झुंझुनूं हिस्ट्रीशीटर हत्याकांड का मास्टरमाइंड आधा मुंडा सिर और फटे कपड़ों में भिखारी बन घूमते पकड़ा गया।
झुंझुनूं जिले में एक हिस्ट्रीशीटर की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी दीपक
झुंझुनूं जिले में एक हिस्ट्रीशीटर की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी दीपक मालसरिया पर 50 हजार रुपये का इनाम था और वह पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए आधा सिर मुंडवाकर तथा फटे पुराने कपड़े पहनकर भिखारी के रूप में घूम रहा था। पुलिस ने उसे जयपुर के खोले के हनुमानजी मंदिर इलाके से पकड़ा। हत्याकांड का शिकार हिस्ट्रीशीटर डेनिश उर्फ नरेश बावरिया था जिसकी मौत जयपुर के एसएमएस अस्पताल में हुई थी। यह घटना 19 अक्टूबर 2025 की शाम को हुई जब डेनिश अपने साथियों के साथ स्कॉर्पियो वाहन में पटाखों और लगभग तीन लाख रुपये लेकर चुडेला गांव की ओर जा रहा था।
पुलिस जांच के अनुसार दीपक मालसरिया गैंग के सदस्यों ने इस हमले की योजना बनाई थी। बदमाशों ने दो कैंपर गाड़ियों में सवार होकर डेनिश की स्कॉर्पियो को टक्कर मारी और हथियारों के बल पर उसे जबरन कार में डाल लिया। अपहरण के दौरान रास्ते में उसे बुरी तरह पीटा गया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बदमाश उसे लेकर भागे लेकिन पीछा करने वाली पुलिस की वजह से एक कैंपर अजीतगढ़ गांव के पास ट्रॉली से टकरा गया। इस हादसे में हिस्ट्रीशीटर बाबूलाल मुकुंदगढ़ और विनोद मीणा की मौत हो गई जबकि तीन अन्य बदमाश घायल हुए जिनका इलाज मंडवा के सरकारी अस्पताल में चल रहा था। डेनिश को अधमरा हालत में फेंक दिया गया था जिसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन 21 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। हत्या के पीछे दीपक मालसरिया और डेनिश बावरिया के बीच पुरानी दुश्मनी थी जो क्षेत्रीय दबदबे और आपराधिक गतिविधियों को लेकर चल रही थी। दीपक मालसरिया खुद एक हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। अपहरण और हमले के बाद वह फरार हो गया और पुलिस से बचने के लिए अपना रूप बदल लिया। उसने अपना आधा सिर मुंडवाया और फटे-पुराने कपड़े पहनकर भिखारी बनकर जयपुर में छिप गया। पुलिस को इनपुट मिला कि वह मंदिरों के आसपास भटक रहा है इसलिए कोतवाली पुलिस ने दो दिनों तक भिखारियों की रेकी की। टीम ने विभिन्न स्थानों पर भिखारियों से पूछताछ की और उनकी पहचान की पुष्टि के लिए फोटो और विवरण का मिलान किया। अंततः खोले के हनुमानजी मंदिर के पास उसे पहचान लिया गया और गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से कोई हथियार या महत्वपूर्ण सामान नहीं मिला लेकिन पुलिस ने उसके मोबाइल और अन्य सामान जब्त किए हैं। पूछताछ में उसने अपराध की साजिश में अपनी भूमिका कबूल की है। वह मास्टरमाइंड के रूप में गैंग को निर्देश दे रहा था और हमले की योजना तैयार की थी। पुलिस ने एसआईटी गठित कर मामले की गहन जांच शुरू की है ताकि अन्य शामिल सदस्यों को भी पकड़ा जा सके। इस घटना से इलाके में गैंगवार की आशंका बढ़ गई थी इसलिए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी और चेकपॉइंट लगाए थे। डेनिश बावरिया के खिलाफ 12 से अधिक मामले थे जिसमें मारपीट लूट और अवैध हथियार रखने जैसे आरोप शामिल थे। दीपक मालसरिया का नाम भी कई आपराधिक घटनाओं में आया है। पुलिस अधिकारी हरजिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी से मामले का उद्भेदन हुआ है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जांच में तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण साबित हुए। भिखारियों की रेकी के दौरान पुलिस ने कई संदिग्धों की जांच की लेकिन अंत में दीपक की पहचान पक्की हुई। यह ऑपरेशन एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय के निर्देशन में हुआ। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
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