लखनऊ में भाईचारे की मिसाल: प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के लिए मुस्लिम समाज ने दादा मियां दरगाह पर चढ़ाई चादर। 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने एक बार फिर सांप्रदायिक सद्भाव की अनोखी मिसाल पेश की है। यहां मॉल एवेन्यू स्थित दादा मियां दरगाह पर मुस्लिम समाज के लोगों ने वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद

Oct 15, 2025 - 11:48
 0  35
लखनऊ में भाईचारे की मिसाल: प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के लिए मुस्लिम समाज ने दादा मियां दरगाह पर चढ़ाई चादर। 
लखनऊ में भाईचारे की मिसाल: प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के लिए मुस्लिम समाज ने दादा मियां दरगाह पर चढ़ाई चादर। 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने एक बार फिर सांप्रदायिक सद्भाव की अनोखी मिसाल पेश की है। यहां मॉल एवेन्यू स्थित दादा मियां दरगाह पर मुस्लिम समाज के लोगों ने वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए चादर चढ़ाई और विशेष दुआ की। यह घटना मंगलवार को हुई, जब समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद इखलाक ने दरगाह पर चादर चढ़ाकर प्रेमानंद महाराज की लंबी आयु और जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की। दरगाह पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और सभी ने आपसी भाईचारे, शांति तथा एकता का संदेश दिया। यह पहल न केवल धार्मिक सौहार्द को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मानवता और इंसानियत किसी धर्म की सीमा में बंधी नहीं होती।

प्रेमानंद महाराज वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम के प्रमुख हैं। वे राधावल्लभ संप्रदाय के एक प्रमुख संत हैं, जो भक्ति मार्ग पर चलने वाले लाखों भक्तों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। वे 2006 से पॉलीसिस्टिक किडनी रोग से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। हाल ही में उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिससे पूरे देश में उनके भक्त चिंतित हो गए। आश्रम ने स्पष्ट किया कि महाराज जी का स्वास्थ्य स्थिर है और वे भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, लेकिन फिर भी दुआओं और प्रार्थनाओं का सिलसिला जारी है। मंगलवार को ही वृंदावन में भक्तों को दर्शन देते हुए उन्होंने कहा कि कष्ट है, लेकिन श्री जी की कृपा से सब ठीक है। आप सब प्रसन्न रहें और नाम जपते रहें।

दादा मियां दरगाह लखनऊ की एक ऐतिहासिक धरोहर है। यह ख्वाजा मोहम्मद नबी रजा शाह की याद में बनाई गई है, जो एक सूफी संत थे। वे 1867 में जन्मे और 1911 में चल बसे। उनकी दरगाह गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों आते हैं। दरगाह का उर्स हर साल रबीउल अव्वल के 23 से 27 तक मनाया जाता है। इस जगह पर चादर चढ़ाना एक पारंपरिक तरीका है, जिसमें लोग अपनी मनोकामना पूरी करने या किसी के लिए दुआ मांगते हैं। मंगलवार को जब मोहम्मद इखलाक ने चादर चढ़ाई, तो उनके हाथ में प्रेमानंद महाराज की तस्वीर थी। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज जैसे संत समाज को जोड़ते हैं। वे हमेशा इंसानियत और मानवता का पैगाम देते हैं। कौन हिंदू, कौन मुस्लिम? तू पढ़ ले मेरी गीता, मैं पढ़ लूं तेरा कुरान। हम समाज में नफरत की खाई पर पुल बनाने का काम कर रहे हैं। दुआ मांगने वालों को धमकी देने वाले मानसिक रूप से बीमार हैं।

इस कार्यक्रम में दरगाह के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने मिलकर दुआ पढ़ी और अल्लाह से प्रार्थना की कि संत जल्द स्वस्थ हों और समाज सेवा में लगें। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि प्रेमानंद महाराज के प्रवचन हम सब सुनते हैं। वे कहते हैं कि भगवान सबके हैं। ऐसे संतों के लिए दुआ करना हमारा फर्ज है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि इंसानियत सबसे ऊपर है। चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, बीमारी सबको सताती है। हमारी दुआ है कि वे लंबे समय तक हमें मार्गदर्शन देते रहें। दरगाह पर माहौल शांतिपूर्ण था। लोग एक-दूसरे को गले लगाते नजर आए। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जहां हजारों लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया।

यह घटना अकेली नहीं है। प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के लिए दुआओं का दौर देशभर में चल रहा है। अजमेर शरीफ दरगाह में ख्वाजा गरीब नवाज के खुद्दामों ने विशेष दुआ की। चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि हमने प्रार्थना की कि ऊपरवाला उन्हें लंबी जिंदगी दे। वे सेवा और साधना करें। वे एकता का पैगाम देते हैं। मक्का-मदीना से भी एक वायरल वीडियो आया, जिसमें प्रयागराज के मुस्लिम युवक सुफियान ने खिजरा के दौरान दुआ मांगी। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज नेक इंसान हैं। हम भारत से हैं और उन्हें पसंद करते हैं। अल्लाह उन्हें सेहत दें। इस वीडियो को देखकर उनके पिता मोहम्मद फिरोज ने कहा कि यह गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। हम उनके प्रवचन यूट्यूब पर सुनते हैं। लेकिन कुछ कट्टरपंथी लोगों ने सुफियान को धमकी भी दी, जिसकी निंदा हो रही है।

वृंदावन में हिंदू भक्त मंदिरों में हवन-यज्ञ कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा हुई। आश्रम से संदेश आया कि महाराज जी भावुक होकर बोले, कष्ट तो है, लेकिन कृपा बहुत है। जल्द मिलेंगे। उनके अनुयायी बताते हैं कि 4 अक्टूबर से पदयात्रा अस्थायी रूप से रुकी है, ताकि आराम मिले। लेकिन भक्तों की चिंता कम नहीं हो रही। एक भक्त ने कहा कि महाराज जी कहते हैं कि भगवान मां-पिता दोनों हैं। विश्वास रखो, सब ठीक हो जाएगा।

यह सिलसिला समाज को एकजुट कर रहा है। भारतीय चिकित्सा संघ या अन्य संगठनों ने भी समर्थन दिया। लखनऊ के स्थानीय लोग कहते हैं कि ऐसी घटनाएं नफरत फैलाने वालों को जवाब हैं। समाजवादी पार्टी ने इसे अपनी पहल बताया। मोहम्मद इखलाक ने कहा कि आगे भी दुआ करते रहेंगे। दरगाह के सज्जादानशीं ने आशीर्वाद दिया। पूरे शहर में चर्चा है कि लखनऊ हमेशा से तहजीब का शहर रहा है। यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की कई कहानियां हैं।

प्रेमानंद महाराज का जीवन भक्ति से भरा है। वे ब्राह्मण परिवार से हैं। बचपन से ही भगवान के प्रति समर्पित। उनके प्रवचन में राधा-कृष्ण की लीला का वर्णन होता है। वे कहते हैं कि नाम जपो, प्रसन्न रहो। उनकी पदयात्राएं देशभर में लाखों को जोड़ती हैं। स्वास्थ्य समस्या के बावजूद वे भक्तों को प्रेरित करते हैं। एक वीडियो में वे बोले, यह देह अस्थायी है, आत्मा अमर।

Also Read- ईपीएफओ की नई नीति: बेरोजगारी में दो महीने बाद निकालें पूरा पीएफ बैलेंस, ऑनलाइन प्रक्रिया बनी आसान।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow