Assam Flood Death Toll Crosses 100: असम में मूसलाधार बारिश और बाढ़ से स्थिति विकराल, 100 से अधिक लोगों की मौत

Assam Flood News: असम में लगातार बारिश और बाढ़ से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। राज्य में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जानें राहत और बचाव कार्य का अपडेट।

Aug 10, 2026 - 13:25
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Assam Flood Death Toll Crosses 100: असम में मूसलाधार बारिश और बाढ़ से स्थिति विकराल, 100 से अधिक लोगों की मौत
  • Assam Flood Situation: असम में बाढ़ और बारिश से तबाही, मृतकों का आंकड़ा 100 के पार, जानें ताजा हालात
  • असम में बाढ़ और बारिश का विकराल रूप, मृतकों का आंकड़ा 100 के पार; कई जिले जलमग्न, एनडीआरएफ का राहत अभियान जारी
  • Assam Flood News: असम में बाढ़ और बारिश का तांडव, जान गंवाने वालों की संख्या 100 के पार पहुंची

असम में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। राज्य में पिछले कई दिनों से जारी इस प्राकृतिक आपदा और बारिश से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे राज्य के दर्जनों जिले और हजारों गांव जलमग्न हो चुके हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें चौबीसों घंटे राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। प्रभावित इलाकों से लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है।

पूर्वोत्तर राज्य असम में मानसून के आगमन के बाद से जारी मूसलाधार बारिश ने भयावह रूप ले लिया है। लगातार बारिश की वजह से राज्य की प्रमुख नदियां उफान पर हैं और तटबंध टूटने से ग्रामीण व शहरी इलाके पानी में डूब गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल बाढ़, भूस्खलन और बारिश से जुड़ी विभिन्न दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 100 के आंकड़े को पार कर गई है। लाखों की आबादी इस आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुई है और फसलें, बुनियादी ढांचा तथा मवेशी भारी पैमाने पर क्षतिग्रस्त हुए हैं।

असम में बीते कुछ हफ्तों से रुक-रुक कर हो रही अतिवृष्टि ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण मैदानी क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ गया। ब्रह्मपुत्र नदी गुवाहाटी, धुबरी, जोरहाट और तेजपुर सहित कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा सुबनसिरी, धनसिरी और कपिली जैसी नदियां भी उफान पर हैं। जलभराव के चलते सड़कों, पुलों और रेलवे लाइनों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे कई जिलों का आपस में संपर्क टूट गया है। बाढ़ का असर न केवल आवासीय क्षेत्रों पर पड़ा है, बल्कि प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) और पबितोरा वन्यजीव अभयारण्य का बड़ा हिस्सा भी पानी में डूब चुका है। वन्यजीवों को सुरक्षित टीलों और ऊंचे स्थानों की ओर शरण लेनी पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीमें जलीय जीवों और वन्यजीवों को बचाने के लिए गश्त बढ़ा चुकी हैं।

मुख्य बिंदु-

राज्य भर में 25 से अधिक जिले जलभराव और बाढ़ से अत्यधिक प्रभावित हैं।

बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की वजह से मरने वालों की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी है।

राज्य सरकार द्वारा स्थापित राहत शिविरों में लाखों लोगों को भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की दर्जनों टीमें नावों के जरिए दूरदराज इलाकों में फंसे लोगों को निकाल रही हैं।

असम के मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि राहत सामग्री और दवाओं की वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से भी निरंतर संपर्क बनाए रखा है और स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सहायता मांगी है। केंद्र सरकार ने राज्य को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। राहत एवं बचाव कार्यों में केंद्रीय एजेंसियों की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया है। वहीं, स्थानीय सामाजिक संगठन, स्वयंसेवक और सेना की इकाइयां भी बाढ़ पीड़ितों तक सूखा राशन और पीने का साफ पानी पहुंचाने में प्रशासन का हाथ बंटा रही हैं।

इस प्राकृतिक आपदा से असम की अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे धान की फसल और सब्जियों की खेती पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, बाढ़ के पानी के कारण संक्रामक बीमारियों, जैसे हैजा, दस्त और त्वचा संबंधी रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। प्राथमिक स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी भर जाने से शैक्षणिक और चिकित्सा सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग (IMD) ने असम और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति के जल्द सामान्य होने की उम्मीद कम ही दिख रही है। प्रशासन का मुख्य ध्यान राहत शिविरों में रह रहे लोगों तक चिकित्सा और खाद्य सामग्री पहुंचाने तथा जलस्तर घटने के बाद महामारियों की रोकथाम पर रहेगा। इसके साथ ही, नदियों के टूटे तटबंधों की अस्थाई मरम्मत और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे का पुननिर्माण सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगा।

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