अदालती कार्यवाही में वानखेड़े के वकील की दलील: 'न कभी पैसा मांगा, न लिया', जांच एजेंसी की कार्रवाई को बताया दुर्भावनापूर्ण
मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो 2021 में मुंबई तट पर एक क्रूज जहाज पर हुई छापेमारी ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। इस कार्रवाई में आर्यन खान सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया था और कुछ हफ्तों तक जेल में रहने के बाद उन्हें
- बॉम्बे हाई कोर्ट में समीर वानखेड़े की दोटूक: शाहरुख खान से रिश्वत मांगने के आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार
- आर्यन खान ड्रग्स केस में नया मोड़: पूर्व एनसीबी अधिकारी ने सीबीआई की एफआईआर को दी चुनौती, भ्रष्टाचार के दावों को नकारा
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) मुंबई के पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने एक बार फिर कानूनी मोर्चे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान वानखेड़े की ओर से यह दृढ़तापूर्वक कहा गया कि उन्होंने बहुचर्चित क्रूज ड्रग्स मामले के दौरान अभिनेता शाहरुख खान से किसी भी प्रकार की रिश्वत की मांग नहीं की थी। भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी समीर वानखेड़े वर्तमान में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एक भ्रष्टाचार के मामले का सामना कर रहे हैं। वानखेड़े के कानूनी प्रतिनिधि ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उनके मुवक्किल पर लगाए गए सभी आरोप न केवल बेबुनियाद हैं, बल्कि उनकी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से गढ़े गए हैं। इस मामले ने एक बार फिर देश के सबसे हाई-प्रोफाइल ड्रग्स केस और उससे जुड़ी जांच प्रक्रियाओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
समीर वानखेड़े के वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की खंडपीठ के समक्ष अपना पक्ष रखा। सुनवाई का मुख्य उद्देश्य मई 2023 में सीबीआई द्वारा वानखेड़े के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करवाना था। वकील ने दलील दी कि जांच एजेंसी ने जिस आधार पर यह मामला दर्ज किया है, उसमें कोई ठोस सच्चाई नहीं है। वानखेड़े की याचिका में यह तर्क दिया गया है कि आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता शाहरुख खान से संपर्क साधने या उनसे 25 करोड़ रुपये की मोटी रकम मांगने का जो दावा सीबीआई कर रही है, वह केवल काल्पनिक है। बचाव पक्ष ने जोर देकर कहा कि समीर वानखेड़े ने हमेशा अपने कर्तव्य का पालन किया है और उन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग उनकी ईमानदारी पर किया गया एक हमला है।
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के विवरण इस मामले को और भी गंभीर बनाते हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि वानखेड़े और इस मामले के कुछ अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को ड्रग्स मामले में 'क्लीन चिट' देने और उन्हें कानूनी राहत प्रदान करने के बदले में 25 करोड़ रुपये की भारी रिश्वत मांगी थी। सीबीआई के अनुसार, बाद में यह समझौता 18 करोड़ रुपये में तय हुआ था और कथित रूप से 50 लाख रुपये की पहली किस्त टोकन मनी के रूप में ली भी गई थी। हालांकि, वानखेड़े के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने कभी भी ऐसी किसी सौदेबाजी में हिस्सा नहीं लिया और न ही कभी अभिनेता से कोई पैसा लिया। उन्होंने इन आरोपों को एक ईमानदार अधिकारी को प्रताड़ित करने की साजिश करार दिया।
जांच का दायरा: सीबीआई ने अपनी जांच में केवल समीर वानखेड़े को ही नहीं, बल्कि एनसीबी के कुछ अन्य अधिकारियों और स्वतंत्र गवाहों को भी शामिल किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने मिलकर एक ऐसा जाल बुना था जिसमें प्रभावशाली परिवारों को निशाना बनाया जा सके। हालांकि, वानखेड़े पक्ष का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई उस समय के राजनीतिक दबाव और बदले की भावना का परिणाम है।
अदालत की कार्यवाही के दौरान वानखेड़े की याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि सीबीआई की कार्रवाई में कई कानूनी खामियां हैं। उनके वकील ने तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ मामला चलाने के लिए आवश्यक पूर्व अनुमति और प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन नहीं किया गया है। बचाव पक्ष ने अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि आर्यन खान केस की जांच के दौरान समीर वानखेड़े ने केवल वही किया जो एक जांच अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। यदि बाद में किसी अन्य एजेंसी ने मामले में अलग राय रखी, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि शुरुआती जांच करने वाले अधिकारी ने भ्रष्टाचार किया था। उन्होंने कहा कि वानखेड़े को केवल बलि का बकरा बनाया जा रहा है ताकि इस पूरे मामले की विफलता का ठीकरा उनके सिर फोड़ा जा सके।
मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो 2021 में मुंबई तट पर एक क्रूज जहाज पर हुई छापेमारी ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। इस कार्रवाई में आर्यन खान सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया था और कुछ हफ्तों तक जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी। बाद में, एनसीबी की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट में आर्यन खान को सबूतों के अभाव में क्लीन चिट दे दी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर समीर वानखेड़े की भूमिका संदेह के घेरे में आई थी और उनके खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ सीबीआई की कार्रवाई शुरू हुई। वानखेड़े ने हमेशा यह स्टैंड लिया है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ही छापेमारी की थी और उनकी नियत पर सवाल उठाना गलत है।
सोमवार को हुई बहस के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसी से भी कुछ स्पष्टीकरण मांगे हैं। वानखेड़े के वकील ने अंत में यह भी कहा कि उनके मुवक्किल को इस मामले में बार-बार पूछताछ के नाम पर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस एफआईआर को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए क्योंकि इसमें लगाए गए आरोप किसी भी विश्वसनीय साक्ष्य पर आधारित नहीं हैं। वानखेड़े ने अपनी याचिका में यह विश्वास जताया है कि न्यायपालिका उनके साथ न्याय करेगी और उनके करियर पर लगे इस कलंक को हटा देगी।
फिलहाल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए भविष्य की तारीख तय की है। तब तक समीर वानखेड़े को मिली गिरफ्तारी से अंतरिम राहत जारी रहने की संभावना है। यह कानूनी लड़ाई अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां एक तरफ एक प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के गंभीर आरोप हैं और दूसरी तरफ एक वरिष्ठ अधिकारी की अपनी ईमानदारी की रक्षा करने की जंग है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई अदालत के समक्ष कौन से नए सबूत पेश करती है और क्या वानखेड़े अपनी बेगुनाही साबित करने में सफल होते हैं।
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