सोने में 3.5% तो चांदी में करीब 5% की कमी आई, लगातार बढ़ रही कीमतों के बीच राहत भरी खबर
नीचे दी गई तालिका में दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, कानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, आगरा, हरदोई, कोलकाता, पुणे, मुंबई, असम, चेन्नई, तमिलनाडु, मध्य प्रदे
30 जनवरी 2026 को भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतियों के प्रभाव से कीमतें प्रभावित हुईं। इस दिन सोने की कीमतों में लगभग 3.5% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी में करीब 5% की कमी आई। यह बदलाव हाल के रिकॉर्ड ऊंचाई से पीछे हटने का संकेत है, जहां निवेशकों ने लाभ कमाने के लिए बिकवाली की। भारत में सोना हमेशा से ही एक सुरक्षित निवेश का साधन रहा है, खासकर शादियों, त्योहारों और आर्थिक संकटों के समय। लेकिन 2026 में, वैश्विक घटनाओं जैसे यूएस-चाइना व्यापार तनाव, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन से जुड़े आर्थिक प्रभावों ने कीमतों को प्रभावित किया है।
सोने की कीमतों को समझने के लिए पहले वैश्विक संदर्भ को देखना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) द्वारा निर्धारित स्पॉट प्राइस भारत की कीमतों का आधार बनती है। 30 जनवरी 2026 को, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत लगभग 2,500 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के आसपास थी, जो पिछले सप्ताह से 2-3% कम थी। इसका कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के बयान थे, जिनमें ब्याज दरों में संभावित वृद्धि का संकेत दिया गया था। मजबूत डॉलर ने सोने को महंगा बना दिया, जिससे निवेशक अन्य संपत्तियों की ओर मुड़े। भारत में, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में भी गिरावट देखी गई, जहां 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 1,67,000 रुपये के आसपास रहा। इसी तरह, चांदी की कीमतें MCX पर 6% गिरकर 3,75,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं। यह गिरावट हाल के महीने में 62% की वृद्धि के बाद आई, जो औद्योगिक मांग और निवेशकों की रुचि से प्रेरित थी।
भारत में सोने और चांदी की कीमतें शहर-दर-शहर थोड़ी भिन्न होती हैं, मुख्य रूप से स्थानीय करों, परिवहन लागत और ज्वैलर्स की मार्जिन के कारण। उदाहरण के लिए, उत्तर भारत में दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में कीमतें समान रहती हैं, जबकि दक्षिण भारत में चेन्नई में थोड़ी ऊंची हो सकती हैं क्योंकि वहां सोने की खपत अधिक है। इसी तरह, पश्चिम भारत में मुंबई और पुणे में कीमतें MCX से सीधे प्रभावित होती हैं। पूर्वी भारत में कोलकाता में कीमतें थोड़ी अलग हो सकती हैं, जबकि असम जैसे राज्यों में गुवाहाटी प्रतिनिधि शहर है। मध्य प्रदेश में भोपाल, राजस्थान में जयपुर और तमिलनाडु में चेन्नई की कीमतें स्थानीय बाजार की गतिविधियों पर निर्भर करती हैं। चांदी की कीमतें आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान रहती हैं, क्योंकि यह कम मूल्यवान धातु है और परिवहन आसान है। लेकिन हाल की गिरावट ने सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
अब हम विशिष्ट कीमतों पर नजर डालते हैं। नीचे दी गई तालिका में 30 जनवरी 2026 की कीमतें दर्शाई गई हैं, जो विभिन्न स्रोतों से सत्यापित हैं। कीमतें प्रति 10 ग्राम सोने और प्रति किलोग्राम चांदी के लिए हैं। जहां शहर-विशिष्ट डेटा उपलब्ध नहीं था, वहां निकटतम शहर या राष्ट्रीय औसत का उपयोग किया गया है, जैसे शाहजहांपुर के लिए लखनऊ, बाराबंकी के लिए लखनऊ, हरदोई के लिए लखनऊ। असम के लिए गुवाहाटी, मध्य प्रदेश के लिए भोपाल, राजस्थान के लिए जयपुर और तमिलनाडु के लिए चेन्नई की कीमतें ली गई हैं।
| जगह | 22 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम, रुपये में) | 24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम, रुपये में) | चांदी (प्रति किलोग्राम, रुपये में) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| नोएडा | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| लखनऊ | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| कानपुर | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| बरेली | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| शाहजहांपुर | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| बाराबंकी | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| मुरादाबाद | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| आगरा | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| हरदोई | 1,57,400 | 1,65,270 | 3,95,000 |
| कोलकाता | 1,57,900 | 1,65,800 | 3,95,000 |
| पुणे | 1,56,900 | 1,64,750 | 3,95,000 |
| मुंबई | 1,56,900 | 1,64,750 | 3,95,000 |
| असम (गुवाहाटी) | 1,57,900 | 1,65,800 | 3,95,000 |
| चेन्नई | 1,62,000 | 1,70,100 | 3,95,000 |
| तमिलनाडु (चेन्नई) | 1,62,000 | 1,70,100 | 3,95,000 |
| मध्य प्रदेश (भोपाल) | 1,56,900 | 1,64,750 | 3,95,000 |
| राजस्थान (जयपुर) | 1,57,440 | 1,65,300 | 3,95,000 |
ये कीमतें बाजार बंद होने के समय की हैं और जीएसटी तथा अन्य करों को छोड़कर हैं। वास्तविक खरीदारी में 3% जीएसटी जोड़ा जाता है। सोने की शुद्धता के आधार पर, 24 कैरेट सोना निवेश के लिए बेहतर है, जबकि 22 कैरेट ज्वैलरी के लिए उपयुक्त है क्योंकि इसमें अन्य धातुएं मिली होती हैं।
इस गिरावट के पीछे कई कारक हैं। सबसे पहले, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती ने डॉलर इंडेक्स को 105 के स्तर पर पहुंचा दिया, जो सोने को दबा रहा है। दूसरा, भारत में आयात शुल्क में हाल की वृद्धि ने स्थानीय कीमतों को प्रभावित किया। तीसरा, औद्योगिक मांग में कमी, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा सेक्टर में, ने चांदी को प्रभावित किया। लेकिन लंबे समय में, सोना एक सुरक्षित आश्रय है। 2020 से 2026 तक, सोने की कीमतें औसतन 10-15% वार्षिक बढ़ी हैं, मुद्रास्फीति और स्टॉक मार्केट की अस्थिरता के कारण।
उत्तर भारत में, दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में सोने की मांग हमेशा ऊंची रहती है। यहां की कीमतें राष्ट्रीय औसत से थोड़ी कम हैं क्योंकि ये आयात केंद्र के करीब हैं। लखनऊ, कानपुर और आगरा जैसे शहरों में, जहां ज्वैलरी उद्योग मजबूत है, कीमतें स्थिर रहीं। बरेली और मुरादाबाद में, जो पीतल और धातु उद्योग के लिए जाने जाते हैं, चांदी की कीमतों में गिरावट से स्थानीय कारोबार प्रभावित हुआ। शाहजहांपुर, बाराबंकी और हरदोई जैसे छोटे शहरों में कीमतें लखनऊ से मेल खाती हैं, क्योंकि यहां बड़े बाजार नहीं हैं।
पूर्वी भारत में, कोलकाता में सोने की कीमतें थोड़ी ऊंची हैं, क्योंकि बंगाल में सोने की सांस्कृतिक महत्व है। असम में गुवाहाटी की कीमतें कोलकाता से समान हैं, लेकिन बाढ़ और जलवायु मुद्दों से आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। पश्चिम भारत में, मुंबई और पुणे में कीमतें MCX से सीधे जुड़ी हैं, जहां गिरावट सबसे ज्यादा महसूस की गई। मुंबई, जो भारत का वित्तीय केंद्र है, में निवेशक सोने को हेज के रूप में देखते हैं।
दक्षिण भारत में, चेन्नई और तमिलनाडु में कीमतें सबसे ऊंची हैं, क्योंकि यहां सोने की खपत प्रति व्यक्ति सबसे अधिक है। मध्य भारत में, मध्य प्रदेश के भोपाल में कीमतें पश्चिमी राज्यों से मेल खाती हैं, जबकि राजस्थान के जयपुर में, जो ज्वैलरी हब है, कीमतें थोड़ी ऊंची हैं।
निवेशकों के लिए सलाह: यदि आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो गिरावट का फायदा उठाएं। लेकिन लंबे समय के लिए निवेश करें, न कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग। गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेहतर विकल्प हैं। चांदी के लिए, औद्योगिक रिकवरी का इंतजार करें।
इतिहास में देखें तो, 2008 की मंदी में सोना 50% बढ़ा था। 2020 की महामारी में भी यही हुआ। 2026 में, जलवायु परिवर्तन और एआई-प्रेरित आर्थिक बदलाव सोने को और मजबूत कर सकते हैं। लेकिन जोखिम हमेशा रहते हैं, जैसे मुद्रास्फीति नियंत्रण।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी में कीमतें स्थिर हो सकती हैं, यदि फेड ब्याज दरें नहीं बढ़ाता। भारत सरकार की नीतियां, जैसे गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम, भी प्रभाव डालेंगी। स्थानीय स्तर पर, दिल्ली में ज्वैलर्स एसोसिएशन ने गिरावट पर चिंता जताई, जबकि मुंबई में ट्रेडर्स आशावादी हैं।
सोने का महत्व भारतीय संस्कृति में गहरा है। यह धन, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक है। चांदी स्वास्थ्य और चंद्रमा से जुड़ी है। आर्थिक रूप से, सोना विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा है। आरबीआई के पास 800 टन से अधिक सोना है।
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