कोटा में बारा रोड पर मॉडर्न स्कूल के पास सड़क पर घुसा 3 फीट का मगरमच्छ: स्थानीयों ने पकड़कर नाले में छोड़ा, वन विभाग पहुंचा, वीडियो वायरल।
राजस्थान के कोटा शहर में एक हैरान करने वाली घटना ने लोगों को चौंका दिया। बारा रोड पर स्थित मॉडर्न स्कूल के पास नल के रास्ते से निकलकर करीब 3 फीट लंबा मगरमच्छ सड़क
कोटा। राजस्थान के कोटा शहर में एक हैरान करने वाली घटना ने लोगों को चौंका दिया। बारा रोड पर स्थित मॉडर्न स्कूल के पास नल के रास्ते से निकलकर करीब 3 फीट लंबा मगरमच्छ सड़क पर आ गया। फुटपाथ पर दौड़ते हुए मगरमच्छ को देखकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। कई लोगों ने डरते हुए भी मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वन विभाग को सूचना दी गई, लेकिन विभाग की टीम पहुंचने से पहले ही स्थानीय युवाओं ने हिम्मत दिखाई और मगरमच्छ को पकड़ लिया। उन्होंने उसे सुरक्षित तरीके से पास के नाले में छोड़ दिया। पूरा वाकया सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना शहर में बढ़ते जलस्तर और मानसून के असर को दर्शाती है।
घटना 26 अक्टूबर 2025 को दोपहर करीब 1 बजे बारा रोड पर हुई। बारा रोड कोटा का एक व्यस्त इलाका है, जहां मॉडर्न स्कूल के अलावा कई दुकानें और आवासीय कॉलोनियां हैं। स्कूल के पास एक नाला बहता है, जो चंबल नदी से जुड़ा हुआ है। मानसून के बाद भी बारिश का असर बरकरार है, जिससे नालों का जलस्तर बढ़ गया। माना जा रहा है कि मगरमच्छ इसी नाले से निकलकर नल के रास्ते सड़क पर पहुंचा। स्थानीय निवासी रवि शर्मा ने बताया कि वे स्कूल के पास से गुजर रहे थे, जब मगरमच्छ फुटपाथ पर दौड़ता दिखा। उसकी लंबाई 3 फीट के करीब थी, और रंग हरा-भूरा था। रवि ने तुरंत वीडियो बनाया और आसपास के लोगों को बुलाया। भीड़ इकट्ठी हो गई, लेकिन कोई घबराहट नहीं हुई। एक युवक ने कहा, हमने पहले भी ऐसे देखा है, लेकिन इतना करीब कभी नहीं।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि मगरमच्छ तेजी से फुटपाथ पर भाग रहा था। लोग चिल्ला रहे थे, बच्चे-बूढ़े दूर हट रहे थे। एक महिला ने बताया कि मगरमच्छ नल के पास से निकला, शायद पानी की आवाज सुनकर। कोटा में चंबल नदी और उसके किनारे के तालाबों में मगरमच्छों की अच्छी खासी आबादी है। लेकिन मानसून में बाढ़ के कारण वे शहर के नजदीक आ जाते हैं। इस बार अक्टूबर में भी असामान्य बारिश हुई, जिससे नाले उफान पर हैं। स्थानीय युवा अमित जैन ने कहा कि हमने वन विभाग को फोन किया, लेकिन 20 मिनट में कोई नहीं आया। तब हमने खुद ही प्लान बनाया। अमित और उनके दोस्तों ने एक लंबी छड़ी और बोरे का इस्तेमाल किया। उन्होंने मगरमच्छ को धीरे से पकड़ा, ताकि नुकसान न हो। फिर उसे नाले के किनारे ले जाकर छोड़ दिया। अमित ने कहा, जानवर को चोट नहीं पहुंचानी थी, बस शहर से दूर करना था।
वन विभाग की टीम 30 मिनट बाद पहुंची। टीम लीडर ने कहा कि हमें देरी हुई, क्योंकि दूसरे इलाके में भी कॉल आई थी। उन्होंने नाले का निरीक्षण किया और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। विभाग ने बताया कि कोटा में 200 से ज्यादा मगरमच्छ हैं, जो चंबल के किनारे रहते हैं। मानसून में 20-30 मामले आते हैं, जब वे शहर में घुस आते हैं। इस बार भी 10 से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं। टीम ने मगरमच्छ को ट्रैक करने के लिए चिप लगाने की योजना बनाई, लेकिन तब तक वह नाले में चला गया था। वन अधिकारी ने चेतावनी दी कि लोग खुद न पकड़ें, क्योंकि मगरमच्छ खतरनाक होता है। लेकिन इस केस में स्थानीयों की बहादुरी की तारीफ की।
वीडियो सोशल मीडिया पर सुबह से वायरल हो गया। इंस्टाग्राम और एक्स पर #KotaCrocodile ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने लिखा, कोटा का जंगल सफारी सा हो गया। दूसरे ने कहा, युवाओं का कमाल, वन विभाग से बेहतर। वीडियो को 50 हजार से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। न्यूज चैनलों ने भी इसे कवर किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट की कि यह घटना मानसून के बाद के खतरे को दिखाती है। एनडीटीवी ने पुरानी घटनाओं का जिक्र किया, जब कोटा में मगरमच्छ सड़कों पर घूमते थे। 2024 में भी कॉमर्स कॉलेज रोड पर ऐसा ही वाकया हुआ था, जहां 3.5 फीट का मगरमच्छ सड़क पार कर गया। तब भी वीडियो वायरल हुआ था।
कोटा चंबल नदी के किनारे बसा शहर है, जो कोचिंग हब के लिए मशहूर है। यहां की नदियां और तालाब वन्यजीवों का घर हैं। चंबल में घड़ियाल और मगरमच्छ संरक्षित हैं। लेकिन शहरीकरण से खतरा बढ़ा है। काला तालाब जैसे जलाशय भर दिए गए, जिससे मगरमच्छों की मौत हुई। 2022 में 50 मगरमच्छ मरे थे। एनजीटी ने नोटिस जारी किया था। इस घटना ने फिर सवाल उठाए कि शहर के नजदीक नालों की सफाई और बाड़ लगानी चाहिए। स्थानीय एसडीएम ने कहा कि हम सर्वे कराएंगे और स्कूलों को अलर्ट करेंगे। मॉडर्न स्कूल के प्रिंसिपल ने बच्चों को घर भेज दिया और सतर्कता बरती।
यह घटना कोटा की जिंदगी को दर्शाती है। शहर में लाखों छात्र रहते हैं, जो पढ़ाई के लिए आते हैं। लेकिन प्रकृति का असर भी रहता है। स्थानीयों ने कहा कि मगरमच्छ शांत था, शायद भूखा नहीं। वन्यजीव विशेषज्ञ ने बताया कि छोटे मगरमच्छ कम खतरा पैदा करते हैं, लेकिन बड़े वाले घातक होते हैं। कोटा में रेस्क्यू टीम है, जो 24 घंटे अलर्ट पर रहती है। इस बार देरी हुई, लेकिन कोई हादसा नहीं। युवाओं की तारीफ हो रही है। अमित को लोकल हीरो कहा जा रहा। वीडियो में वे हंसते हुए मगरमच्छ को छोड़ते दिखे।
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