Congress Organizational Overhaul: कांग्रेस संगठन में कॉरपोरेट स्टाइल सर्जरी, आधे AICC सचिव होंगे बाहर; करीब 130 नए चेहरों को मिलेगी कमान

कांग्रेस संगठन में कॉरपोरेट स्टाइल पुनर्गठन की तैयारी है। खराब प्रदर्शन करने वाले आधे AICC सचिवों को पदमुक्त कर करीब 130 नए व युवा चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

Sep 15, 2026 - 13:36
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Congress Organizational Overhaul: कांग्रेस संगठन में कॉरपोरेट स्टाइल सर्जरी, आधे AICC सचिव होंगे बाहर; करीब 130 नए चेहरों को मिलेगी कमान
  • Congress Organizational Overhaul: कांग्रेस संगठन में कॉरपोरेट स्टाइल सर्जरी, आधे AICC सचिव होंगे बाहर; करीब 130 नए चेहरों को मिलेगी कमान
  • कांग्रेस में परफॉर्मेंस बेस्ड पुनर्गठन: लचर प्रदर्शन करने वाले सचिवों की होगी छुट्टी, राहुल-प्रियंका ने युवा चेहरों की सूची की तैयार
  • AICC Reshuffle: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में बड़े फेरबदल की तैयारी, जवाबदेही और फील्ड रिपोर्ट के आधार पर तय होंगे पद
  • कांग्रेस की नई सांगठनिक रणनीति: आधे सचिवों पर गिरेगी गाज, यूथ ब्रिगेड को मिलेगी जिम्मेदारी; तैयार हुआ 130 नए नेताओं का पैनल

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अपने संगठनात्मक ढांचे को धारदार और चुनावी दृष्टि से चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए एक व्यापक आंतरिक फेरबदल की रूपरेखा पर काम कर रही है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने राज्यों में तैनात पदाधिकारियों की कार्यशैली को पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे से अलग करते हुए विशुद्ध रूप से प्रदर्शन-आधारित (परफॉर्मेंस ओरिएंटेड) और कॉर्पोरेट शैली के मूल्यांकन के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। इस नई कवायद के तहत राज्यों में लंबे समय से सुस्त या निष्क्रिय भूमिका निभा रहे लगभग आधे एआईसीसी सचिवों को पदमुक्त किए जाने की तैयारी है, जबकि उनके स्थान पर युवा, ऊर्जावान और सांगठनिक रूप से सक्रिय नए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

पार्टी सूत्रों से मिले विवरण के अनुसार, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के स्तर पर विभिन्न राज्यों, अग्रिम संगठनों और छात्र-युवा इकाइयों से फीडबैक लेकर करीब 130 नए चेहरों की एक विस्तृत प्राथमिक सूची तैयार की गई है। इस सूची में उन नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्होंने हाल के जन-आंदोलनों, चुनावी अभियानों और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में लगातार उपस्थिति दर्ज कराई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ शीर्ष नेतृत्व की अंतिम समीक्षा के बाद इस बहुप्रतीक्षित सांगठनिक सर्जरी को औपचारिक रूप दिए जाने की संभावना है।

  • परफॉर्मेंस ऑडिट और केपीआई पर आधारित छंटनी

कांग्रेस संगठन में यह बदलाव अचानक नहीं हो रहा है, बल्कि इसके पीछे पिछले कई महीनों से चल रहा आंतरिक मूल्यांकन कार्य कर रहा है। राज्यों के प्रभारियों और सह-प्रभारियों के कामकाज का ब्योरा जुटाने के लिए पार्टी ने आंतरिक रिपोर्ट कार्ड तैयार कराए हैं।

इस प्रक्रिया में पदाधिकारियों की कार्यक्षमता को कई पैमानों पर परखा गया है:

प्रभार वाले राज्यों में उपस्थिति: संबंधित सचिव अपने आवंटित राज्य या प्रभाग में महीने में कितने दिन फील्ड में रहे।

संगठनात्मक समीक्षा: ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर की बैठकों के आयोजन और वहां की वास्तविक रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने में उनकी भूमिका।

चुनावी प्रबंधन: विधानसभा व स्थानीय चुनावों के दौरान टिकट वितरण में जमीनी फीडबैक और चुनाव प्रचार का समन्वय।

सोशल मीडिया और स्थानीय जनसंपर्क: जनता से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय प्रशासन और विपक्षी दलों के खिलाफ सक्रिय आंदोलन खड़ा करने की क्षमता।

आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि कई सचिव वर्षों से अपने पदों पर बने रहने के बावजूद राज्यों के दौरे केवल औपचारिकता तक सीमित रखते थे। कई पदाधिकारी केवल मुख्यालय आधारित राजनीति में व्यस्त रहते थे, जिससे राज्यों की प्रदेश इकाइयों और केंद्रीय संगठन के बीच सूचनाओं का सीधा संवाद टूट रहा था। ऐसे तमाम पदाधिकारियों को अब जिम्मेदारी से मुक्त कर केवल परिणाम देने वाले चेहरों को ही आगे रखने की नीति तय की गई है।

  • 130 नए चेहरों का पैनल: युवा रक्त को आगे लाने की तैयारी

पार्टी के भीतर युवा नेतृत्व को निर्णय लेने वाले पदों पर बैठाने का वादा उदयपुर नव संकल्प शिविर के दौरान भी किया गया था, जहां 50 वर्ष से कम आयु के लोगों को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई थी। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में तैयार की गई 130 संभावित चेहरों की सूची में युवा कांग्रेस (IYC), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI), अखिल भारतीय महिला कांग्रेस और पार्टी के डेटा व रिसर्च विभागों से जुड़े सक्रिय प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

इन नए चेहरों को संबंधित राज्य प्रभारियों के साथ सह-प्रभारी या सचिव के रूप में जोड़ा जाएगा। इनके सामने मुख्य कार्य राज्यों में ब्लॉक और जिला स्तर पर संगठन के पुनर्गठन की निगरानी करना, गुटबाजी पर काबू पाना और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करना होगा। नेतृत्व का मानना है कि युवा पदाधिकारियों में फील्ड में पसीना बहाने और लगातार यात्राएं करने की अधिक क्षमता होती है, जिसका सीधा लाभ चुनावी राज्यों में मिलेगा।

  • जवाबदेही और समयबद्ध लक्ष्य की क्या रहेगी व्यवस्था

कॉर्पोरेट प्रबंधन की तर्ज पर अब नए नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों को निश्चित 'टारगेट' और समय सीमा दी जाएगी। पार्टी में अब कोई भी पद स्थायी विशेषाधिकार नहीं रहेगा। सूत्रों का कहना है कि प्रत्येक छह महीने पर सचिवों और सह-प्रभारियों के काम का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाएगा।

यदि किसी राज्य में पार्टी का जनसंपर्क अभियान कमजोर पड़ता है या संगठनात्मक नियुक्तियों में अनावश्यक विलंब होता है, तो संबंधित सचिव की जवाबदेही तय होगी। इसके विपरीत, जो पदाधिकारी अपने क्षेत्र में बेहतर परिणाम देंगे और पार्टी के आधार को मजबूत करेंगे, उन्हें भविष्य में उच्चतर समितियों और चुनावी दायित्वों में वरीयता दी जाएगी।

  • आगामी चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति पर होगा प्रभाव?

देश में आगामी महीनों में होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों और संसद में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए कांग्रेस को एक ऐसे सांगठनिक तंत्र की आवश्यकता है जो चौबीसों घंटे सक्रिय रह सके। वर्तमान राजनीतिक परिवेश में जब सत्ताधारी दल पूरे वर्ष चुनावी मोड में रहता है, कांग्रेस का पारंपरिक ढांचा अक्सर चुनावी घोषणा के बाद ही सक्रिय होता दिखाई देता था।

इस कॉरपोरेट स्टाइल पुनर्गठन के माध्यम से पार्टी अपनी इसी कमजोरी को दूर करने का प्रयास कर रही है। आधे से अधिक पुराने सचिवों को हटाकर नए चेहरों को लाना एक साहसिक कदम माना जा रहा है, जिससे आंतरिक असंतोष की आशंका भी हो सकती है। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के बजाय अब केवल योग्यता, निष्ठा और प्रदर्शन ही पार्टी में पद और सम्मान का एकमात्र आधार होगा।

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