बिहार के बगहा में घरेलू विवाद के बाद पति ने नवविवाहिता का गला घोंटा, साक्ष्य मिटाने के लिए गन्ने के खेत से उठाकर आम के बगीचे में लटकाया शव।
बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र बगहा पुलिस जिला अंतर्गत लौकरिया थाना क्षेत्र में एक बेहद ही खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना
- लौकरिया थाना क्षेत्र के गरकट्टी गांव में सनसनीखेज वारदात, हत्या को आत्महत्या का रूप देने की खौफनाक साजिश का पुलिस ने चौबीस घंटे में किया भंडाफोड़।
- दहेज उत्पीड़न और हत्या के मामले में आरोपी पति गौतम काजी गिरफ्तार, वैज्ञानिक साक्ष्यों और फोरेंसिक जांच के सामने गुनाह कबूल कर सलाखों के पीछे पहुंचा कातिल।
बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र बगहा पुलिस जिला अंतर्गत लौकरिया थाना क्षेत्र में एक बेहद ही खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और वैवाहिक रिश्तों की पवित्रता को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। गरकट्टी गांव के समीप स्थित एक सुनसान बगीचे में एक युवा महिला का शव पेड़ से लटके होने की खबर मिलते ही पूरे ग्रामीण इलाके में तीव्र गति से सनसनी और दहशत फैल गई। शुरुआती दौर में देखने पर यह मामला पूरी तरह से एक साधारण आत्महत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन जब पुलिस प्रशासन ने मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू की तो परत-दर-परत एक ऐसी खौफनाक साजिश की हकीकत सामने आई जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। एक व्यक्ति ने न केवल अपनी जीवनसंगिनी की अत्यंत क्रूरतापूर्वक जीवन लीला समाप्त कर दी, बल्कि कानून की आंखों में धूल झोंकने और खुद को बेदाग साबित करने के लिए मृतका के शव को फंदे से लटकाकर खुदकुशी का एक सुनियोजित और झूठा नाटक भी रच डाला।
इस अमानवीय त्रासदी की शिकार हुई मृतका की पहचान गरकट्टी गांव निवासी 24 वर्षीय हेमलता कुमारी के रूप में की गई है, जिसकी शादी कुछ समय पूर्व ही इसी गांव के रहने वाले गौतम काजी नाम के युवक के साथ संपन्न हुई थी। घटना की रात लगभग ग्यारह बजे के आसपास स्थानीय प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के बाहर एक घने आम के बगीचे में एक महिला का शव संदिग्ध अवस्था में पेड़ की डाल से झूल रहा है। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना अध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस बल की एक विशेष टीम ने बिना कोई समय गंवाए अविलंब घटनास्थल की ओर कूच किया और वहां पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। रात के अंधेरे और मामले की अत्यंत संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी इस घटनाक्रम की पल-पल की जानकारी साझा की जा रही थी, ताकि जांच में किसी भी प्रकार की कोई तकनीकी या कानूनी खामी न रह जाए।
घटनास्थल पर फैली इस रहस्यमयी खामोशी और शव के लटकने की स्थिति को देखकर पुलिस के मन में पहली ही नजर में कई गहरे संदेह पैदा हो गए थे, जिसके कारण इस मामले को सामान्य आत्महत्या मानकर ठंडे बस्ते में डालने के बजाय एक गहन आपराधिक साजिश के कोण से देखने का निर्णय लिया गया। बगहा के पुलिस कप्तान रामानंद कौशल ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को भांपते हुए तुरंत जिला मुख्यालय से फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की एक विशेष वैज्ञानिक टीम को साक्ष्य संकलन के लिए रवाना होने का निर्देश जारी किया। फोरेंसिक विशेषज्ञों की इस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर मृतका के गले के निशानों, पेड़ की ऊंचाई, फंदे की बुनावट और आसपास की मिट्टी पर मौजूद पैरों के निशानों का अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक पद्धति से बारीकी से निरीक्षण किया। इस वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसे पुख्ता और अकाट्य भौतिक साक्ष्य हाथ लगे जिन्होंने आत्महत्या की मनगढ़ंत कहानी को पूरी तरह से खारिज कर दिया और यह पूरी तरह साफ हो गया कि यह मामला स्वैच्छिक खुदकुशी का नहीं बल्कि एक सोची-समझी क्रूर हत्या का है। फोरेंसिक जांच दल को मृतका के गले पर मिले निशान (लिगेचर मार्क) और आम के पेड़ की डाल पर रस्सी के घर्षण की स्थिति में भारी विसंगति नजर आई, जो यह प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त थी कि महिला को मृत अवस्था में फंदे पर लटकाया गया था।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जब पुलिस की जांच की सुई मृतका के ससुराल वालों और विशेषकर उसके पति गौतम काजी की तरफ घूमी, तो पुलिस टीम ने रामनगर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में आरोपी के घर पर औचक छापेमारी की। पुलिस की गाड़ियों को अपने दरवाजे पर दस्तक देते देख आरोपी पति ने भागने का असफल प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिस जवानों ने उसे चारों तरफ से घेरकर तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया। थाने लाकर जब कड़ाई से और मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ शुरू की गई, तो पहले तो उसने पुलिस को भटकाने की पूरी कोशिश की और अपनी पत्नी को मानसिक रूप से परेशान बताते हुए खुदकुशी की बात पर अड़ा रहा। परंतु जैसे ही जांच अधिकारियों ने उसके सामने फोरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक प्रमाण, गन्ने के खेत में मिले संघर्ष के निशान और उसके बयानों में मौजूद भारी विरोधाभास को सामने रखा, तो उसका सारा आत्मविश्वास ताश के पत्तों की तरह ढह गया और उसने अपना जुर्म पूरी तरह स्वीकार कर लिया।
हिरासत में लिए गए आरोपी पति ने पूछताछ के दौरान जिस भयानक कृत्य और सिलसिलेवार घटनाक्रम को स्वीकार किया है, वह किसी भी सामान्य मानस को विचलित करने के लिए काफी है। घटना वाले दिन शाम के समय किसी घरेलू बात को लेकर पति-पत्नी के बीच काफी तीखी बहस और कहासुनी हुई थी, जिसके बाद तैश में आकर आरोपी ने विवाहिता के साथ बेरहमी से मारपीट की। इसके बाद जब हेमलता अपनी जान बचाने या गुस्से में घर से बाहर की ओर भागी, तो आरोपी भी चुपके से उसके पीछे-पीछे चल दिया और गांव के समीप स्थित एक सुनसान गन्ने के खेत में उसे अकेला पाकर दबोच लिया। गुस्से और हैवानियत की हदें पार करते हुए आरोपी ने महिला को जबरन जमीन पर पटक दिया और अपनी पूरी ताकत से उसका गला तब तक घोंटे रखा जब तक कि उसके शरीर की आखरी सांस शांत नहीं हो गई।
इस खौफनाक हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी के सिर पर कानून के शिकंजे का खौफ इस कदर हावी हुआ कि उसने तुरंत ही शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्यों को पूरी तरह से नष्ट करने की एक नई और शातिर योजना पर काम करना शुरू कर दिया। उसने मृतका के बेजान शरीर को गन्ने के घने खेत में ही छुपा दिया और खुद चुपचाप वहां से हटकर आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने लगा ताकि रात के गहराने और सन्नाटा पसरने का इंतजार किया जा सके। जैसे ही मध्यरात्रि के समय गांव और खेतों की तरफ लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई, वह दोबारा उस स्थान पर पहुंचा और हेमलता के शव को अपने कंधों पर उठाकर पास ही स्थित एक आम के बगीचे में ले गया। वहां उसने मृतका के ही दुपट्टे का इस्तेमाल कर शव को आम के पेड़ की एक मजबूत टहनी से इस प्रकार लटका दिया ताकि सुबह जब लोग इसे देखें तो इसे एक घरेलू कलह से तंग आकर की गई आत्महत्या का सीधा मामला समझें।
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