श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की MBBS मान्यता रद्द, कमियों के चलते NMC का बड़ा फैसला, छात्रों को अन्य कॉलेजों में मिलेगी जगह।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) पर बड़ा
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) पर बड़ा एक्शन लिया है। NMC की मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने कॉलेज को MBBS कोर्स चलाने की दी गई लेटर ऑफ परमिशन (LoP) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। यह कार्रवाई शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए की गई है और कॉलेज को दी गई 50 MBBS सीटों की अनुमति रद्द कर दी गई है। कॉलेज ने NMC की 5 दिसंबर 2024 और 19 दिसंबर 2024 को जारी सार्वजनिक सूचनाओं के तहत 2025-26 सत्र के लिए 50 MBBS सीटों वाले नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवेदन किया था। आवेदन की जांच, दस्तावेजों की स्क्रूटनी और विशेषज्ञों द्वारा फिजिकल इंस्पेक्शन के बाद MARB ने 8 सितंबर 2025 को MBBS कोर्स शुरू करने की लेटर ऑफ परमिशन जारी की थी। इसके आधार पर कॉलेज में काउंसलिंग के जरिए छात्रों के दाखिले भी हो गए थे। हालांकि, 2 जनवरी 2026 को हुई एक सरप्राइज इंस्पेक्शन में कॉलेज में न्यूनतम मानकों का पालन न करने की गंभीर कमियां पाई गईं।
इंस्पेक्शन में फैकल्टी की कमी, क्लिनिकल मटेरियल की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी, मरीजों की अपर्याप्त संख्या, सामान्य बेडों की कमी, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों का अभाव, लेक्चर थिएटर का मानकों पर खरा न उतरना, लाइब्रेरी में अपेक्षित किताबों और जर्नल्स की कमी, ART सेंटर और MDR-TB सुविधाओं का अभाव, अलग-अलग वार्डों की कमी, केवल दो कार्यरत ऑपरेशन थिएटर जबकि अपेक्षित पांच थे, OPD में छोटा OT न होना जैसी कई गंभीर खामियां सामने आईं। इन कमियों के चलते MARB ने पाया कि कॉलेज की स्थिति ऐसी है कि यहां जारी रहने से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती और छात्रों के शैक्षणिक हितों को नुकसान पहुंचता। इसलिए NMC के चेयरमैन की मंजूरी से लेटर ऑफ परमिशन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही कॉलेज द्वारा जमा की गई परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को भी जब्त करने का निर्णय लिया गया है।
NMC ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इस फैसले से छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी। 2025-26 सत्र के लिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में दाखिला ले चुके सभी छात्रों को जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र के अन्य मेडिकल संस्थानों में सुपरन्यूमेरी सीटों पर समायोजित किया जाएगा। यह काम संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के सक्षम प्राधिकारी द्वारा लागू मानकों के अनुसार किया जाएगा। इसका मतलब है कि किसी भी दाखिला प्राप्त छात्र को अपनी MBBS सीट नहीं गंवानी पड़ेगी और उन्हें नियमित स्वीकृत सीटों से अधिक अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। कॉलेज काकरयाल, रियासी में स्थित है और यह श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से जुड़ा हुआ है। यह कॉलेज जम्मू-कश्मीर में नया मेडिकल संस्थान है और इस सत्र में इसकी पहली MBBS बैच थी।
सरप्राइज इंस्पेक्शन के दौरान कई शिकायतें प्राप्त होने के बाद यह जांच की गई थी। NMC ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में संस्थान का जारी रहना मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से खतरे में डालता और छात्रों के हितों को प्रभावित करता। इसलिए यह कदम उठाया गया। आदेश 6 जनवरी 2026 को जारी किया गया और यह तत्काल प्रभावी है। जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में 13 मेडिकल कॉलेज हैं और इस फैसले से छात्रों को अन्य सरकारी या मान्यता प्राप्त कॉलेजों में स्थान मिलेगा। कॉलेज में दाखिले NEET मेरिट के आधार पर हुए थे और 85 प्रतिशत सीटें डोमिसाइल उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थीं।
NMC की इस कार्रवाई से नए मेडिकल कॉलेजों में मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का संदेश गया है। सरप्राइज इंस्पेक्शन में पाई गई कमियां जैसे फैकल्टी की कमी और क्लिनिकल सुविधाओं का अभाव नए कॉलेजों के लिए आम चुनौती रही हैं, लेकिन यहां ये कमियां इतनी गंभीर थीं कि अनुमति रद्द करना जरूरी हो गया। छात्रों के स्थानांतरण की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है ताकि उनका सत्र प्रभावित न हो। कॉलेज को पहले दी गई अनुमति अब पूरी तरह वापस ले ली गई है और अगले सत्र तक कोई नई MBBS बैच नहीं होगी जब तक कमियां दूर न कर ली जाएं। यह घटना मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियामक की सतर्कता को दर्शाती है। NMC ने सभी संबंधित पक्षों को इस आदेश की जानकारी दे दी है और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन को छात्रों के समायोजन की जिम्मेदारी सौंपी है। इस तरह कॉलेज की 50 सीटों की अनुमति रद्द होने से क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा की व्यवस्था पर असर पड़ेगा, लेकिन छात्रों की पढ़ाई जारी रहेगी।
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