मेरी मौत तक मराठी नहीं बोलूँगा, पनवेल की गोदरेज सिटी सोसायटी में मराठी भाषा को लेकर बड़ा विवाद, विजय चांडेल का वीडियो वायरल। 

Maharashtra Viral News: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में मुंबई से सटे पनवेल इलाके की गोदरेज सिटी सोसायटी में मराठी भाषा को लेकर एक विवाद सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर

Sep 2, 2025 - 13:23
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मेरी मौत तक मराठी नहीं बोलूँगा, पनवेल की गोदरेज सिटी सोसायटी में मराठी भाषा को लेकर बड़ा विवाद, विजय चांडेल का वीडियो वायरल। 
मेरी मौत तक मराठी नहीं बोलूँगा, पनवेल की गोदरेज सिटी सोसायटी में मराठी भाषा को लेकर बड़ा विवाद, विजय चांडेल का वीडियो वायरल। 

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में मुंबई से सटे पनवेल इलाके की गोदरेज सिटी सोसायटी में मराठी भाषा को लेकर एक विवाद सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सोसायटी के निवासी और ट्रैवल ब्लॉगर विजय चांडेल कहते नजर आ रहे हैं कि वे भारतीय हैं और हिंदी ही बोलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जबरन मराठी बोलने या सीखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह विवाद गणेश उत्सव के आयोजन को लेकर शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे भाषा के मुद्दे पर केंद्रित हो गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया, और फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है।

यह घटना शनिवार की शाम गोदरेज सिटी सोसायटी में हुई, जब गणेश उत्सव की तैयारियों को लेकर सोसायटी के कुछ निवासियों के बीच बहस शुरू हुई। विजय चांडेल ने बताया कि वे और कुछ अन्य निवासी गणपति की स्थापना करना चाहते थे, लेकिन सोसायटी के कुछ लोग इस आयोजन के खिलाफ थे। इस बात को लेकर पहले तो सामान्य बहस हुई, लेकिन जल्द ही यह विवाद गणेश उत्सव से हटकर मराठी भाषा पर आ गया। कुछ लोगों ने विजय से मराठी में बात करने की मांग की, जिसका उन्होंने विरोध किया। विजय ने कहा, “मैं भारतीय हूं और हिंदी मेरी भाषा है। मुझे मराठी से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मुझे जबरन मराठी बोलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।” इस दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और धक्का-मुक्की की।

इस घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में विजय चांडेल गुस्से में अपनी बात रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे मराठी भाषा या संस्कृति के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी भी भाषा को थोपना गलत है। वीडियो में कुछ अन्य लोग भी बहस करते नजर आ रहे हैं, और माहौल तनावपूर्ण दिखाई देता है। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं उकसाईं। कुछ लोगों ने विजय का समर्थन किया और कहा कि किसी को भी अपनी भाषा चुनने की आजादी होनी चाहिए, जबकि कुछ ने इसे मराठी संस्कृति के अपमान से जोड़कर देखा।

घटना की सूचना मिलते ही पनवेल पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दोनों पक्षों से बात की और मामले को शांत करने की कोशिश की। शुरुआती जांच में पता चला कि विवाद गणेश उत्सव के आयोजन को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह भाषा के मुद्दे पर केंद्रित हो गया। पुलिस ने किसी भी तरह की हिंसा या अभद्र व्यवहार की पुष्टि नहीं की, लेकिन दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। पनवेल थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से मामले को सुलझाने की बात कही है, और कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। पुलिस ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ा दी है।

विजय चांडेल, जो एक ट्रैवल ब्लॉगर हैं, ने बाद में सोशल मीडिया पर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने लिखा कि वे मराठी भाषा और संस्कृति का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी को भी अपनी पसंद की भाषा बोलने से रोकना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि गणेश उत्सव जैसे पर्व सभी के लिए हैं, और इसे किसी एक भाषा या समुदाय तक सीमित नहीं करना चाहिए। विजय ने लोगों से इस मुद्दे को तूल न देने की अपील की और कहा कि वे इस मामले को और बढ़ाना नहीं चाहते।

यह घटना महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी भाषा को लेकर चल रही बहस का एक हिस्सा बन गई है। हाल के महीनों में राज्य में भाषा को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, जुलाई में मीरा रोड पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं द्वारा एक गुजराती दुकानदार की कथित पिटाई का मामला सामने आया था, क्योंकि वह मराठी में बात नहीं कर रहा था। इसी तरह, अगस्त में पंढरपुर के विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में एक पुजारी द्वारा हिंदी में पूजा करने पर विवाद हो गया था। इन घटनाओं ने मराठी और गैर-मराठी भाषी समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विवाद सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता की कमी को दर्शाते हैं। भाषा और संस्कृति को लेकर लोगों में गर्व होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे दूसरों पर थोपना ठीक नहीं है। मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में मराठी और गैर-मराठी भाषी लोगों का मिश्रित समाज है, और यहां सभी को एक-दूसरे की संस्कृति और भाषा का सम्मान करना चाहिए। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि ऐसे विवादों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदरेज सिटी सोसायटी में पहले भी छोटे-मोटे विवाद होते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला भाषा और गणेश उत्सव जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ गया। कुछ निवासियों ने बताया कि सोसायटी में मराठी और गैर-मराठी भाषी लोग मिलकर रहते हैं, और आमतौर पर कोई बड़ा विवाद नहीं होता। लेकिन इस बार गणेश उत्सव के आयोजन को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई, जिससे माहौल गरमा गया।

राजनीतिक दलों ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि मराठी और हिंदी के बीच कोई विवाद नहीं होना चाहिए, और कुछ लोग जानबूझकर इस तरह के मुद्दों को हवा देकर समाज में तनाव पैदा करते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह ऐसे मामलों में सख्ती से निपटे। दूसरी ओर, कुछ स्थानीय नेताओं ने इस घटना को मराठी अस्मिता से जोड़ने की कोशिश की, जिसे कई लोगों ने गलत बताया।

पुलिस ने इस मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। पनवेल थाना प्रभारी ने कहा कि वे सभी पक्षों से बात कर रहे हैं, और अगर कोई औपचारिक शिकायत मिलती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की।

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