दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस के दो डिब्बों में लगी भीषण आग, रविवार सुबह यात्रियों में मची अफरा-तफरी

ट्रेन के रुकते ही रेलवे के मैदानी अमले, ऑन-बोर्ड सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों ने बिना कोई समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। प्रभावित कोचों में सो रहे और बैठे यात्रियों को आपातकालीन खिड़कियों और मुख्य द्वारों के जरिए बेहद सुरक्षित तरीके से नी

May 17, 2026 - 10:36
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दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस के दो डिब्बों में लगी भीषण आग, रविवार सुबह यात्रियों में मची अफरा-तफरी
दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस के दो डिब्बों में लगी भीषण आग, रविवार सुबह यात्रियों में मची अफरा-तफरी

  • आलोट और विक्रमगढ़ रेलवे स्टेशनों के बीच अचानक भड़कीं लपटें, सूझबूझ से टाला गया एक बड़ा रेल हादसा
  • दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह ठप, दर्जनों गाड़ियों को विभिन्न स्टेशनों पर रोका गया

रविवार की सुबह भारतीय रेल नेटवर्क के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों में से एक पर उस समय एक बेहद भयावह स्थिति पैदा हो गई, जब हजरत निजामुद्दीन की ओर जा रही डाउन राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12431) के दो डिब्बों में अचानक भीषण आग लग गई। यह दर्दनाक और डरावनी घटना मध्य प्रदेश के अंतर्गत आने वाले आलोट और विक्रमगढ़ रेलवे स्टेशनों के बीच के खंड पर घटित हुई। सुबह के शांत माहौल में जैसे ही यात्रियों को ट्रेन के भीतर से धुआं और आग की लपटें उठती हुई दिखाई दीं, वैसे ही पूरी ट्रेन के भीतर चीख-पुकार और भारी अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। अपनी जान बचाने के लिए यात्री सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे, जिससे बोगियों के भीतर कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

घटना की शुरुआत उस समय हुई जब ट्रेन अपनी सामान्य गति से दिल्ली की तरफ बढ़ रही थी और अचानक पहियों या निचले हिस्से से धुएं का एक भारी गुबार उठने लगा। देखते ही देखते धुएं ने आग की भीषण लपटों का रूप ले लिया और वह दो प्रमुख कोचों में फैल गई। गनीमत यह रही कि जैसे ही ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड को इस आपातकालीन स्थिति का आभास हुआ, उन्होंने अपनी त्वरित सूझबूझ और व्यावसायिक कुशलता का परिचय देते हुए ट्रेन को तुरंत दो स्टेशनों के बीच में ही आपातकालीन ब्रेक लगाकर रोक दिया। यदि समय रहते ट्रेन को नहीं रोका जाता, तो हवा के तेज बहाव के कारण आग अन्य बोगियों में भी तेजी से फैल सकती थी और नुकसान का दायरा बहुत बड़ा हो सकता था।

ट्रेन के रुकते ही रेलवे के मैदानी अमले, ऑन-बोर्ड सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों ने बिना कोई समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। प्रभावित कोचों में सो रहे और बैठे यात्रियों को आपातकालीन खिड़कियों और मुख्य द्वारों के जरिए बेहद सुरक्षित तरीके से नीचे उतारा गया। स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग को इस बड़ी घटना की सूचना तुरंत दी गई, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां पानी की बौछारों के साथ मौके पर पहुँचीं। राहत कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया और यह सुनिश्चित किया कि आग ट्रेन के इंजन या डीजल टैंक वाले हिस्से तक न पहुँच पाए। प्राथमिक जांच में सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की बात सामने आई है।  रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों और शुरुआती जांच दल के अनुसार, इस तरह की आग लगने के पीछे आमतौर पर कोच के निचले हिस्से में स्थित ब्रेक बाइंडिंग की समस्या या पहियों में अत्यधिक घर्षण के कारण पैदा होने वाली चिंगारी मुख्य वजह हो सकती है। इसके अलावा विद्युत पैनलों में शॉर्ट सर्किट होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। रेलवे ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं ताकि सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

इस भीषण अग्निकांड के कारण दिल्ली और मुंबई को जोड़ने वाले देश के सबसे व्यस्त मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई। चूंकि घटना दो स्टेशनों के बीच के ट्रैक पर हुई थी, इसलिए सुरक्षा और तकनीकी जांच के मद्देनजर अप और डाउन दोनों लाइनों पर बिजली की आपूर्ति को एहतियातन बंद करना पड़ा। इस मार्ग ठप होने के चलते इस रूट से गुजरने वाली कई अन्य सुपरफास्ट, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के पहिए जहां के तहां थम गए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दर्जनों ट्रेनों को पिछले और अगले विभिन्न स्टेशनों पर ही रोकने का फैसला किया।

मार्ग बाधित होने के बाद पश्चिम रेलवे और संबंधित मंडलों के नियंत्रण कक्ष तुरंत सक्रिय हो गए और प्रभावित स्टेशनों पर फंसे यात्रियों के लिए पीने के पानी और भोजन की व्यवस्था शुरू की गई। रेलवे के वरिष्ठ अभियंताओं और दुर्घटना राहत ट्रेन (एआरटी) को भारी क्रेन और तकनीकी उपकरणों के साथ तुरंत दुर्घटनास्थल पर रवाना किया गया। टीम का मुख्य लक्ष्य सबसे पहले प्रभावित दोनों कोचों को ट्रेन के शेष सुरक्षित हिस्से से अलग करना और ट्रैक को जल्द से जल्द यातायात के लिए फिट घोषित करना था। क्षतिग्रस्त डिब्बों को हटाने के बाद पटरी और ओवरहेड बिजली के तारों (ओएचई) की सुरक्षा जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। रेलवे प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। जिन यात्रियों का सामान इस अग्निकांड में आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है, उनके विवरण दर्ज किए जा रहे हैं और ट्रेन के शेष हिस्से को एक नए इंजन की मदद से आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। विभिन्न स्टेशनों पर पूछताछ काउंटर स्थापित किए गए हैं ताकि ट्रेनों के परिवर्तित मार्ग या उनके विलंब से चलने की सही जानकारी परिजनों को मिल सके। पूरी स्थिति सामान्य होने और रेल यातायात को पूरी तरह बहाल होने में कुछ घंटों का समय लगने की संभावना है।

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