BR Shetty Lawsuit: बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य पर किया केस, ₹1.42 लाख करोड़ का मांगा हर्जाना; 9 पॉइंट्स में समझें पूरा विवाद

भारतीय मूल के कारोबारी बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य पक्षों के खिलाफ याचिका दायर कर ₹1.42 लाख करोड़ का हर्जाना और 18% वार्षिक ब्याज मांगा है। समझें पूरा मामला 9 पॉइंट्स में।

Oct 14, 2026 - 13:28
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BR Shetty Lawsuit: बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य पर किया केस, ₹1.42 लाख करोड़ का मांगा हर्जाना; 9 पॉइंट्स में समझें पूरा विवाद
  • 18% सालाना ब्याज और ₹1.42 लाख करोड़ की मांग: बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ कानूनी जंग में उतरे बीआर शेट्टी, 9 पॉइंट्स में समझें पूरा विवाद
  • बैंक ऑफ बड़ौदा पर क्यों लगा फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप? बीआर शेट्टी की भारी-भरकम याचिका के पीछे की इनसाइड स्टोरी
  • अरबपति बीआर शेट्टी बनाम बैंक ऑफ बड़ौदा: अरबों डॉलर के कथित नुकसान पर बॉम्बे हाईकोर्ट में घमासान, जानिए बैंक का नाम क्यों आया

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) आधारित एनएमसी हेल्थकेयर के संस्थापक और एनआरआई कारोबारी बीआर शेट्टी (बावागुथु रघुराम शेट्टी) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य संस्थाओं व व्यक्तियों के खिलाफ एक बड़ा कानूनी मोर्चा खोल दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में शेट्टी ने बैंक और अन्य पक्षों पर कथित धोखाधड़ी व मिलीभगत के जरिए उनके वैश्विक कारोबारी साम्राज्य को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए करीब 1.42 लाख करोड़ रुपये (लगभग $1500 करोड़ से अधिक) के हर्जाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, राशि का भुगतान होने तक 18 प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज चुकाने की भी मांग की गई है।

इतनी विशाल राशि के दावे और कानूनी विवाद के चलते भारतीय बैंकिंग सेक्टर और शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है।

  • 9 पॉइंट्स में समझें पूरा मामला और बैंक ऑफ बड़ौदा की संलिप्तता

मुकदमे का दायरा और प्रतिवादी: बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कुल 26 पक्षों के खिलाफ याचिका दायर की है। इसमें बैंक अधिकारियों, पूर्व सहयोगियों और वित्तीय ऑडिटर्स की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

दावे की विशाल राशि: याचिकाकर्ता ने कथित व्यावसायिक क्षति, प्रतिष्ठा हानि और गैर-कानूनी जब्ती के एवज में 1.42 लाख करोड़ रुपये का हर्जाना तय किया है।

18% सालाना ब्याज की शर्त: याचिका में अदालत से यह भी अपील की गई है कि हर्जाने की रकम के अंतिम निपटान तक सभी प्रतिवादियों से संयुक्त और अलग-अलग रूप से 18% वार्षिक चक्रवृद्धि/साधारण ब्याज वसूला जाए।

विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (NMC Health संकट): साल 2019-20 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध बीआर शेट्टी की कंपनी 'एनएमसी हेल्थ' पर शॉर्ट-सेलर मडी वाटर्स की एक रिपोर्ट के बाद भारी वित्तीय अनियमितताओं और छिपे हुए कर्ज के आरोप लगे थे, जिसके बाद कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली गई थी।

शेट्टी का मुख्य आरोप: बीआर शेट्टी का दावा है कि उनके कुछ शीर्ष प्रबंधकों, बैंक अधिकारियों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने उनके फर्जी हस्ताक्षरों और अनधिकृत गारंटी पत्रों का उपयोग कर भारी कर्ज लिया, जिससे उनका पूरा साम्राज्य डूब गया।

मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा का नाम क्यों आया?: बैंक ऑफ बड़ौदा एनएमसी हेल्थ और शेट्टी से जुड़ी कंपनियों को यूएई तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर्ज देने वाले प्रमुख भारतीय बैंकों में शामिल था। शेट्टी का आरोप है कि बैंक ने आवश्यक वित्तीय जांच (ड्यू डिलिजेंस) किए बिना उनकी व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट संपत्तियों पर अनुचित दावों और ऋण वसूली की एकतरफा कार्रवाइयां कीं।

फर्जीवाड़े और मिलीभगत का दावा: याचिका में आरोप लगाया गया है कि बैंक के कुछ अधिकारियों ने कथित रूप से वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया और उन ऋण समझौतों को वैध माना जिन पर शेट्टी के फर्जी हस्ताक्षर होने का दावा किया जा रहा है।

बैंक ऑफ बड़ौदा का रुख: बैंक ऑफ बड़ौदा पहले से ही यूएई और भारत की अदालतों व न्यायाधिकरणों (DRT) में बीआर शेट्टी और उनकी कंपनियों से हजारों करोड़ रुपये के बकाए की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। बैंक का मानना रहा है कि शेट्टी ऋण अदायगी में चूककर्ता हैं और यह नया दावा बैंक की वैध वसूली प्रक्रिया को पटरी से उतारने का एक प्रयास है।

अदालती प्रक्रिया: कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर यह सिविल मुकदमा अभी प्रारंभिक चरण में है। अदालत को पहले यह तय करना होगा कि विदेशी क्षेत्राधिकार से जुड़े इस विवाद पर सुनवाई भारत में किस सीमा तक विचारणीय है।

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