बलिया में डॉक्टर की गुंडागर्दी: मरीज को देरी के सवाल पर बाउंसरों संग पीटा, वायरल वीडियो से हंगामा।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीज को डॉक्टर और उसके बाउंसरों ने बुरी तरह पीट दिया। मामला सहर
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीज को डॉक्टर और उसके बाउंसरों ने बुरी तरह पीट दिया। मामला सहर कोतवाली क्षेत्र के माल्देपुर स्थित सूरज ईएनटी अस्पताल का है। मरीज ने डॉक्टर के आने में हो रही देरी का समय पूछा था, जिस पर गुस्साए डॉक्टर ने उसे इलाज के बहाने चैंबर में बुलाया और फिर बेसमेंट में ले जाकर बाउंसरों के साथ मिलकर पिटाई की। यह पूरी घटना किसी ने मोबाइल पर रिकॉर्ड कर ली और सोशल मीडिया पर डाल दी। वीडियो तेजी से वायरल हो गया, जिससे लोगों में डॉक्टरों की जिम्मेदारी और अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
घटना 6 अक्टूबर 2025 को दोपहर करीब 2 बजे की बताई जा रही है। पीड़ित मरीज का नाम रामू (काल्पनिक नाम, गोपनीयता के लिए) है, जो बलिया के एक गांव से कान-नाक-गले की समस्या के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था। उसके साथ पत्नी और एक रिश्तेदार भी थे। अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार लगी हुई थी। डॉक्टर सूरज कुमार (नाम स्रोतों से) समय पर नहीं पहुंचे थे। घंटों इंतजार के बाद रामू ने स्टाफ से पूछा कि डॉक्टर कब आएंगे। स्टाफ ने कहा कि अभी कुछ देर और लगेगी। लेकिन रामू ने जिद की, तो स्टाफ ने डॉक्टर को फोन कर दिया। कुछ देर बाद डॉक्टर पहुंचे।
डॉक्टर ने रामू को इलाज के बहाने अपने चैंबर में बुलाया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि चैंबर के बाहर रामू की पत्नी खड़ी है और अंदर से चीखने की आवाज आ रही है। डॉक्टर ने रामू को बेसमेंट की ओर ले जाकर अपने दो बाउंसरों को बुला लिया। वहां रामू को घूंसे-चांटे बरसाए गए। एक बाउंसर ने रामू को जमीन पर गिरा दिया, जबकि दूसरा पैरों से लातें मार रहा था। डॉक्टर खुद भी हाथापाई में शामिल था। रामू चिल्ला रहा था, लेकिन कोई मदद न पहुंची। इस दौरान रामू की पत्नी ने दरवाजे पर दस्तक दी और मदद मांगी, लेकिन बाउंसरों ने उसे धक्का देकर हटा दिया। पूरी पिटाई करीब 5 मिनट चली। रामू को चोटें आईं, सिर पर सूजन और होंठ फट गए।
वीडियो में पिटाई का एक हिस्सा कैद हुआ है। यह बेसमेंट का फुटेज है, जहां रोशनी कम है, लेकिन मारपीट साफ दिख रही है। रामू की पत्नी ने बाहर से ही कुछ सेकंड रिकॉर्ड किया। वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर अपलोड होते ही वायरल हो गया। अब तक लाखों व्यूज हो चुके हैं। लोगों ने इसे शेयर कर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को टैग किया। एक यूजर ने लिखा कि डॉक्टर मरीज की सेवा करने वाले होते हैं, गुंडे नहीं। दूसरे ने कहा कि निजी अस्पतालों में ऐसी गुंडागर्दी आम हो गई है। कई यूजर्स ने डॉक्टर को गिरफ्तार करने की मांग की। विपक्षी नेता भी इसे उठा रहे हैं, कह रहे हैं कि यूपी में स्वास्थ्य सेवाएं जर्जर हो चुकी हैं।
बलिया पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद तुरंत संज्ञान लिया। सहर कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया। आईपीसी की धारा 323 (मारपीट), 504 (अपमान) और 506 (धमकी) के तहत केस दर्ज हुआ। डॉक्टर सूरज कुमार और दो बाउंसरों की तलाश जारी है। पुलिस ने अस्पताल पर छापा मारा, लेकिन डॉक्टर फरार हो चुके थे। सीओ सहर ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जल्द गिरफ्तारी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच टीम भेजी है। सीएमओ बलिया ने कहा कि अगर लापरवाही साबित हुई, तो अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। डॉक्टर पर मेडिकल काउंसिल में भी शिकायत दर्ज होगी।
यह पहली बार नहीं है जब बलिया या यूपी के अस्पतालों से ऐसी खबरें आई हों। कुछ महीने पहले ही बलिया जिला अस्पताल में बिजली कटने से टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज होने का वीडियो वायरल हुआ था। वहां आपातकालीन वार्ड में इन्वर्टर लगाने पड़े। इसी तरह, 2022 में चिलकहर ब्लॉक के एक पीएचसी में मरीज को ठेले पर लाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद सीएमओ ने जांच कराई। मध्य प्रदेश के बैतूल में सितंबर 2025 में एक डॉक्टर ने मरीज के परिजन को पीट दिया, जिसका वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर का फोन बंद हो गया। इंदौर के एमवाई अस्पताल में 2023 में जूनियर डॉक्टर ने एचआईवी मरीज को थप्पड़ मारे, जिसके बाद निलंबन हो गया। बक्सर सदर अस्पताल में 2022 में मरीजों ने लैब टेक्नीशियन को पीटा। ये घटनाएं दिखाती हैं कि अस्पतालों में तनाव और हिंसा बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों पर काम का बोझ ज्यादा है। निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या के हिसाब से स्टाफ कम होता है, जिससे झगड़े होते हैं। लेकिन हिंसा का कोई औचित्य नहीं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने ऐसी घटनाओं पर चिंता जताई है। वे कहते हैं कि मरीजों को जागरूक होना चाहिए कि सवाल पूछना उनका अधिकार है। सरकार ने भी हेल्पलाइन नंबर 108 शुरू किया है, ताकि शिकायतें तुरंत सुनी जाएं। बलिया जैसे ग्रामीण इलाकों में निजी अस्पतालों पर निर्भरता ज्यादा है, क्योंकि सरकारी सुविधाएं कम हैं। यहां चिकित्सा शिक्षा और जागरूकता की कमी से समस्याएं बढ़ती हैं।
बलिया जिला गंगा नदी के किनारे बसा है, जहां कृषि और छोटे कारोबार प्रमुख हैं। सहर तहसील में माल्देपुर एक व्यस्त बाजार है, जहां सूरज ईएनटी अस्पताल कान-नाक-गले के मरीजों के लिए जाना जाता है। लेकिन यह घटना अस्पताल की साख खराब कर रही है। स्थानीय लोग कहते हैं कि डॉक्टर अक्सर देर से आते हैं, जिससे मरीज परेशान होते हैं। रामू के गांव वालों ने कहा कि वे अब सरकारी अस्पताल ही चुनेंगे। पीड़ित परिवार ने बताया कि रामू को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर है। पत्नी ने कहा कि वे न्याय चाहते हैं, ताकि दूसरे मरीजों के साथ ऐसा न हो।
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