Entertainment: डिंडीगुल में 'कांतारा चैप्टर 1' की स्क्रीनिंग के बाद दैवा वेश में फैन की अनोखी एंट्री, दर्शक हैरान।

तमिलनाडु के डिंडीगुल शहर में रिशब शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'कांतारा: चैप्टर 1' की स्क्रीनिंग के बाद एक फैन ने दर्शकों को चौंका दिया। फिल्म समाप्त होने के तुरंत बाद एक युवक पारंपरिक दैवा

Oct 7, 2025 - 15:19
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Entertainment: डिंडीगुल में 'कांतारा चैप्टर 1' की स्क्रीनिंग के बाद दैवा वेश में फैन की अनोखी एंट्री, दर्शक हैरान।
डिंडीगुल में 'कांतारा चैप्टर 1' की स्क्रीनिंग के बाद दैवा वेश में फैन की अनोखी एंट्री, दर्शक हैरान।

तमिलनाडु के डिंडीगुल शहर में रिशब शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'कांतारा: चैप्टर 1' की स्क्रीनिंग के बाद एक फैन ने दर्शकों को चौंका दिया। फिल्म समाप्त होने के तुरंत बाद एक युवक पारंपरिक दैवा वेशभूषा में सिनेमाहाल में प्रवेश कर गया। वह पंजुरली दैवा की तरह सजा हुआ था, जिसमें लकड़ी का मुखौटा, रंग-बिरंगे कपड़े, चेहरे पर चित्रकारी और पारंपरिक आभूषण थे। यह दृश्य इतना प्रभावशाली था कि दर्शक तालियों और चीखों से गूंज उठे। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, लेकिन साथ ही यह विवादों का केंद्र भी बन गया। कुछ ने इसे फिल्म के प्रति समर्पण की मिसाल बताया, तो कईयों ने इसे सांस्कृतिक परंपराओं का अपमान करार दिया। यह घटना फिल्म के सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाती है, जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित कर रही है।

घटना डिंडीगुल के उमा राजेंद्रा थिएटर में हुई। फिल्म 2 अक्टूबर 2025 को दशहरा के अवसर पर रिलीज हुई थी। यह कन्नड़ सिनेमा की पहली फिल्मों में से एक है, जो पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज हुई। डिंडीगुल में देर रात का शो समाप्त होने के बाद दर्शक बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे। तभी सिनेमाहाल के दरवाजे से एक आकृति प्रकट हुई। वह दैवा की पारंपरिक वेशभूषा में था, जो तुलुनाडु क्षेत्र की लोक परंपराओं से प्रेरित है। फैन ने फिल्म के प्रसिद्ध दृश्य की नकल की, जहां दैवा का आगमन होता है। वह नाचते-गाते आगे बढ़ा, दर्शकों के बीच घूमा और ऊर्जा से भरपूर अंदाज में अभिनय किया। सिक्योरिटी गार्ड ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन दर्शकों के उत्साह के आगे वह असफल रहा। पूरा वीडियो करीब 30 सेकंड का है, जिसमें दर्शक मोबाइल फोन निकालकर रिकॉर्डिंग करते दिखते हैं।

फैन की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय मीडिया के अनुसार वह डिंडीगुल का ही निवासी है। वह फिल्म का दीवाना है और 'कांतारा' फ्रेंचाइजी का पुराना प्रशंसक। मूल 'कांतारा' (2022) ने रिशब शेट्टी को राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया था। चैप्टर 1 इसकी प्रीक्वल है, जो कदंब काल (11वीं शताब्दी) की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में कांतारा के जंगलों और बंग्रा राज्य के बीच संघर्ष, भूत कोला रीति-रिवाज और दैवा पूजा को चित्रित किया गया है। पंजुरली दैवा एक भैंस देवता है, जो तुलु समुदाय की आस्था का प्रतीक है। फैन ने ठीक वैसा ही वेश धारण किया था, जैसे फिल्म में रिशब शेट्टी का किरदार। दर्शकों ने इसे 'गूजबंप्स मोमेंट' कहा, लेकिन कुछ ने चेतावनी दी कि ऐसी नकल परंपराओं को हल्का कर सकती है। थिएटर मैनेजमेंट ने कहा कि यह अनियोजित था, लेकिन फिल्म के प्रचार के लिए सकारात्मक रहा।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बहस छिड़ गई। ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा, 'डिंडीगुल में कांतारा चैप्टर 1 के बाद दैवा वेश में फैन का प्रवेश। सच्चा समर्पण!' वहीं, दूसरे ने कहा, 'यह दिव्य क्षण नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का मजाक है। दैवा वेश केवल वर्षों की साधना वाले ही धारण कर सकते हैं।' तुलुनाडु के कुछ लोगों ने विरोध जताया, क्योंकि भूत कोला एक पवित्र अनुष्ठान है, न कि कॉस्ट्यूम पार्टी। एक टिप्पणी में लिखा गया, 'फिल्म देखकर उत्साहित होना ठीक, लेकिन परंपरा का अपमान न करें।' हालांकि, कई प्रशंसकों ने इसे सराहा। उन्होंने कहा कि यह फिल्म की ताकत दिखाता है, जो दर्शकों को परंपराओं से जोड़ रही है। वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं और यह ट्रेंडिंग में शामिल हो गया।

'कांतारा: चैप्टर 1' की रिलीज के बाद से फैन उत्साह की कई घटनाएं सामने आई हैं। बेंगलुरु में एक फैन ने थिएटर के बाहर दैवा के आगमन का अभिनय किया, जो वायरल हुआ। फिल्म ने दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि वे सिनेमाहाल से बाहर निकलते हुए भी भावुक हो जाते हैं। रिशब शेट्टी ने एक इंटरव्यू में कहा, 'फिल्म का उद्देश्य परंपराओं को जीवंत करना है, न कि उनका मजाक उड़ाना।' निर्देशक ने तुलु संस्कृति पर शोध किया और स्थानीय कलाकारों को शामिल किया। फिल्म में रुकमिणी वसंत, जयराम, गुलशन देवैया जैसे सितारे हैं। यह कन्नड़, हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली और अंग्रेजी में रिलीज हुई। बॉक्स ऑफिस पर यह धमाल मचा रही है। पहले दिन 90 करोड़, तीन दिनों में 200 करोड़ और चार दिनों में 223 करोड़ से अधिक कमाई हो चुकी है। दशहरा वीकेंड ने इसे बूस्ट दिया।

फिल्म की कहानी 1000 साल पुरानी है। यह कदंब राजवंश के समय की है, जहां कांतारा के आदिवासी क्षेत्र और बंग्रा राज्य के बीच दुश्मनी है। कुलशेखर, उनके पिता विजयेंद्र और बहन कनकावती के इर्द-गिर्द घूमती है। भूत कोला और दैवा पूजा के दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी फिल्में सिनेमा को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती हैं। लेकिन फैन की हरकत ने सवाल उठाए कि उत्साह की सीमा क्या होनी चाहिए। सांस्कृतिक इतिहासकार ने कहा, 'दैवा वेश केवल पुजारी धारण करते हैं। सिनेमा से प्रेरणा लेना अच्छा, लेकिन सम्मान बनाए रखें।' तुलुनाडु में कुछ संगठनों ने फिल्म का विरोध किया था, लेकिन अब यह वैश्विक हिट है।

इस घटना ने 'कांतारा' फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। मूल फिल्म ने 400 करोड़ कमाए थे, बजट सिर्फ 15 करोड़। चैप्टर 1 होमबेल फिल्म्स के बैनर पर बनी है। रिशब शेट्टी ने इसे लिखा, निर्देशित किया और मुख्य भूमिका निभाई। दर्शकों ने दृश्यों की तारीफ की, खासकर दैवा के आगमन वाले सीन की। डिंडीगुल जैसे छोटे शहरों में भी पैक्ड हाउस रहा। थिएटर मालिकों ने बताया कि तमिलनाडु में कन्नड़ फिल्म का यह रिस्पॉन्स दुर्लभ है। फिल्म ने सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी जैसे बॉलीवुड रिलीज को टक्कर दी। आलोचकों ने इसे विजुअल्स और स्टोरीटेलिंग के लिए सराहा। लेकिन विवाद ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। कुछ ने कहा, 'फिल्म संस्कृति को बढ़ावा दे रही है।' अन्यों ने चेताया, 'मजाक न बनाएं।'

डिंडीगुल की यह घटना सिनेमा के प्रभाव को दिखाती है। दर्शक न केवल देखते हैं, बल्कि जीते हैं। लेकिन सतर्कता जरूरी है। तुलु परंपराओं में दैवा पूजा गंभीर है, जो वर्षों की तैयारी मांगती है। फैन का इरादा शायद प्रशंसा का था, लेकिन कुछ को ठेस पहुंची। रिशब शेट्टी ने ट्वीट किया, 'फिल्म का संदेश एकता है। सभी की भावनाओं का सम्मान करें।' यह वीडियो अब फिल्म के प्रमोशन का हिस्सा बन गया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म 300 करोड़ के करीब पहुंच रही है। दक्षिण भारत में तो यह सुपरहिट है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में कन्नड़ सिनेमा की पैठ बढ़ रही है। उम्मीद है कि ऐसी घटनाएं सकारात्मक चर्चा को बढ़ावा देंगी। सिनेमा और संस्कृति का यह मेल भविष्य में और मजबूत होगा। दर्शकों को सलाह है कि उत्साह में परंपराओं का अपमान न करें। 'कांतारा: चैप्टर 1' न केवल मनोरंजन, बल्कि आस्था का प्रतीक बन गई है।

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