चिदबरम का तीखा प्रहार: तालिबानी मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं को रोके जाने पर पुरुष पत्रकारों को बाहर जाना चाहिए था।

नई दिल्ली में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। 10 अक्टूबर 2025 को अफगानिस्तान दूतावास में आयोजित

Oct 11, 2025 - 13:36
 0  38
चिदबरम का तीखा प्रहार: तालिबानी मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं को रोके जाने पर पुरुष पत्रकारों को बाहर जाना चाहिए था।
चिदबरम का तीखा प्रहार: तालिबानी मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं को रोके जाने पर पुरुष पत्रकारों को बाहर जाना चाहिए था।

नई दिल्ली में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। 10 अक्टूबर 2025 को अफगानिस्तान दूतावास में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय महिला पत्रकारों को प्रवेश नहीं दिया गया। तालिबान की ओर से तय किए गए नियमों के तहत केवल पुरुष पत्रकारों को ही आमंत्रित किया गया। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि महिलाओं को बाहर रखे जाने पर पुरुष पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ देनी चाहिए थी। चिदंबरम ने इसे शॉकिंग बताया और कहा कि यह तालिबान की महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण नीतियों का भारतीय मिट्टी पर खुला प्रदर्शन है।

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मुत्तकी की सात दिवसीय भारत यात्रा का हिस्सा थी, जो 9 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक चल रही है। मुत्तकी ने 10 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इसके बाद दूतावास में आयोजित कार्यक्रम में भारत-अफगानिस्तान संबंधों, मानवीय सहायता, व्यापार मार्गों और सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन जब महिला पत्रकारों को प्रवेश से रोका गया, तो सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। कई महिला पत्रकारों ने बताया कि वे ड्रेस कोड का पालन कर रही थीं, फिर भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। दूतावास ने कहा कि आमंत्रण सूची तालिबान अधिकारियों ने तैयार की थी, जिसमें महिलाओं के नाम शामिल नहीं थे।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस प्रेस इंटरैक्शन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। प्रवक्ता ने कहा कि यह अफगान दूतावास का आंतरिक कार्यक्रम था। भारत ने अफगान पक्ष से सुझाव दिया था कि महिला पत्रकारों को भी शामिल किया जाए, लेकिन तालिबान ने इसे स्वीकार नहीं किया। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारत महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करता है और तालिबान की नीतियों की आलोचना करता रहा है। लेकिन विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। चिदंबरम ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, मैं स्तब्ध हूं कि अफगानिस्तान के श्री आमिर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिलाओं को बाहर रखा गया। मेरी राय में, पुरुष पत्रकारों को बाहर जाना चाहिए था जब उन्हें पता चला कि उनकी महिला सहयोगी शामिल नहीं हैं।

चिदंबरम की प्रतिक्रिया ने पूरे राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी। उन्होंने इसे न केवल पत्रकारिता के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया, बल्कि महिलाओं की गरिमा पर सीधा हमला भी कहा। पूर्व गृह मंत्री के रूप में चिदंबरम ने हमेशा मानवाधिकारों और लैंगिक समानता पर जोर दिया है। इस घटना ने उन्हें पुरानी यादें ताजा कर दीं, जब वे यूपीए सरकार में थे। तब भारत ने अफगानिस्तान को सहायता दी थी, लेकिन तालिबान के उदय के बाद नीति में सतर्कता बरती गई। चिदंबरम ने कहा कि भले ही भू-राजनीतिक मजबूरियां हों, लेकिन तालिबान के पुरातन और भेदभावपूर्ण रीति-रिवाजों को स्वीकार करना गलत है।

विपक्ष के अन्य नेता भी मैदान में उतर आए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने एक्स पर लिखा, प्रधानमंत्री जी, कृपया स्पष्ट करें कि तालिबान प्रतिनिधि की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को क्यों हटाया गया। अगर महिलाओं के अधिकारों की मान्यता केवल चुनावी दिखावा है, तो भारत की इन सक्षम महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया गया, जो देश की रीढ़ हैं। प्रियंका ने कहा कि यह भारतीय महिलाओं का अपमान है। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने सरकार को कायरों का समूह कहा। उन्होंने लिखा, सरकार ने तालिबान मंत्री को महिला पत्रकारों को बाहर करने की अनुमति देकर हर भारतीय महिला का अपमान किया। यह शर्मनाक है।

कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने विदेश मंत्री एस जयशंकर पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, तालिबान से जुड़ाव की भू-राजनीतिक मजबूरियां समझ में आती हैं, लेकिन उनके भेदभावपूर्ण और पिछड़े रिवाजों को मान लेना हास्यास्पद है। विदेश मंत्रालय और जयशंकर का यह रवैया निराशाजनक है कि उन्होंने तालिबान मंत्री की प्रेस ब्रिफिंग से महिलाओं को बाहर किया। कार्ति ने इसे प्राचीन मान्यताओं का नाम दिया और कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसा स्वीकार नहीं। कांग्रेस प्रवक्ता शामा मोहम्मद ने पूछा, क्या यह सच है कि तालिबान विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं को उनकी मर्जी से बाहर किया गया। उन्होंने कहा कि हमारे देश की मिट्टी पर वे शर्तें थोपें, यह बर्दाश्त नहीं। मोदी और जयशंकर पर शर्मिंदगी का ठीकरा फोड़ा।

यह विवाद तालिबान की महिलाओं के प्रति नीतियों को फिर से सुर्खियों में ला दिया। 2021 में सत्ता में आने के बाद तालिबान ने महिलाओं पर सख्त पाबंदियां लगाईं। लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा से वंचित रखा गया। महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर बिना महरम के जाने की मनाही है। नौकरियों और मीडिया में उनकी भागीदारी सीमित कर दी गई। संयुक्त राष्ट्र ने इसे दुनिया का सबसे बुरा महिला अधिकार संकट कहा। जुलाई 2025 में यूएन ने तालिबान से नीतियां बदलने की अपील की। लेकिन तालिबान ने इन आलोचनाओं को खारिज किया। मुत्तकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अफगान महिलाओं की स्थिति पर सवाल टाल दिया। उन्होंने कहा कि यह आंतरिक मामला है।

भारत ने तालिबान शासन को कभी मान्यता नहीं दी। लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संपर्क बनाए रखा। मुत्तकी की यात्रा स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाओं पर चर्चा के लिए थी। भारत ने अफगानिस्तान को 5 लाख टन गेहूं, दवाएं और छात्रवृत्तियां दी हैं। लेकिन तालिबान की नीतियां भारत के मूल्यों के विरुद्ध हैं। विपक्ष ने कहा कि सरकार ने तालिबान को पूर्ण प्रोटोकॉल दिया, जो गलत है। महुआ मोइत्रा ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने तालिबान मंत्री के लिए लाल कालीन बिछाई, लेकिन महिलाओं के सम्मान को कुचला। प्रियंका गांधी ने इसे चुनावी दिखावा कहा।

मीडिया जगत में भी नाराजगी है। कई महिला पत्रकारों ने कहा कि यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है। पुरुष सहकर्मियों ने समर्थन जताया, लेकिन चिदंबरम की बात पर सहमति जताई कि बाहर जाना चाहिए था। पत्रकार संगठनों ने विदेश मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा। कहा कि दूतावासों के कार्यक्रमों में लैंगिक समानता सुनिश्चित हो। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। बीबीसी और अल जजीरा ने इसे कवर किया। कहा कि भारत में तालिबान का यह कदम महिलाओं के अधिकारों पर सवाल उठाता है।

चिदंबरम का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनकी राय पार्टी की लाइन तय करती है। उन्होंने पहले भी तालिबान की आलोचना की थी। 2021 में उन्होंने कहा था कि तालिबान महिलाओं के दुश्मन हैं। इस बार उनका फोकस पत्रकारिता पर था। उन्होंने कहा कि एकजुटता दिखानी चाहिए। विपक्ष की एकजुट प्रतिक्रिया से सरकार पर दबाव बनेगा। भाजपा ने अभी चुप्पी साधी है, लेकिन प्रवक्ता ने कहा कि यह अफगान दूतावास का फैसला था। भारत महिलाओं के अधिकारों का पक्षधर है।

यह विवाद भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाता है। तालिबान से जुड़ाव जरूरी है, लेकिन मूल्यों का समझौता नहीं। विशेषज्ञ कहते हैं कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए संपर्क बनाए रखना पड़ेगा। लेकिन ऐसी घटनाएं छवि खराब करती हैं। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने तालिबान पर प्रतिबंध लगाए हैं। भारत ने भी मानवीय सहायता दी, लेकिन मान्यता नहीं। मुत्तकी की यात्रा इसी संतुलन का हिस्सा थी। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इसे विवादास्पद बना दिया।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे अवसर माना। उन्होंने कहा कि यह तालिबान की मानसिकता को उजागर करता है। भारत में महिलाओं ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया। सोशल मीडिया पर WomenInMedia कैंपेन शुरू हो गया। चिदंबरम की अपील ने पुरुषों को जिम्मेदारी याद दिलाई। कहा कि समानता सबकी जिम्मेदारी है। यह घटना न केवल अफगानिस्तान, बल्कि वैश्विक लैंगिक समानता पर बहस छेड़ेगी।

Also Read- अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन से गिरे यात्री को RPF कांस्टेबल ने बचाया, वायरल वीडियो ने दिल जीता।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow