Mumbai Food Safety: महाराष्ट्र FDA का बड़ा एक्शन, नायर अस्पताल की कैंटीन और मशहूर ओलंपिया कॉफी हाउस का लाइसेंस सस्पेंड
मुंबई में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने स्वच्छता मानकों के उल्लंघन पर नायर अस्पताल की कैंटीन और दक्षिण मुंबई के ओलंपिया कॉफी हाउस का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

- Maharashtra FDA Action: नायर अस्पताल में गंदगी के बीच बन रहा था खाना, ओलंपिया कॉफी हाउस का फूड लाइसेंस भी हुआ रद्द
- Mumbai News Today: बीएमसी के नायर अस्पताल की कैंटीन और कोलाबा के ओलंपिया कैफे पर गिरी गाज, एफडीए ने बंद कराई सेवाएं
- खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ी भारी: मुंबई में नायर अस्पताल की कैंटीन सहित प्रतिष्ठित भोजनालय पर एफडीए की सख्त कार्रवाई
मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू की है। इसी क्रम में नियामक एजेंसी ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित प्रतिष्ठित टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं बीवाईएल नायर चैरिटेबल अस्पताल की केंद्रीय कैंटीन और दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित ऐतिहासिक ओलंपिया कॉफी हाउस का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। औचक निरीक्षण के दौरान दोनों परिसरों में स्वच्छता संबंधी गंभीर खामियां, कीट नियंत्रण का अभाव और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन पाया गया।
एफडीए के अधिकारियों द्वारा की गई इस सख्त प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दोनों ही खान-पान प्रतिष्ठानों को अपनी सेवाएं तत्काल बंद करने के आदेश दिए गए हैं। अस्पताल परिसर में आने वाले हजारों मरीजों, उनके तीमारदारों, मेडिकल छात्रों और सामान्य नागरिकों की सेहत से जुड़े इस मामले ने शहर के सार्वजनिक और निजी भोजनालयों में खाद्य पदार्थों के रख-रखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- नायर अस्पताल की कैंटीन में मिलीं गंभीर अनियमितताएं
सेंट्रल मुंबई के मुंबई सेंट्रल इलाके में स्थित नायर अस्पताल बीएमसी के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों ओपीडी मरीज, भर्ती रोगी और मेडिकल छात्र पहुंचते हैं। एफडीए के विशेष जांच दल ने जब अस्पताल परिसर में संचालित कैंटीन का औचक निरीक्षण किया, तो रसोई घर और भंडारण कक्ष की स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिस स्थान पर मरीजों और कर्मचारियों के लिए भोजन पकाया जा रहा था, वहां वेंटिलेशन (हवा के निकास) की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। दीवारों और छतों पर फंगस और गंदगी जमी हुई थी। इसके अतिरिक्त, खाद्य सामग्री को सुरक्षित तापमान पर स्टोर करने के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि रसोई क्षेत्र में नियमित पेस्ट कंट्रोल (कीट नियंत्रण) का कोई वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिससे वहां कॉकरोच और अन्य कीटों की मौजूदगी की आशंका पुष्ट हुई। खाद्य तेल के बार-बार इस्तेमाल और खुले में रखे कच्चे माल के नमूनों को लेकर भी अधिकारियों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस निलंबन का कड़ा कदम उठाया गया।
- दक्षिण मुंबई का मशहूर ओलंपिया कॉफी हाउस भी रडार पर
दूसरी ओर, दक्षिण मुंबई के कोलाबा क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध और ऐतिहासिक 'ओलंपिया कॉफी हाउस' पर भी नियमों का पालन न करने पर प्रशासनिक डंडा चला है। दशकों पुराने इस लोकप्रिय भोजनालय में पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों और दफ्तर के कर्मचारियों की भारी भीड़ रहती है।
एफडीए के सुरक्षा अधिकारियों ने जांच के दौरान पाया कि यहां के किचन में स्वच्छता मानकों की अनदेखी की जा रही थी। बर्तनों की धुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की शुद्धता जांचने का कोई तंत्र मौजूद नहीं था। साथ ही, भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों के अनिवार्य मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं कराए जा सके। रसोई के फर्श पर गंदा पानी जमा था और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था बेहद लचर थी। नोटिस जारी होने और तय समय सीमा में सुधार न दिखने पर विभाग ने प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित करने का निर्णय लिया।
- खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून के तहत नोटिस जारी
महाराष्ट्र एफडीए के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के तहत किसी भी प्रतिष्ठान को तब तक संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती जब तक कि वह शेड्यूल 4 में वर्णित न्यूनतम स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा शर्तों को पूरा न करे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस निलंबन एक सुधारात्मक कदम है। दोनों संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर विस्तृत कमियों की सूची थमाई गई है। जब तक कैंटीन और रेस्टोरेंट प्रबंधन पूरी तरह से स्वच्छता सुनिश्चित नहीं करते, आवश्यक मरम्मत नहीं कराते, कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराते और एफडीए द्वारा दोबारा किए जाने वाले निरीक्षण में खरे नहीं उतरते, तब तक उन्हें संचालन फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- मरीजों, तीमारदारों और ग्राहकों की सेहत पर सीधा असर
अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर कैंटीन में गंदगी का पाया जाना सीधे तौर पर कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के जीवन को खतरे में डाल सकता है। अस्पताल के भीतर बनने वाले भोजन में संदूषण (कंटामिनेशन) होने से जलजनित और खाद्यजनित बीमारियों के फैलने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
नायर अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने भी पूर्व में कैंटीन के भोजन की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की थी। एफडीए की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि चाहे वह सरकारी अस्पताल की कैंटीन हो या शहर का कोई प्रतिष्ठित और पुराना रेस्टोरेंट, जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- महानगर में अन्य भोजनालयों पर भी निगरानी तेज
त्योहारी सीजन और मानसून के बाद के मौसम में खाद्य पदार्थों से होने वाले संक्रमणों को रोकने के लिए एफडीए ने पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र में विशेष जांच अभियान छेड़ दिया है। सभी प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों की कैंटीनों, रेलवे स्टेशनों के आसपास के फूड स्टॉलों और लोकप्रिय रेस्टोरेंट्स के नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
नियामक संस्था ने सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs) को आगाह किया है कि वे साफ पानी के उपयोग, स्वच्छ एप्रन व ग्लव्स के प्रयोग, डस्टबिन के उचित ढक्कन और नियमित कीट नियंत्रण का रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से मेंटेन रखें। नियमों की अवहेलना पाए जाने पर केवल जुर्माना ही नहीं लगाया जाएगा, बल्कि प्रतिष्ठान को सील करने और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई है।
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