दिल्ली: रोहिणी में MCD की डॉग कैचर टीम पर हमला, डॉग लवर्स ने वैन तोड़ी, कुत्ते छुड़ाए। 

दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने कुत्तों को पकड़कर आश्रय स्थलों में ले जाने की कार्रवाई

Aug 21, 2025 - 13:01
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दिल्ली: रोहिणी में MCD की डॉग कैचर टीम पर हमला, डॉग लवर्स ने वैन तोड़ी, कुत्ते छुड़ाए। 
दिल्ली: रोहिणी में MCD की डॉग कैचर टीम पर हमला, डॉग लवर्स ने वैन तोड़ी, कुत्ते छुड़ाए। 

दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने कुत्तों को पकड़कर आश्रय स्थलों में ले जाने की कार्रवाई शुरू की है। लेकिन इस दौरान रोहिणी इलाके में 18 अगस्त 2025 को एमसीडी की डॉग कैचर टीम पर हमला होने की घटना सामने आई है। कुछ लोगों, जिन्हें पुलिस ने "डॉग लवर्स" के रूप में बताया, ने टीम के साथ मारपीट की, गाली-गलौज किया, और उनकी वैन को नुकसान पहुंचाया। हमलावरों ने वैन में रखे दो पकड़े गए कुत्तों को भी जबरन छुड़ा लिया। इस घटना के बाद पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और अन्य की तलाश जारी है।

18 अगस्त 2025 को सुबह रोहिणी के सेक्टर 16 में एमसीडी की पशु चिकित्सा विभाग की छह सदस्यीय टीम एक शिकायत के जवाब में पहुंची थी। सरvodaya विद्यालय के शिक्षकों ने स्कूल परिसर में एक आवारा कुत्ते की मौजूदगी की शिकायत की थी। टीम ने उस कुत्ते को पकड़ा और फिर सेक्टर 3 में एक अन्य शिकायत पर पहुंची, जहां उन्होंने एक और कुत्ता पकड़ा। लेकिन जैसे ही वे कुत्तों को वैन में ले जा रहे थे, 15-20 लोगों का एक समूह, जिन्हें पुलिस ने "डॉग लवर्स" के रूप में पहचाना, ने उन्हें घेर लिया।

इन लोगों ने एमसीडी कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज शुरू की और उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने वैन में रखे दोनों कुत्तों को जबरन छुड़ा लिया। इसके अलावा, उन्होंने वैन का перед वाला शीशा तोड़ दिया, एक टायर पंक्चर कर दिया, और वैन में रखा रजिस्टर और लॉगबुक चुरा लिया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें कुछ लोग एमसीडी कर्मचारियों को धमकाते और वैन को नुकसान पहुंचाते नजर आए। एक वीडियो में एक कर्मचारी को डर के मारे यह कहते सुना गया कि अगर अन्य कर्मचारी कुत्ते पकड़ना नहीं छोड़ेंगे, तो उनके साथ भी ऐसा ही होगा।

घटना की सूचना मिलते ही रोहिणी के के.एन. काटजू मार्ग पुलिस स्टेशन में एमसीडी के पशु चिकित्सा अधिकारी रविश कसाना की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 212 (सार्वजनिक कर्तव्य में बाधा डालना), 132 (सार्वजनिक सेवक पर हमला), 324(4) (संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सजा), और 305(सी) (चोरी) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और एक आरोपी, 34 वर्षीय भाविक वासन, को गिरफ्तार किया। भाविक रोहिणी का निवासी है और वह "रोहिणी डॉग लवर्स" नामक व्हाट्सएप ग्रुप का सदस्य है। उसने बताया कि वह अपनी दुकान के बाहर चार आवारा कुत्तों को खाना खिलाता है और उसने ग्रुप में इस घटना की जानकारी साझा की थी, जिसके बाद अन्य लोग मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने दो अन्य महिलाओं को भी सीसीटीवी फुटेज में देखा, जो रोहिणी की निवासी हैं। उनकी तलाश के लिए एक टीम बनाई गई है। डीसीपी (रोहिणी) राजीव रंजन ने बताया कि भाविक को हिरासत में लिया गया है और अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने यह भी कहा कि यह घटना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में बाधा डालने का गंभीर मामला है।

  • सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर एक स्वत: संज्ञान लिया और सख्त निर्देश जारी किए। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद के अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर आश्रय स्थलों में ले जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी कुत्ते को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा और ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा, आश्रय स्थलों में कम से कम 5,000 कुत्तों की क्षमता होनी चाहिए, और वहां स्टेरलाइजेशन, टीकाकरण और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन कुत्तों को पकड़ने में बाधा डालेगा, तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी।

14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य तीन जजों की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया शामिल थे, ने इस आदेश पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने स्थानीय अधिकारियों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई और कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या उनकी लापरवाही के कारण बढ़ी है। हालांकि, कोर्ट ने 11 अगस्त के आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया और याचिका पर अंतिम आदेश सुरक्षित रखा।

  • एमसीडी की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एमसीडी ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। मेयर राजा इकबाल सिंह ने बताया कि अब तक 100 से ज्यादा आवारा कुत्तों को पकड़ा गया है और 20 पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्रों को अस्थायी आश्रय स्थलों में बदला गया है। इसके अलावा, बाहरी दिल्ली के घोघा डेरी में 85 एकड़ का एक प्लॉट बड़े आश्रय स्थल के लिए चिह्नित किया गया है। एमसीडी द्वारका में एक एबीसी केंद्र का विस्तार कर रही है और तीसरे चरण में घोघा डेरी में बड़े पैमाने पर आश्रय स्थल बनाएगी। मेयर ने कहा कि यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से होगी, जिसमें पहले आक्रामक और रेबीज से संक्रमित कुत्तों को पकड़ा जाएगा।

मेयर ने पशु प्रेमियों के एक समूह से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि कुत्तों के साथ घर जैसा व्यवहार किया जाएगा। उन्होंने 500 स्वयंसेवकों की मदद लेने की पेशकश को भी स्वीकार किया और एक संयुक्त समिति बनाने पर सहमति जताई ताकि यह प्रक्रिया मानवीय और व्यवस्थित हो।

इस घटना ने दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ, कुछ लोग, जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, ने इस हमले की निंदा की और कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है। गोयल ने रोहिणी डीसीपी को शिकायत दी और अवमानना याचिका दायर करने की बात कही। उनका कहना है कि दिल्ली में 10 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं और हर दिन 2,000 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं।

दूसरी तरफ, पशु प्रेमी और कार्यकर्ता इस आदेश को अव्यवहारिक और अमानवीय बता रहे हैं। पशु अधिकार संगठनों, जैसे पीईटीए इंडिया, ने इसे "अवैध और अवैज्ञानिक" कहा है। उनका कहना है कि दिल्ली में इतने बड़े पैमाने पर आश्रय स्थल बनाने की सुविधा नहीं है और यह कदम कुत्तों के लिए क्रूर हो सकता है। मेनका गांधी जैसे कार्यकर्ताओं ने कहा कि दिल्ली में 3 लाख कुत्तों के लिए आश्रय स्थल नहीं हैं, और इस आदेश को लागू करना असंभव है।

रोहिणी में एमसीडी की डॉग कैचर टीम पर हुआ हमला दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर चल रहे तनाव को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों ने जहां एक तरफ जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं पशु प्रेमियों का कहना है कि यह आदेश कुत्तों के प्रति क्रूरता को बढ़ावा दे सकता है। इस घटना ने एमसीडी कर्मचारियों के बीच डर पैदा कर दिया है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने की कोशिश कर रहे हैं।

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