Meta Child Safety: भारत सरकार की सख्ती के बाद मेटा का बड़ा कदम, बच्चों की सुरक्षा और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त हुए नियम
भारत सरकार द्वारा बाल सुरक्षा और आपत्तिजनक कंटेंट पर कड़े रुख के बाद मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नाबालिगों के लिए सुरक्षा नियमों और प्राइवेसी सेटिंग्स को सख्त किया है।

- Meta Child Safety: भारत सरकार की सख्ती के बाद मेटा का बड़ा कदम, बच्चों की सुरक्षा और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त हुए नियम
- फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बाल सुरक्षा को लेकर केंद्र का कड़ा रुख, मार्क जुकरबर्ग की कंपनी ने एल्गोरिदम और प्राइवेसी में किए बड़े बदलाव
- Child Safety Online: सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा पर सरकार की दो टूक, मेटा ने नाबालिग यूजर्स के लिए लागू किए नए सुरक्षा फिल्टर
- IT Rules & Child Protection: मेटा पर विधिक शिकंजे के बाद एक्टिव मोड में प्लेटफॉर्म्स, जानिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के नए प्रावधान
इंटरनेट और सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रसार के बीच किशोरों और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने कड़ा विधिक रुख अपनाया है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा (Meta) पर नियामक प्राधिकरणों और केंद्रीय एजेंसियों के बढ़ते दबाव के बाद कंपनी ने बच्चों को ऑनलाइन खतरों, अनुचित सामग्री और शोषण से बचाने के लिए अपनी नीति और तकनीकी एल्गोरिदम में व्यापक बदलाव करने की घोषणा की है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और उल्लंघन पाए जाने पर मध्यवर्ती सुरक्षा (सेफ हार्बर) के प्रावधानों को निरस्त करने सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा लगातार यह चिंता जताई जाती रही है कि एल्गोरिदम की खामियों के चलते किशोरवय यूजर्स तक आपत्तिजनक और संवेदनशील सामग्री पहुंच जाती है। सरकार के इस कड़े विधिक हस्तक्षेप के बाद मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली मेटा कंपनी ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर नाबालिगों के खातों के लिए स्वचालित सुरक्षा दीवारें (डिफ़ॉल्ट सेफ्टी वॉल्स) खड़ी करने का निर्णय लिया है।
- सरकार की सख्ती और विधिक प्रावधानों का दबाव
भारत में लागू सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के अंतर्गत सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे बाल यौन उत्पीड़न सामग्री (CSAM) और नाबालिगों को प्रभावित करने वाली किसी भी अवांछनीय सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए स्वचालित उपकरण और त्वरित समाधान प्रणाली लागू करें।
विगत कुछ समय में साइबर निगरानी एजेंसियों ने पाया कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को अवांछित सीधे संदेश (डायरेक्ट मैसेज) भेजने और उन्हें अनुचित समूहों में जोड़ने के मामले सामने आ रहे थे। संसदीय समितियों और विधिक मंचों पर भी सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो रही थी। सरकार ने साफ कर दिया कि यदि प्लेटफॉर्म्स ने स्वतः संज्ञान लेकर बाल सुरक्षा के उपाय लागू नहीं किए, तो भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो (POCSO) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत जवाबदेही तय की जाएगी।
- मेटा द्वारा लागू किए गए नए सुरक्षा उपाय
नियामकीय सख्ती को देखते हुए मेटा ने किशोर उपयोगकर्ताओं (टीनेजर्स) के लिए कई कड़े सुरक्षात्मक उपाय सक्रिय किए हैं:
डिफ़ॉल्ट प्राइवेट अकाउंट्स: 16 वर्ष (कुछ देशों में 18 वर्ष) से कम उम्र के सभी नए और मौजूदा उपयोगकर्ताओं के खातों को स्वचालित रूप से 'प्राइवेट मोड' में रखा जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि केवल वही लोग उनकी पोस्ट या रील देख सकेंगे, जिन्हें वे स्वयं फॉलोवर के रूप में स्वीकार करेंगे।
अवांछित संदेशों पर पूर्ण रोक: वयस्क या अज्ञात खाते अब किसी भी नाबालिग यूजर को तब तक डायरेक्ट मैसेज (DM) नहीं भेज सकेंगे, जब तक कि वह नाबालिग पहले से उन्हें फॉलो न करता हो।
सेंसिटिव कंटेंट फिल्टरिंग: सर्च बार और एक्सप्लोर सेक्शन में ऐसे कीवर्ड्स और ट्रेंडिंग टॉपिक्स को पूरी तरह ब्लॉक किया जा रहा है, जो आत्म-हानि, ईटिंग डिसऑर्डर या यौन सामग्री की ओर संकेत करते हैं।
माता-पिता के लिए निगरानी उपकरण (पेरेंटल सुपरविजन): अभिभावकों को यह सुविधा दी जा रही है कि वे देख सकें कि उनके बच्चे प्लेटफॉर्म पर कितना समय बिता रहे हैं, वे किन खातों से संवाद कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे उनके स्क्रीन समय को सीमित भी कर सकें।
- एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका
कंपनी का दावा है कि वह बाल सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को यूजर तक पहुंचने से पहले ही हटाने के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग कर रही है। नई तकनीक के तहत यदि कोई यूजर अपनी उम्र गलत बताकर खाता बनाने का प्रयास करता है, तो उसके व्यवहार और पोस्टिंग पैटर्न के आधार पर सिस्टम उसकी वास्तविक उम्र का अनुमान लगाकर सुरक्षा सेटिंग्स को लागू कर देता है।
इसके अतिरिक्त, बाल यौन शोषण सामग्री से निपटने के लिए वैश्विक डेटाबेस और डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग (हैश मैचिंग) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जैसे ही कोई संदिग्ध फोटो या वीडियो अपलोड करने की कोशिश होती है, सिस्टम उसे स्वतः ब्लॉक कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अलर्ट भेज देता है।
- उपभोक्ताओं और अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश
डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी बदलावों से बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं रखा जा सकता; इसके लिए अभिभावकों की सजगता भी उतनी ही अनिवार्य है। विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता अपने बच्चों के खातों में उपलब्ध 'पेरेंटल गाइड' फीचर्स को समझें और उन्हें सक्रिय करें। बच्चों को साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें सिखाई जानी चाहिए, जैसे कि किसी अजनबी से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करना और किसी भी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत बड़ों को सूचित करना।
भारत सरकार के संबंधित विभागों ने स्पष्ट किया है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की आंतरिक समीक्षा प्रणाली पर लगातार नजर बनाए रखेंगे। नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट किए जाएंगे, जिससे देश के करोड़ों युवा इंटरनेट उपभोक्ताओं के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
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