प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य विवाद तूल पकड़ा, मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद प्रमाण मांगते हुए भेजा नोटिस। 

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा विवाद बढ़ता जा रहा है। मौनी अमावस्या स्नान के दिन उनकी शोभायात्रा

Jan 22, 2026 - 12:03
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प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य विवाद तूल पकड़ा, मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद प्रमाण मांगते हुए भेजा नोटिस। 
प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य विवाद तूल पकड़ा, मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद प्रमाण मांगते हुए भेजा नोटिस। 
  • माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किया नोटिस, ज्योतिषपीठ शंकराचार्य होने का सबूत 24 घंटे में मांगा, सुप्रीम कोर्ट के लंबित मामले का हवाला
  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला अथॉरिटी के नोटिस को अपमानजनक बताया, आठ पन्नों में जवाब भेजा, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा विवाद बढ़ता जा रहा है। मौनी अमावस्या स्नान के दिन उनकी शोभायात्रा पर रोक लगाई गई थी जिसके बाद पुलिस के साथ झड़प हुई। इस घटना के बाद मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया। नोटिस में उनसे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया। प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील संख्या 3010/2020 का हवाला दिया। नोटिस में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में अपील विचाराधीन है और कोई अंतिम आदेश नहीं हुआ है। इसलिए कोई भी व्यक्ति ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य नहीं बन सकता। नोटिस में शिविर बोर्ड पर शंकराचार्य लिखने पर सवाल उठाया गया और 24 घंटे में जवाब मांगा गया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस का जवाब दिया। उनके वकील ने आठ पन्नों में विस्तृत प्रतिवाद भेजा। जवाब में नोटिस को अपमानजनक बताया गया। कहा गया कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बताया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। जवाब में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या का आरोप लगाया गया। नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर, मनमाना और असंवैधानिक बताया गया। अगर नोटिस वापस नहीं लिया गया तो अवमानना और मानहानि का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी गई।

मेला प्राधिकरण का नोटिस मौनी अमावस्या स्नान विवाद के बाद जारी किया गया। स्नान के दौरान शोभायात्रा रोकने पर पुलिस ने बल प्रयोग किया जिससे विवाद बढ़ा। प्राधिकरण ने नियमों का हवाला दिया। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश का जिक्र है। कहा गया कि अपील लंबित होने तक कोई पट्टाभिषेक नहीं हो सकता। शिविर बोर्ड पर शंकराचार्य लिखना कोर्ट आदेश का उल्लंघन बताया गया। प्राधिकरण ने प्रमाण मांगे और जवाब की समय सीमा तय की। यह दूसरा नोटिस था जिसमें शंकराचार्य पद पर सबूत मांगे गए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस को रात में चस्पा करने और वीडियो वायरल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह अपमान है। जवाब में उन्होंने कहा कि उनका पट्टाभिषेक कोर्ट आदेश से पहले हुआ था। उन्होंने प्रशासन पर आस्था में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। वकील ने कहा कि नोटिस दुर्भावनापूर्ण है। स्वामी ने कहा कि वे इतने कमजोर नहीं हैं। विवाद अब कानूनी स्तर पर पहुंच गया है।

यह विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद से जुड़ा है। पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। मेला प्राधिकरण ने कोर्ट आदेश का हवाला देकर कार्रवाई की। नोटिस में स्पष्ट कहा गया कि कोई मान्यता नहीं है। स्वामी ने जवाब में अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने प्रमाण दिए कि वे शंकराचार्य हैं। विवाद माघ मेले की व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है।

मेला प्राधिकरण ने नोटिस के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य उपाधि का उपयोग नियम विरुद्ध है। स्वामी के शिविर में बोर्ड पर यह उपाधि लिखी थी। नोटिस जारी होने के बाद स्वामी ने विरोध जताया। उन्होंने जवाब भेजकर नोटिस वापस लेने की मांग की। अगर नहीं लिया गया तो कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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