Tamil Nadu Caste Census - तमिलनाडु में बनेगा सोशल जस्टिस सर्वे कमिशन, सीएम विजय की कैबिनेट ने दी मंजूरी
तमिलनाडु में सीएम विजय की कैबिनेट ने सोशल जस्टिस सर्वे कमिशन के गठन को मंजूरी दी है। यह आयोग जाति जनगणना और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की रूपरेखा तैयार करेगा।

- TVK Government Decisions - फरवरी-मार्च 2027 में गठित होगा सामाजिक न्याय सर्वेक्षण आयोग, रिटायर्ड जज करेंगे अध्यक्षता
- Conversion Reservation Row - धर्मांतरित लोगों के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी तमिलनाडु सरकार
- Tamil Nadu Cabinet Decisions - केंद्रीय जनगणना के बाद होगा व्यापक सामाजिक-आर्थिक सर्वे, कानून मंत्री निर्मल कुमार का ऐलान
तमिलनाडु की सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार ने राज्य में जातिवार जनगणना और व्यापक सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में इसके लिए एक समर्पित 'सोशल जस्टिस सर्वे कमिशन' (सामाजिक न्याय सर्वेक्षण आयोग) के गठन को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई।
- फरवरी या मार्च 2027 में होगा आयोग का विधिवत गठन
कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए राज्य के विधि एवं न्याय मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने बताया कि आयोग के गठन की समय-सीमा केंद्र सरकार की आगामी राष्ट्रीय जनसंख्या जनगणना के साथ समन्वित की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद, संभवतः फरवरी या मार्च 2027 के आसपास इस राज्य स्तरीय आयोग को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया जाएगा। आयोग की कमान उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति को सौंपी जाएगी, जबकि राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी इसके सदस्य के रूप में प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग देंगे।
- केंद्रीय जनगणना से अलग होगा सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन
मंत्री निर्मल कुमार ने बताया कि इस आयोग की रूपरेखा को पूर्व में तमिलनाडु के राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर के विधानसभा अभिभाषण में भी प्रमुखता से शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रस्तावित सर्वेक्षण केवल साधारण जातिगत गणना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह केंद्र सरकार की ओर से होने वाली सामान्य गणना से काफी व्यापक और भिन्न होगा। इसके अंतर्गत तमिलनाडु की प्रत्येक जाति के शैक्षणिक, आर्थिक, आजीविका और जीवन स्तर का विस्तृत व वैज्ञानिक आंकड़ा संकलित किया जाएगा, ताकि लक्षित कल्याणकारी योजनाएं तैयार की जा सकें।
- धर्मांतरित वर्गों के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका
इसके साथ ही, तमिलनाडु कैबिनेट ने एक अन्य महत्वपूर्ण कानूनी मामले में शीर्ष अदालत का रुख करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय के उस हालिया फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दाखिल करने को मंजूरी दी है, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार के 2024 के एक आदेश को निरस्त कर दिया था। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने हिंदू धर्म से इस्लाम या अन्य धर्मों में धर्मांतरित हुए पिछड़े वर्गों के लोगों को आरक्षण का लाभ देने संबंधी प्रावधान किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। राज्य सरकार अब कानूनी पुनर्विचार के जरिए अपने सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण का बचाव करेगी।
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