ट्रंप की नीतियों पर अमेरिकी संसद में हंगामा, मोदी-पुतिन सेल्फी को पोस्टर बनाकर विपक्षी सांसदों ने दिया 'अहम पार्टनर खोने' का संकेत। 

अमेरिकी संसद में एक सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कार सेल्फी ने प्रमुखता हासिल कर ली, जब

Dec 11, 2025 - 11:20
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ट्रंप की नीतियों पर अमेरिकी संसद में हंगामा, मोदी-पुतिन सेल्फी को पोस्टर बनाकर विपक्षी सांसदों ने दिया 'अहम पार्टनर खोने' का संकेत। 
ट्रंप की नीतियों पर अमेरिकी संसद में हंगामा, मोदी-पुतिन सेल्फी को पोस्टर बनाकर विपक्षी सांसदों ने दिया 'अहम पार्टनर खोने' का संकेत। 

अमेरिकी संसद में एक सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कार सेल्फी ने प्रमुखता हासिल कर ली, जब डेमोक्रेटिक रैंकिंग मेंबर सिडनी कामलागर-डोव ने इसे पोस्टर के रूप में दिखाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह तस्वीर हजारों शब्द बोलती है, जो ट्रंप प्रशासन की दबावपूर्ण नीतियों की कीमत को दर्शाती है। यह सत्र हाउस फॉरेन अफेयर्स सबकमिटी ऑन साउथ एंड सेंट्रल एशिया द्वारा बुलाया गया था, जहां यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पर चर्चा हो रही थी। कामलागर-डोव ने ट्रंप की नीतियों को 'नाक काटने जैसा' करार दिया, जो अमेरिका-भारत साझेदारी को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां भारत को रूस की ओर धकेल रही हैं, और अमेरिका को एक महत्वपूर्ण साझेदार खोने का जोखिम हो रहा है। सत्र में अन्य डेमोक्रेटिक सदस्यों ने भी ट्रंप के टैरिफ और वीजा नीतियों पर चिंता जताई, जो द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर कर रही हैं। यह घटना ट्रंप के हालिया बयानों के बाद आई, जिसमें उन्होंने भारत के चावल निर्यात पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।

सेल्फी की घटना पुतिन की हालिया भारत यात्रा से जुड़ी है, जहां मोदी और पुतिन ने एक एसयूवी में बैठकर सेल्फी ली, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यह तस्वीर अनौपचारिक और निकटता दर्शाती थी, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दिखाती है। कामलागर-डोव ने सत्र में इस तस्वीर को उठाते हुए कहा कि ट्रंप ने जब पदभार संभाला, तो उन्हें एक मजबूत साझेदारी मिली थी, जिसमें क्वाड की ऊर्जा, रक्षा-सहयोग, सप्लाई चेन प्रयास और राजनीतिक गति शामिल थी। लेकिन टैरिफ और दबावपूर्ण नीतियों ने इसे कमजोर कर दिया। उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत टैरिफ भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए, जो किसी भी देश पर सबसे अधिक हैं, और 25 प्रतिशत टैरिफ रूस तेल आयात पर भारत से जुड़े। ये कदम उच्च-स्तरीय बैठकों को पटरी से उतार चुके हैं, जैसे क्वाड लीडर्स समिट का स्थगापन। कामलागर-डोव ने जोर दिया कि अमेरिका को तत्काल कदम उठाने चाहिए, ताकि यूएस-इंडिया साझेदारी को नुकसान से बचाया जा सके, जो अमेरिकी समृद्धि, सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व के लिए आवश्यक है। ट्रंप की टैरिफ नीतियां सत्र का मुख्य मुद्दा बनीं, जहां कामलागर-डोव ने कहा कि ये न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं को भी प्रभावित कर रही हैं। अगस्त 2025 में अमेरिका ने अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए, जो व्यापार विवादों और भारत के रूसी तेल खरीद पर चिंताओं से प्रेरित थे। ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस मीटिंग में भारत, वियतनाम और थाईलैंड के सस्ते आयातों पर शिकायत सुनी, और भारत के चावल को 'डंपिंग' बताते हुए नए टैरिफ की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि वे इस 'समस्या' का ध्यान रखेंगे, और अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की सहायता पैकेज की घोषणा की। ये टिप्पणियां व्यापार वार्ताओं को और जटिल बना रही हैं, जहां पहले से ही टैरिफ बाधाएं हैं। सत्र में एक अन्य प्रतिनिधि प्रामिला जयपाल ने कहा कि टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अमेरिकी हितों को भी प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कठोर आव्रजन नियमों और क्रॉस-बॉर्डर पेशेवर संबंधों पर भी चिंता जताई।

सत्र के गवाहों ने चेतावनी दी कि टैरिफ रणनीतिक प्राथमिकताओं को छिपा रहे हैं, जैसे चीन का मुकाबला और सप्लाई चेन स्थिरता। एक गवाह ने कहा कि यूएस-इंडिया साझेदारी कम लागत, उच्च लाभ वाली रही है। कामलागर-डोव ने ट्रंप को 'भारत खोने वाले राष्ट्रपति' बनने का खतरा बताया, जो रूस की ओर झुकाव को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि दबावपूर्ण साझेदारी की एक कीमत है, और अमेरिका को विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। सत्र में तस्वीर को प्रोप के रूप में इस्तेमाल किया गया, जो दर्शाता था कि अमेरिकी नीतियां ही साझेदारी को कमजोर कर रही हैं, न कि भारत के फैसले। डेमोक्रेट्स ने द्विपक्षीय प्रगति को उजागर किया, जो दशकों की रही है, लेकिन ट्रंप की नीतियां इसे नष्ट कर रही हैं। ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से मोदी के साथ मजबूत संबंधों का जिक्र किया, लेकिन व्यापार पर कठोर भाषा का इस्तेमाल किया, जैसे भारत को 'टैरिफ किंग' कहना। भारत-अमेरिका व्यापार संबंध जटिल हो गए हैं, जहां टैरिफ ने वार्ताओं को बाधित किया है। भारत ने रूसी तेल पर 25 प्रतिशत टैरिफ का सामना किया, जो अमेरिकी दबाव का हिस्सा है। ट्रंप की चावल निर्यात पर धमकी ने अनिश्चितता बढ़ा दी, जो अमेरिकी किसानों की शिकायतों से उपजी है। सत्र में कहा गया कि ये नीतियां उच्च-स्तरीय संलग्नता को रोक रही हैं, और क्वाड जैसे मंच प्रभावित हो रहे हैं। कामलागर-डोव ने जोर दिया कि अमेरिका को सहयोग पर लौटना चाहिए, जो सुरक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आवश्यक है। सत्र ने रक्षा, ऊर्जा, एआई, अंतरिक्ष और उन्नत तकनीकों में साझेदारी को मौलिक बताया। गवाहों ने कहा कि टैरिफ रणनीतिक हितों को ओवरशैडो कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूसी तेल खरीद पर दबाव डाला, लेकिन यह बैकफायर कर रहा है। सत्र में भारत के लंबी अवधि के हितों का जिक्र हुआ, जो चीन के साथ सह-अस्तित्व पर आधारित हैं।

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