Muzaffarnagar Accident: मुजफ्फरनगर में ट्रक से टकराई कार, सगे भाइयों समेत तीन की दर्दनाक मौत।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार को सदमे में डाल दिया है। रामराज थाना क्षेत्र के देवल मार्ग पर बिजनौर-मीरापुर रोड पर एक तेज रफ्तार कार
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार को सदमे में डाल दिया है। रामराज थाना क्षेत्र के देवल मार्ग पर बिजनौर-मीरापुर रोड पर एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई। इस दुर्घटना में सगे भाइयों मयंक और लक्ष्य की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि लक्ष्य की साली प्रियंका ने इलाज के दौरान दम तोड़ा। मयंक की पत्नी रिया गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे बिजनौर के अस्पताल में रेफर किया गया। यह हादसा सोमवार सुबह मोंटी होटल के पास मध्य गंगानहर पुल के निकट हुआ, जहां सीसीटीवी फुटेज में पूरी घटना कैद हो गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और लोगों में सड़क सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
घटना की पूरी कथा बेहद दर्दनाक है। मयंक और लक्ष्य बिजनौर के इंद्रलोक कालोनी के निवासी थे। लक्ष्य दिल्ली के एक होटल में काम करता था। शनिवार को मयंक अपनी पत्नी रिया और साली प्रियंका के साथ कार से दिल्ली पहुंचा और भाई लक्ष्य को लेकर बिजनौर लौटने की तैयारी की। सोमवार सुबह वे टाटा टियागो कार से दिल्ली से बिजनौर की ओर रवाना हुए। लक्ष्य कार चला रहा था। सुबह करीब सात बजे वे मुजफ्फरनगर के देवल गांव के पास पहुंचे, जहां बिजनौर मार्ग पर मोंटी होटल के सामने सड़क किनारे एक ट्रक खड़ा था। अचानक कार अनियंत्रित हो गई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि ड्राइवर लक्ष्य को नींद की झपकी आ गई, जिससे कार पहले मध्य गंगानहर पुल की रेलिंग से टकराई और फिर ट्रक से जोरदार ठोकर खाई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार का अगला हिस्सा चूर-चूर हो गया और अंदर बैठे लोग बुरी तरह फंस गए।
मौके पर पहुंचे राहगीरों ने चीख-पुकार सुनकर दौड़ लगाई। होटल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे ने पूरी घटना को रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में दिखता है कि कार तेज स्पीड से आ रही है और अचानक दाहिने तरफ मुड़ते हुए ट्रक में घुस जाती है। धमाके जैसी आवाज हुई और धूल का गुबार उठ गया। स्थानीय लोग और पुलिस टीम ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। मयंक, लक्ष्य और प्रियंका के शव कार में ही फंसे मिले। उन्हें बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। रिया को गंभीर चोटें आईं, लेकिन वह होश में थी। उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर बिजनौर के जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसके सिर और पैरों में गंभीर चोटें हैं, लेकिन जान का खतरा टल गया है। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है, हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में उसका कोई दोष नहीं पाया गया।
परिवार वाले इस हादसे से स्तब्ध हैं। मयंक दो बच्चों का पिता था और एक छोटे से व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। लक्ष्य 25 वर्ष का था और दिल्ली में मेहनत करके परिवार का सहारा था। प्रियंका 22 वर्ष की थी और हाल ही में कॉलेज से पास हुई थी। रिया के मायके वाले बिजनौर पहुंच चुके हैं और अस्पताल में उनका साथ दे रहे हैं। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। रामराज थाने के प्रभारी ने बताया कि मामले की गहन जांच चल रही है। सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल से स्पष्ट हो गया है कि कार की स्पीड 80 किलोमीटर से अधिक थी। सड़क पर कोई तकनीकी खराबी नहीं मिली, लेकिन ड्राइवर की थकान और नींद मुख्य कारण बने। परिवार ने बताया कि वे रास्ते में थोड़ा रुककर चाय पी चुके थे, लेकिन फिर भी यह हादसा हो गया।
यह घटना उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या को उजागर करती है। राज्य में हर साल हजारों दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें अधिकांश तेज रफ्तार, नींद की झपकी और ओवरटेकिंग के कारण घटित होती हैं। मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में बिजनौर-मीरापुर रोड एक व्यस्त मार्ग है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। पिछले एक साल में इस रोड पर ही 50 से अधिक हादसे दर्ज हो चुके हैं, जिनमें 30 से ज्यादा मौतें हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी ड्राइविंग के दौरान हर दो घंटे रुकना और नींद पूरी करना जरूरी है। हाईवे पर साइन बोर्ड लगे हैं, लेकिन उनका पालन कम होता है। इस हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने सड़क पर स्पीड ब्रेकर लगाने और चेतावनी संकेत बढ़ाने का फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने के निर्देश दिए हैं। घायल रिया के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। एसएसपी ने बताया कि जिले में सड़क सुरक्षा अभियान तेज किया जाएगा। स्कूलों और ड्राइविंग सेंटर्स पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग पर जोर दिया जाएगा। लेकिन यह हादसा हमें याद दिलाता है कि कोई भी तकनीक या नियम तभी काम करता है, जब हम खुद सतर्क रहें। मयंक का परिवार अब टूट चुका है। उनके बच्चे अब अनाथ जैसे हो गए हैं। पड़ोसियों ने बताया कि मयंक हमेशा परिवार के लिए चिंतित रहता था, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
इस तरह के हादसे पूरे देश में आम हो गए हैं। हाल ही में आगरा एक्सप्रेसवे पर एक कार ने श्रमिकों को कुचल दिया था, जिसमें चार मौतें हुईं। इसी तरह, लखनऊ में एक ट्रक ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में उत्तर प्रदेश में अब तक 20 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 10 हजार मौतें दर्ज हैं। इनमें से 40 प्रतिशत हादसे नींद या थकान से जुड़े हैं। परिवहन विभाग ने मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जहां ड्राइवर अपनी थकान की रिपोर्ट कर सकते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव की जरूरत है। सड़कों की मरम्मत, बेहतर लाइटिंग और नियमित पेट्रोलिंग से ये हादसे कम हो सकते हैं।
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