Shadab Chauhan: कौन बड़ा हिंदू बनने के लिए लड़ रहे अखिलेश और योगी, AIMIM नेता शादाब चौहान का बड़ा हमला

AIMIM नेता शादाब चौहान ने सपा मुखिया अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता बुनियादी मुद्दों को छोड़ 'बड़ा हिंदू' बनने की होड़ में हैं।

Jul 12, 2026 - 07:46
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Shadab Chauhan: कौन बड़ा हिंदू बनने के लिए लड़ रहे अखिलेश और योगी, AIMIM नेता शादाब चौहान का बड़ा हमला
एआईएमआईएम (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान

  • UP Politics: 'योगी जी के इशारे पर बुनियादी मुद्दों से बच रहे अखिलेश', AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान का गंभीर आरोप
  • यूपी की सियासत में नया मोड़! AIMIM नेता शादाब चौहान बोले- 'अखिलेश और योगी में लगी है कौन बड़ा हिंदू बनने की होड़'
  • AIMIM नेता शादाब चौहान का सपा और भाजपा पर तीखा वार, अखिलेश यादव पर लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर एक साथ तीखा हमला बोला है। लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि सूबे की आम जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। उनके मुताबिक, वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बीच केवल इस बात की होड़ मची है कि दोनों में से 'कौन बड़ा हिंदू' है। एआईएमआईएम नेता ने यह भी दावा किया कि विपक्षी दल के नेता सत्तारूढ़ सरकार के इशारे पर जनता की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा करने से बच रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश की चुनावी बिसात पर नया ध्रुवीकरण देखने को मिल सकता है।

यह मामला उत्तर प्रदेश की समकालीन राजनीति में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बीच जारी नूराकुश्ती को लेकर एआईएमआईएम द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों से जुड़ा है। एआईएमआईएम के फायरब्रांड नेता शादाब चौहान ने एक प्रेस वक्तव्य जारी कर समाजवादी पार्टी की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का स्तर अब जनकल्याणकारी नीतियों से हटकर केवल धार्मिक वर्चस्व साबित करने तक सिमट गया है, जिसमें सत्तापक्ष और मुख्य विपक्ष दोनों समान रूप से भागीदार नजर आ रहे हैं।

शादाब चौहान ने उत्तर प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सूबे की जनता महंगाई, बेरोजगारी और बदहाल कानून व्यवस्था से त्रस्त है, लेकिन विधानसभा से लेकर सड़कों तक इन मुद्दों पर कोई ठोस राजनीतिक विमर्श नहीं दिखाई दे रहा है।

एआईएमआईएम नेता ने अपने बयान में सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लपेटे में लिया। उन्होंने दावा किया कि दोनों नेताओं की राजनीति अब केवल बहुसंख्यक समाज को रिझाने के इर्द-गिर्द घूम रही है। इसके साथ ही चौहान ने एक बड़ा राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि अखिलेश यादव दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परोक्ष इशारे पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि समाजवादी पार्टी जनता के वास्तविक संकटों जैसे गरीबी, भ्रष्टाचार, बदहाल शिक्षा, लचर स्वास्थ्य सेवाओं और सबसे महत्वपूर्ण रूप से प्रदेश में अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) व दलितों पर कथित तौर पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ मुखर होकर संसद या सड़क पर बहस नहीं करना चाहती।

शादाब चौहान के इस तीखे बयान पर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में चौतरफा प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:

  • समाजवादी पार्टी का पक्ष: सपा के प्रवक्ताओं ने एआईएमआईएम के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सपा का कहना है कि एआईएमआईएम हमेशा से भाजपा की 'बी-टीम' के रूप में काम करती आई है और उसका मुख्य काम धर्मनिरपेक्ष वोटों का बिखराव करना है। सपा नेताओं के मुताबिक, वे सदन में लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे हैं।

  • भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया: भाजपा नेताओं का कहना है कि उनकी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर काम कर रही है। विपक्ष और अन्य क्षेत्रीय दल अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख इस तरह की अनर्गल और मनगढ़ंत बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं।

  • एआईएमआईएम का अडिग रुख: वहीं, ओवैसी की पार्टी का साफ तौर पर मानना है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों और वंचित समाज के पास अब सपा का कोई विश्वसनीय विकल्प नहीं बचा है, इसलिए वे जनता की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाते रहेंगे।

शादाब चौहान के इस बयान का सीधा असर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कोर वोट बैंक, विशेषकर मुस्लिम और दलित मतदाताओं के मानस पर पड़ सकता है। एआईएमआईएम लगातार सपा को 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के रास्ते पर चलने वाली पार्टी के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रही है। यदि यह धारणा जमीन पर मजबूत होती है, तो आगामी स्थानीय या उप-चुनावों में मतों का विभाजन तय है। यह बयान यह भी दर्शाता है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षेत्रीय दल तीसरे मोर्चे या स्वतंत्र पहचान को मजबूत करने के लिए आक्रामक रुख अख्तियार करने वाले हैं।

इस जुबानी जंग के बाद अब यह देखना होगा कि समाजवादी पार्टी आगामी दिनों में एआईएमआईएम के इन आरोपों को बेअसर करने के लिए जनता के मुद्दों पर किस तरह का आंदोलन खड़ा करती है। वहीं, एआईएमआईएम इन मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसभाएं और रैलियां करने की योजना बना रही है ताकि जनता के बीच अपनी पैठ को और गहरा किया जा सके। भाजपा भी इस अंतर्विरोध का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रही है।

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