ट्रांसफर की गई और किन संपत्तियों में निवेश की गई। एसटीएफ के अनुसार, आरोपी के बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है, जिसे फ्रीज कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- गिरोह से जुड़े अन्य दलालों की तलाश तेज
एसटीएफ की पूछताछ में पकड़े गए आरोपी ने अपने गिरोह के अन्य सक्रिय साथियों के नामों का भी खुलासा किया है। यह नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है, जिसमें राजस्थान और दिल्ली के कुछ अन्य शातिर भी शामिल हैं जो जाली दस्तावेज तैयार करने और प्रिंटिंग का काम संभालते थे।
एसटीएफ की टीमें अब आरोपी द्वारा दी गई जानकारियों के आधार पर संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का मानना है कि इस मुख्य कड़ी के पकड़े जाने के बाद जल्द ही पूरे रैकेट के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पकड़े गए आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में धोखाधड़ी, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने और आईटी एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
Also Read- Hijab Row Allahabad HC: इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब फैसले पर भड़के ओवैसी, बोले- 'धर्म हम तय करेंगे'
What's Your Reaction?





