जयपुर के सांगानेर में टेक्सटाइल फैक्ट्रियों का जहरीला effluent, दूषित पानी से उग रही सब्जियां बन रही स्वास्थ्य के लिए स्लो पॉइजन

प्रदूषण का असर स्थानीय जल स्रोतों पर साफ दिख रहा है। द्रव्यवती नदी में इंडस्ट्रियल और डोमेस्टिक वेस्टवाटर का मिश्रण हो रहा है, जिससे नदी की पानी की गुणव

Dec 14, 2025 - 10:54
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जयपुर के सांगानेर में टेक्सटाइल फैक्ट्रियों का जहरीला effluent, दूषित पानी से उग रही सब्जियां बन रही स्वास्थ्य के लिए स्लो पॉइजन
जयपुर के सांगानेर में टेक्सटाइल फैक्ट्रियों का जहरीला effluent, दूषित पानी से उग रही सब्जियां बन रही स्वास्थ्य के लिए स्लो पॉइजन

जयपुर के सांगानेर इलाके में कपड़ा रंगाई, छपाई और ब्लीचिंग करने वाली फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी आसपास के जल स्रोतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी प्रदूषण फैल रहा है। इस दूषित पानी से सिंचाई करने पर उगाई जाने वाली हरी सब्जियां और फल धीरे-धीरे जहर का काम कर रहे हैं, जो लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं। सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से अधिक गांव स्थित हैं, जहां यह समस्या सबसे गंभीर रूप में देखी जा रही है। फैक्ट्रियों का अनट्रिटेड effluent द्रव्यवती नदी और इससे जुड़े नालों में पहुंच रहा है, जो आगे चांदलई झील तक जाता है। इस क्षेत्र में सैकड़ों टेक्सटाइल यूनिट्स कार्यरत हैं, जिनमें से कई बिना उचित अनुमति के चल रही हैं। इन यूनिट्स से निकलने वाला पानी भारी धातुओं जैसे आर्सेनिक, मरक्यूरी, क्रोमियम और अन्य केमिकल्स से लदा होता है, साथ ही एसिड, साल्ट और ब्लीचिंग एजेंट्स भी शामिल होते हैं। यह पानी भूमिगत जल और सतही जल दोनों को प्रदूषित कर रहा है। अध्ययनों में पाया गया है कि सांगानेर के ग्राउंडवाटर में हेवी मेटल्स की मात्रा अधिक है, जो डाइंग प्रोसेस का उप-उत्पाद है। इससे सिंचित खेतों में उगने वाली फसलें और सब्जियां दूषित हो रही हैं। चांदलई झील के कैचमेंट एरिया में अधिकांश भाग आवासीय और टेक्सटाइल इंडस्ट्री से घिरा हुआ है। यहां की झील में द्रव्यवती नदी से आने वाला पानी भारी प्रदूषित पाया गया है। संयुक्त समिति की जांच में सर्फेस वाटर और ग्राउंडवाटर के सैंपल्स में प्रदूषण की पुष्टि हुई है। सांगानेर में करीब 1255 टेक्सटाइल यूनिट्स हैं, जिनमें से कई ने प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन किया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई यूनिट्स को नोटिस जारी किए हैं और कुछ को बंद करने के निर्देश दिए हैं।

इस प्रदूषण का असर स्थानीय जल स्रोतों पर साफ दिख रहा है। द्रव्यवती नदी में इंडस्ट्रियल और डोमेस्टिक वेस्टवाटर का मिश्रण हो रहा है, जिससे नदी की पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। सांगानेर के आसपास के गांवों में ग्राउंडवाटर में टीडीएस की मात्रा बढ़ गई है, जिससे डाइंग के लिए भी पानी अनुपयुक्त हो रहा है। खेतों में इस पानी से सिंचाई करने पर मिट्टी में केमिकल्स जमा हो रहे हैं, जो फसलों में पहुंच रहे हैं। हरी सब्जियां और अन्य फसलें इस दूषित पानी से उगाई जा रही हैं, जो बाजार में पहुंचकर लोगों तक जा रही हैं।

क्षेत्र में टेक्सटाइल इंडस्ट्री लंबे समय से फल-फूल रही है, लेकिन अनट्रिटेड effluent की समस्या पुरानी है। कई यूनिट्स सीधे नालों में गंदा पानी छोड़ रही हैं, जो आगे नदी और झील में मिल रहा है। इससे न केवल जल प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित हो रही है। गांवों में किसान इस पानी पर निर्भर हैं, क्योंकि अन्य स्रोत सीमित हैं। दूषित पानी से उगने वाली सब्जियां धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं। चांदलई झील और द्रव्यवती नदी के पानी के सैंपल्स में प्रदूषण के उच्च स्तर पाए गए हैं। इंडस्ट्रियल क्लस्टर से आने वाला effluent सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इन जल स्रोतों में पहुंच रहा है। सांगानेर के टेक्सटाइल यूनिट्स मुख्य रूप से प्रिंटिंग और डाइंग का काम करती हैं, जो पानी की बड़ी मात्रा में खपत करती हैं और उतनी ही मात्रा में प्रदूषित पानी निकालती हैं। कई जगहों पर कॉमन effluent ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता अपर्याप्त है या वे पूरी तरह कार्यरत नहीं हैं। इस इलाके में दो दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हैं, जहां कृषि मुख्य आजीविका है। किसान दूषित पानी से खेती करने को मजबूर हैं, क्योंकि ग्राउंडवाटर भी प्रदूषित हो चुका है। सब्जियां और फल जो सेहत के लिए खाए जाते हैं, वे अब प्रदूषकों से युक्त हो रहे हैं। क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, जिससे स्थानीय जल स्रोतों का उपयोग खतरनाक हो गया है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन समस्या बनी हुई है। कई यूनिट्स पर कार्रवाई हुई है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पाया है। द्रव्यवती नदी के रिजुवेनेशन प्रोजेक्ट के बावजूद इंडस्ट्रियल effluent की समस्या बरकरार है। चांदलई झील में पहुंचने वाला पानी प्रदूषित पाया गया है, जो आसपास के क्षेत्र की पारिस्थितिकी को प्रभावित कर रहा है। सांगानेर का यह क्षेत्र टेक्सटाइल प्रिंटिंग के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसी कारण जल प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल पानी नालों, नदी और झील में मिल रहा है, जो आगे खेतों तक पहुंच रहा है। इससे उगाई जाने वाली फसलें दूषित हो रही हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही हैं। यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है, और विभिन्न जांचों में इसकी पुष्टि हुई है। जल स्रोतों में हेवी मेटल्स और अन्य केमिकल्स की मौजूदगी फसलों में ट्रांसफर हो रही है। गांवों में रहने वाले लोग इस दूषित पानी पर निर्भर हैं, जिससे उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं। बाजार में पहुंचने वाली सब्जियां और फल इस प्रदूषण का शिकार बन रहे हैं।

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