प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने की समझौते की अपील। 

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद उत्पन्न

Jan 24, 2026 - 11:44
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प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने की समझौते की अपील। 
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने की समझौते की अपील। 
  • सनातन धर्म का हास-परिहास न होने दें, दोनों पक्ष आपस में बैठकर निकालें बीच का रास्ता: बागेश्वर धाम सरकार
  • मौनी अमावस्या स्नान रोकने के विवाद में नोटिस और धरने के बीच धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का संवाद पर जोर

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ जब शंकराचार्य को संगम नोज पर स्नान के लिए जाने से रोका गया। प्रशासन का कहना था कि संगम नोज पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ होने के कारण वाहन ले जाना संभव नहीं था और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। इस रोक के बाद विवाद बढ़ गया और हाथापाई की स्थिति बन गई। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस घटना के विरोध में धरने पर बैठने का फैसला किया और उनका धरना छह दिनों तक चला। इस दौरान उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई। मेला प्रशासन ने इस घटना के बाद दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में बैरियर तोड़ने का आरोप लगाया गया और दूसरे नोटिस में उनकी संस्था को दी जा रही भूमि तथा सुविधाओं को निरस्त करने की बात कही गई। साथ ही उन्हें सदैव के लिए मेला क्षेत्र में प्रवेश से प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी गई। नोटिस में यह आरोप था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आरक्षित पुल संख्या दो पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए बग्घी पर सवार होकर भीड़ के साथ आगे बढ़ रहे थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दिए गए जवाब में इन आरोपों को निराधार बताया गया और कहा गया कि उनके शिविर या किसी आश्रम में कोई बग्घी नहीं है। इस विवाद ने सनातन परंपराओं की गरिमा पर सवाल उठाए और संत समाज में चर्चा का विषय बना। अब इस मामले पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान आया है जिसमें उन्होंने संवाद का रास्ता अपनाने पर जोर दिया।

माघ मेला प्रयागराज में सनातन धर्म की महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है जहां लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान करते हैं। इस मेले में संत समाज और अखाड़ों की भूमिका प्रमुख होती है। विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। मेला पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोक दिया क्योंकि भीड़ अधिक थी और वाहन प्रतिबंधित थे। इस रोक से विवाद उत्पन्न हुआ और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विरोध में धरना शुरू कर दिया जो छह दिनों तक चला और इस दौरान उनके स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई। मेला प्रशासन ने घटना के बाद कार्रवाई की और दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में बैरियर तोड़ने का आरोप लगाया गया। दूसरे नोटिस में संस्था की भूमि और सुविधाएं निरस्त करने तथा मेले में प्रवेश प्रतिबंधित करने की बात कही गई। नोटिस में विवरण दिया गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बग्घी पर सवार होकर बैरियर तोड़ रहे थे जबकि केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब में कहा कि आरोप दुर्भावनापूर्ण हैं और उनके पास कोई बग्घी नहीं है। इस विवाद से श्रद्धालुओं में भ्रम पैदा हुआ। अब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बयान दिया कि विवाद की पूरी जानकारी नहीं है लेकिन सनातन का उपहास नहीं होना चाहिए।

बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस विवाद पर अपना बयान राजस्थान के कोटा में एक कथा के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में शंकराचार्य के साथ हुई घटना की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है क्योंकि वे स्वयं वहां नहीं जा सके। लेकिन उन्होंने जो कुछ देखा और सुना उसके आधार पर बयान दिया। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इस विवाद में दोनों पक्ष सनातनी हैं और अपने ही लोग हैं। इसलिए टकराव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि दोनों पक्ष आपस में बैठकर समझौता करें और बीच का रास्ता निकालें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म की परंपरा संवाद, सहमति और समन्वय पर आधारित है। किसी विवाद को सार्वजनिक टकराव का रूप देना न धर्म के हित में है और न समाज के। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इस पूरे मामले में जो हास्य-परिहास हो रहा है वह ठीक नहीं है और इससे किसी को कोई लाभ नहीं होने वाला। उन्होंने जोर दिया कि सनातन का हंसी-मजाक बनाने से कोई फायदा नहीं है। सनातन धर्म की शक्ति उसकी एकता में है और अगर आपस में उलझेंगे तो विरोधी लाभ उठाएंगे। सनातन धर्म पूजा-पाठ नहीं बल्कि मर्यादा, सहिष्णुता और आपसी सम्मान की परंपरा है।

प्रयागराज माघ मेले में विवाद की पृष्ठभूमि सनातन परंपराओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच समन्वय की कमी से जुड़ी है। मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रोका गया क्योंकि भीड़ अधिक थी और वाहन नहीं ले जा सकते थे। विवाद बढ़ा और हाथापाई हुई। स्वामी ने धरना दिया जो छह दिन चला और स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। प्रशासन ने दो नोटिस जारी किए जिसमें बैरियर तोड़ने का आरोप था और संस्था की सुविधाएं निरस्त करने की धमकी दी गई। स्वामी ने जवाब में आरोपों को निराधार बताया। धीरेंद्र शास्त्री ने बयान में कहा कि विवाद से सनातन का उपहास नहीं होना चाहिए। दोनों पक्ष सनातनी हैं इसलिए समझौता करें।

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