अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में महिला डॉक्टर का वायरल वीडियो: बच्ची के पिता को थप्पड़ मारा, इलाज से इनकार; स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के आदेश दिए।
अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में एक दर्दनाक घटना ने मरीजों के विश्वास को झकझोर दिया। 26 अक्टूबर 2025 की रात को एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने बुखार से पीड़ित एक बच्ची
अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में एक दर्दनाक घटना ने मरीजों के विश्वास को झकझोर दिया। 26 अक्टूबर 2025 की रात को एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने बुखार से पीड़ित एक बच्ची के पिता को थप्पड़ मार दिया और इलाज करने से साफ इनकार कर दिया। पूरा वाकया वीडियो में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि डॉक्टरों के व्यवहार और मरीजों के अधिकारों पर भी बहस छेड़ दी। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पंषेरिया ने तुरंत हाई लेवल जांच के आदेश दे दिए हैं, और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब बच्ची को इलाज के अभाव में घर लौटना पड़ा, और परिवार ने बाद में निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
घटना उस रात करीब नौ बजे की है, जब अशोक हरिभाई चावड़ा अपनी भतीजी को लेकर सोला सिविल अस्पताल पहुंचे। बच्ची को पिछले दो दिनों से हल्का बुखार था, लेकिन रविवार की शाम को यह तेज हो गया। खांसी के कारण सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, और तापमान बहुत ऊंचा था। चावड़ा के भाई अस्पताल में इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम करते हैं, इसलिए परिवार ने सरकारी अस्पताल को ही चुना। बाल रोग विभाग में पहुंचने पर डॉक्टर मौजूद नहीं थीं। इंतजार के बाद जब महिला रेजिडेंट डॉक्टर आईं, तो चावड़ा ने बच्ची का इलाज करने की गुजारिश की। लेकिन डॉक्टर ने तुरंत मोबाइल फोन नीचे रखने का आदेश दे दिया। चावड़ा ने पूछा कि ऐसा क्यों करें, तो डॉक्टर भड़क गईं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि वे आगे बढ़ीं, हाथ उठाया और चावड़ा को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। पास खड़ा सिक्योरिटी गार्ड ने हस्तक्षेप नहीं किया। थप्पड़ के बाद डॉक्टर ने चिल्लाते हुए कहा, 'मैं किसी की नहीं सुनूंगी, क्योंकि तुम मेरे साथ बुरा व्यवहार कर रहे हो। मैं तुम्हारी बच्ची का इलाज नहीं करूंगी। जहां जाना हो जाओ, यहां से चले जाओ।' परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे, लेकिन तनाव के कारण वे चुप रहे। चावड़ा ने शिकायत की कि बच्ची को तुरंत देखा जाए, लेकिन डॉक्टर ने साफ मना कर दिया। आखिरकार, परिवार बच्ची को लेकर घर चला गया।
बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिवार ने रात को ही निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि बुखार 103 डिग्री से ऊपर था, और देरी से स्थिति जटिल हो सकती थी। चावड़ा ने बाद में बताया कि वे सिर्फ इलाज की मांग कर रहे थे, न कि कोई गलत व्यवहार। 'हम गरीब परिवार से हैं, सरकारी अस्पताल पर भरोसा करते हैं। लेकिन वहां ऐसी बदसलूकी ने हमें तोड़ दिया,' उन्होंने कहा। वीडियो अगले ही दिन, 27 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर अपलोड हो गया। ट्विटर पर SolaHospitalViral और DoctorSlap जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। हजारों यूजर्स ने इसे शेयर किया, और डॉक्टर की निंदा की। एक यूजर ने लिखा, 'डॉक्टर का कर्तव्य है मरीज की सेवा, न कि हिंसा। बच्ची की जान जोखिम में डाल दी।' वायरल वीडियो ने मीडिया का भी ध्यान खींचा। एबीपी न्यूज, फ्री प्रेस जर्नल, न्यू इंडियन एक्सप्रेस और दैनिक भास्कर जैसे चैनलों और अखबारों ने इसे प्रमुखता से दिखाया। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई कि क्या डॉक्टरों पर दबाव के कारण ऐसा होता है, या यह व्यक्तिगत लापरवाही है।
घटना की खबर वायरल होते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. दीपिका सिंघल ने बताया कि एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है, जिसकी अध्यक्षता वे खुद करेंगी। समिति सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी, दोनों पक्षों के बयान लेगी, और सच्चाई सामने लाएगी। 'हम मरीजों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देते हैं। अगर गलती हुई, तो कार्रवाई होगी,' सिंघल ने कहा। लेकिन अस्पताल ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया। दूसरी ओर, गुजरात सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पंषेरिया ने स्वास्थ्य सचिव को तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, 'कोई भी स्वास्थ्य कर्मी अगर गलत आचरण का दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह मरीजों के अधिकारों का मामला है।' मंत्री ने जांच को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया, ताकि जनता का भरोसा बना रहे। चावड़ा ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही, लेकिन फिलहाल वे परिवार की देखभाल में लगे हैं। सिक्योरिटी गार्ड के निष्क्रिय रहने पर भी सवाल उठे हैं, और अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा हो रही है।
यह घटना गुजरात के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के व्यवहार पर एक बड़ा सवाल है। सोला सिविल अस्पताल अहमदाबाद का एक प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज आते हैं। लेकिन ओवरलोड स्टाफ और संसाधनों की कमी से तनाव आम है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों को संवेदनशीलता की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। हाल ही में देशभर में डॉक्टरों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन यह मामला उल्टा है, जहां डॉक्टर ही हिंसक दिखीं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी प्रतिक्रिया दी कि ऐसी घटनाएं चिकित्सा पेशे की छवि खराब करती हैं। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि वीडियो ने सच्चाई उजागर कर दी, लेकिन जांच जल्द पूरी होनी चाहिए। चावड़ा परिवार अब सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा है, लेकिन घटना का सदमा बना हुआ है। बच्ची की हालत अब स्थिर है, लेकिन परिवार ने सरकारी सहायता की मांग की है।
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