MP BJP Rebellion: दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर भारी बवाल, जिला अध्यक्ष समेत 300 पदाधिकारियों का इस्तीफा
MP BJP Rebellion Case: मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद जिला अध्यक्ष सहित 300 बीजेपी पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है।

- Narottam Mishra Ticket Cut: बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का दतिया में उग्र प्रदर्शन, सामूहिक इस्तीफे से संकट में पार्टी
- मध्य प्रदेश बीजेपी में बड़ी बगावत! दतिया उपचुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर जिला अध्यक्ष सहित 300 नेताओं ने छोड़े पद
- एमपी की सियासत में भूचाल: दतिया से नरोत्तम मिश्रा का पत्ता कटने पर भड़के समर्थक, हाईवे जाम, 300 से अधिक पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा होते ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर एक अभूतपूर्व और बेहद गंभीर आंतरिक संकट खड़ा हो गया है। बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दतिया सीट से राज्य के पूर्व गृहमंत्री और कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आरएसएस पृष्ठभूमि के वरिष्ठ संगठनात्मक नेता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी में खुली बगावत हो गई है। शुक्रवार और शनिवार को सामने आए इस घटनाक्रम के तहत नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में दतिया के बीजेपी जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित करीब 300 स्थानीय पदाधिकारियों, पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने अपने सांगठनात्मक पदों से सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है। इस राजनीतिक विद्रोह के बाद पूरे चंबल-ग्वालियर संभाग की सियासत में हड़कंप मच गया है।
मध्य प्रदेश की राजनीति के सबसे रसूखदार और मुखर चेहरों में गिने जाने वाले पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को दतिया उपचुनाव में टिकट न मिलना राज्य बीजेपी के भीतर एक बड़े असंतोष का कारण बन गया है। दतिया विधानसभा सीट वर्तमान में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की एक धोखाधड़ी के मामले में दोषसिद्धि (Conviction) के बाद अयोग्य ठहराए जाने के कारण खाली हुई है। 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को बेहद करीबी मुकाबले में हराया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि इस उपचुनाव में बीजेपी एक बार फिर अपने तीन बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाएगी, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगा दी। इस फैसले को स्थानीय संगठन ने पूरी तरह से एकतरफा मानते हुए बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है।
जैसे ही दिल्ली और भोपाल से आशुतोष तिवारी के नाम की आधिकारिक घोषणा हुई, वैसे ही दतिया की सड़कों पर तनाव की स्थिति बन गई। नरोत्तम मिश्रा के हजारों समर्थक लाठियों और बैनरों के साथ सड़कों पर उतर आए और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया, जिससे करीब 15 किलोमीटर लंबा भारी ट्रैफिक जाम लग गया।
शनिवार सुबह स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस प्रशासन ने हाईवे को खाली कराने का प्रयास किया। उग्र भीड़ और पुलिस बल के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए कथित पथराव में दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) मयूर खंडेलवाल सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। इसी बीच, दतिया के जिला कार्यालय में एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जहां जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने घोषणा की कि वे कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने समूची जिला कार्यकारिणी, स्थानीय पार्षदों और ब्लॉक स्तर के करीब 300 से अधिक पदाधिकारियों के हस्ताक्षरित इस्तीफे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भेज दिए हैं।
इस अप्रत्याशित आंतरिक बगावत और हिंसा पर विभिन्न पक्षों की बेहद नपी-तुली और गंभीर प्रतिक्रियाएं आई हैं:
बीजेपी जिला अध्यक्ष का रुख: इस्तीफा देने वाले जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने कहा, "आशुतोष तिवारी जी को टिकट देने का फैसला पूरी तरह से एकतरफा है और इसमें जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं से कोई राय नहीं ली गई। नरोत्तम मिश्रा ने दो दशकों तक दतिया को सींचा है। हमने नेतृत्व को 24 घंटे का समय दिया है, यदि टिकट पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो हम प्राथमिक सदस्यता से भी सामूहिक इस्तीफा दे देंगे।"
पुलिस प्रशासन का बयान: दतिया एसपी मयूर खंडेलवाल ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जानकारी देते हुए कहा, "प्रदर्शनकारियों ने कानून को अपने हाथ में लिया और पुलिस टीम पर सुबह हिंसक पथराव किया। इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी गई है और उपद्रवियों को चिह्नित कर हिरासत में लिया जा रहा है।"
नवनियुक्त उम्मीदवार की बात: टिकट मिलने के बाद आशुतोष तिवारी ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, "नरोत्तम मिश्रा जी हमारे बेहद आदरणीय और वरिष्ठ नेता हैं। वर्तमान परिस्थितियां जो भी हों, हम मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी वरिष्ठों के मार्गदर्शन से काम करेंगे।"
इस बड़े राजनीतिक विद्रोह का असर आगामी उपचुनावों और पार्टी की आंतरिक साख पर पड़ना तय है:
उपचुनाव में जीत की राह कठिन: यदि 300 प्रमुख पदाधिकारी और कैडर ग्राउंड पर काम करने से इनकार कर देते हैं, तो बीजेपी के नए उम्मीदवार के लिए बहुत कम समय में चुनाव प्रचार संभालना और सीट जीतना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
चंबल संभाग के समीकरणों पर असर: नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव केवल दतिया तक सीमित नहीं है। उनके समर्थकों की यह नाराजगी पड़ोसी जिलों ग्वालियर, भिंड और मुरैना के जातिगत व राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।
विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा: कांग्रेस इस आंतरिक फूट को भुनाने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई है और इसे बीजेपी के भीतर मचे आंतरिक पावर स्ट्रगल का प्रमाण बता रही है।
दतिया में नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई है, जबकि मतदान 30 जुलाई को होना निर्धारित है। समय की कमी को देखते हुए बीजेपी प्रदेश संगठन और मुख्यमंत्री सचिवालय पूरी तरह सतर्क हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, डैमेज कंट्रोल के लिए भोपाल से वरिष्ठ मंत्रियों की एक विशेष टीम को दतिया भेजा जा रहा है जो नरोत्तम मिश्रा और बागी पदाधिकारियों से बातचीत कर उन्हें मनाने का प्रयास करेगी। यदि अगले 24 से 48 घंटों में बागी कार्यकर्ताओं को शांत नहीं किया गया, तो पार्टी को अनुशासनात्मक कार्रवाई का कड़ा रुख अपनाना पड़ सकता है, जिससे यह चुनावी मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणीय या आंतरिक भितरघात का शिकार हो सकता है।
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