PM Modi on Semiconductor: भारत में 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में शुरू हुआ उत्पादन, जल्द लगेंगे 5 से 8 और नए प्लांट; लाल किले से पीएम का ऐलान
80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम मोदी ने बताया कि भारत के 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है और 5 से 8 नए प्लांट जल्द लगेंगे।

- स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की बड़ी घोषणा: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत बना आत्मनिर्भर, 3 यूनिट्स में प्रोडक्शन शुरू
- लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत के 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में चिप प्रोडक्शन शुरू, 5 से 8 और नए प्लांट्स की तैयारी
- Semiconductor in India: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का संबोधन, 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को जानकारी दी कि भारत में तीन प्रमुख सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्रों (प्लांट्स) में वाणिज्यिक उत्पादन सफलतापूर्वक शुरू हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने आगामी वर्षों में 5 से 8 और नए सेमीकंडक्टर प्लांट्स स्थापित किए जाने का मजबूत रोडमैप प्रस्तुत किया। इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाओं, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र में चिप्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच यह कदम भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मुख्य राजकीय समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के औद्योगिक और तकनीकी विकास की समीक्षा करते हुए सेमीकंडक्टर विनिर्माण में मिली ऐतिहासिक सफलता को साझा किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल सेमीकंडक्टर चिप्स का उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि इसका घरेलू उत्पादन करने वाले अग्रणी राष्ट्रों की कतार में शामिल हो गया है। देश में स्थापित तीन अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट्स में चिप का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिससे देश की आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
संबोधन के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आधुनिक युग में सेमीकंडक्टर किसी भी राष्ट्र की आर्थिक और सामरिक संप्रभुता की आधारशिला हैं। स्मार्टफोन से लेकर चिकित्सा उपकरणों, उपग्रह प्रणालियों, रेलवे, ऑटोमोबाइल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तक, हर आधुनिक तकनीक का संचालन इन्हीं माइक्रोचिप्स पर निर्भर करता है। भारत द्वारा इस दिशा में तेजी से उठाए गए कदम देश के विनिर्माण परिदृश्य को पूरी तरह बदल रहे हैं।
भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के तहत पिछले कुछ वर्षों में देश के भीतर वैश्विक मानकों के अनुरूप फैब और ओएसएटी (OSAT/ATMP) संयंत्रों के निर्माण को गति दी गई थी। केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और राज्य सरकारों द्वारा दी गई रियायतों के दम पर वैश्विक और घरेलू तकनीकी कंपनियों ने भारत में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया।
गुजरात और असम समेत कई राज्यों में स्थापित इन परियोजनाओं के प्रथम चरण का निर्माण पूरा होने के बाद अब तीन इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह सक्रिय हो गई है। लाल किले से राष्ट्र को आश्वस्त करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह यात्रा यहीं समाप्त नहीं होगी। आगामी वर्षों में देश के विभिन्न औद्योगिक गलियारों में 5 से 8 और नए अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके लिए आवश्यक मंजूरियां और नीतिगत सहयोग प्रदान किए जा रहे हैं।
उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की गई इस घोषणा का व्यापक स्वागत किया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) और उद्योग मंडलों का मानना है कि तीन प्लांट्स में उत्पादन शुरू होना भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के लिए एक युगांतरकारी क्षण है। इससे घरेलू विनिर्माताओं को समय पर और किफायती दरों पर घटकों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
वैश्विक सप्लाई चेन विश्लेषकों का कहना है कि दुनिया इस समय आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण (चाइना प्लस वन नीति) की तलाश में है, और भारत का यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को कई गुना बढ़ाएगा। युवाओं और तकनीकी पेशेवरों ने भी इस कदम को बड़े पैमाने पर उच्च-कुशल रोजगार (हाई-स्किल जॉब्स) सृजित करने वाला कदम बताया है।
सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का सीधा असर देश के व्यापार संतुलन और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत को सालाना अरबों डॉलर के चिप आयात पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा बाहर जाता था। घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू होने से न केवल आयात बिल में कमी आएगी, बल्कि निर्यात के नए द्वार भी खुलेंगे।
इसके साथ ही, भारत की यह तकनीकी छलांग राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता को भी मजबूती प्रदान करेगी। संचार उपकरणों और रक्षा साजो-सामान में स्थानीय स्तर पर निर्मित चिप्स का उपयोग सुरक्षा संबंधी संवेदनशील जोखिमों को न्यूनतम करेगा। स्थानीय स्तर पर शोध और विकास (R&D) को बढ़ावा मिलने से देश में वैश्विक स्तर की डिजाइनिंग और इंजीनियरिंग प्रतिभाओं का नया पूल तैयार होगा।
सरकार का आगामी लक्ष्य नए 5 से 8 प्लांट्स की स्थापना प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारना है। इसके लिए आवश्यक औद्योगिक बुनियादी ढांचे, निर्बाध हरित ऊर्जा, अत्यधिक शुद्ध जल आपूर्ति और प्रशिक्षित मानव संसाधन के विकास पर समन्वित प्रयास जारी रहेंगे।
आने वाले महीनों में भारत सरकार वैश्विक सेमीकंडक्टर दिग्गजों के साथ नई साझेदारियों और आधुनिक नैनोमीटर तकनीक के हस्तांतरण को लेकर नए समझौतों को अंतिम रूप दे सकती है। यह पहल भारत को वर्ष 2030 तक दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर उत्पादक देशों की सूची में मजबूती से स्थापित करने की दिशा तय करेगी।
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