Omar Abdullah Allegations: उमर अब्दुल्ला का भाजपा पर बड़ा आरोप, कहा- NC विधायक को दिया 30 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर अपनी पार्टी को तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया है। उन्होंने विधायक को 30 करोड़ रुपये ऑफर करने का दावा किया।

- Jammu Kashmir Politics: 'नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ना चाहती है बीजेपी', उमर अब्दुल्ला के दावे से जम्मू-कश्मीर में सियासी उबाल
- जम्मू-कश्मीर में नया सियासी धमाका! उमर अब्दुल्ला का दावा- NC विधायक को मिला ₹30 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर
- उमर अब्दुल्ला का सनसनीखेज आरोप: बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक को तोड़ने के लिए दिया करोड़ों का प्रलोभन
जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर अपनी पार्टी को खंडित करने की साजिश रचने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाया है। उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक मौजूदा विधायक को पाला बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि और साथ में कैबिनेट मंत्री का पद देने का सीधा प्रस्ताव दिया था। इस बयान के सामने आने के बाद केंद्र शासित प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर घाटी से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा और चढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति में दलीय निष्ठा और कथित 'हॉर्स ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) से जुड़ा हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मीडिया और जनता के सामने यह बात रखी कि विपक्षी खेमे की ओर से उनकी पार्टी की एकता को अस्थिर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनका सीधा निशाना भारतीय जनता पार्टी पर है, जिस पर उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर विधायकों को प्रलोभन देने की राजनीति करने की बात कही है।
जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन और सांगठनिक विस्तार के दौर के बीच उमर अब्दुल्ला का यह बयान रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अनुसार, यह घटना हाल के दिनों की है जब बीजेपी के कुछ रणनीतिकारों ने उनकी पार्टी (NC) के एक विधायक से संपर्क साधा।
उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान विधायक को प्रलोभन दिया गया कि यदि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस को छोड़कर या उसके धड़े को अलग करके बीजेपी के सुर में सुर मिलाते हैं, तो उन्हें न केवल 20 से 30 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, बल्कि सरकार में एक महत्वपूर्ण मंत्रालय या मंत्री पद से भी नवाजा जाएगा। हालांकि, उमर अब्दुल्ला ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह ऑफर किस विशेष विधायक को दिया गया था और यह संपर्क किस स्तर पर हुआ था। उनका दावा है कि उनकी पार्टी के विधायक एकजुट हैं और इस तरह के किसी भी अनैतिक प्रयास के झांसे में आने वाले नहीं हैं।
इस बेहद संवेदनशील और गंभीर आरोप पर दोनों पक्षों की ओर से संतुलित और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:
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नेशनल कॉन्फ्रेंस का पक्ष: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उमर अब्दुल्ला के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कश्मीर में लोकतांत्रिक जनादेश को पैसे और सत्ता के बल पर बदलने की कोशिश की जा रही हो। पार्टी ने साफ किया कि उनके पास अपने दावों को पुख्ता करने वाले आधार हैं।
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भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया: बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय प्रवक्ताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि उमर अब्दुल्ला के ये आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद, तथ्यहीन और हताशा का परिणाम हैं। पार्टी के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस अपनी आंतरिक कमजोरियों और विधायकों के असंतोष को छिपाने के लिए भाजपा पर झूठे आरोप लगा रही है। बीजेपी ने उमर अब्दुल्ला को चुनौती दी है कि यदि उनके पास कोई सबूत है, तो वे सार्वजनिक करें या कानूनी कार्रवाई करें।
उमर अब्दुल्ला के इस बयान का असर जम्मू-कश्मीर की पूरी राजनीतिक दिशा पर पड़ना तय है। इससे घाटी की क्षेत्रीय पार्टियों और राष्ट्रीय पार्टियों (विशेषकर बीजेपी) के बीच दूरियां और अधिक बढ़ जाएंगी। विधानसभा या प्रशासनिक स्तर पर होने वाले आगामी नीतिगत फैसलों में भी इस कटुता का असर देखने को मिल सकता है। आम जनता के बीच भी इस तरह के बयानों से राजनीतिक शुचिता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
इस गंभीर आरोप के बाद अब गेंद सुरक्षा एजेंसियों, चुनाव आयोग या कानूनी दायरे में जा सकती है, बशर्ते नेशनल कॉन्फ्रेंस इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराए। वहीं, बीजेपी इस मुद्दे पर पलटवार करते हुए उमर अब्दुल्ला को घेरने की रणनीति बना रही है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या इस कथित ऑफर से जुड़े कुछ और तकनीकी तथ्य या नाम सामने आते हैं, या फिर यह बयान केवल एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है।
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